केस मैट्रिक्स: Delhi Consumer Commission Order on Society Maintenance
| पहलू | विवरण |
| संबंधित आयोग | दक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-II |
| माननीय पीठ | अध्यक्ष मोनिका ए. श्रीवास्तव एवं सदस्य किरण कौशल |
| शिकायतकर्ता | संजय खजांची और आशा खजांची (फ्लैट मालिक) |
| विपक्षी कंपनी | परफेक्ट फैसिलिटीज मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड |
| सोसायटी/लोकेशन | आर्किड मेट्रोपोलिस, अरबिंदो मार्ग, नई दिल्ली |
| कुल मुआवजा व खर्च | ₹5,00,000 (मुआवजा) + ₹15,000 (कानूनी खर्च) |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | मेंटेनेंस फीस वसूलने वाली कंपनियां घटिया सर्विस या कॉमन एरिया की अनदेखी के लिए सीधे जिम्मेदार हैं। |
Society Maintenance: आवासीय सोसायटियों और सोसायटियों का रखरखाव (Maintenance) करने वाली कंपनियों की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए दक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-II ने एक बड़ा फैसला सुनाया है।
आयोग की अध्यक्ष मोनिका ए. श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशल की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि निवासी मेंटेनेंस चार्ज का भुगतान कर रहे हैं, तो कंपनी अपनी संविदात्मक जिम्मेदारियों (Contractual Obligations) से भाग नहीं सकती। आयोग ने मेंटेनेंस का भारी बिल वसूलने के बावजूद परिसर का उचित रखरखाव न करने पर परफेक्ट फैसिलिटीज मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड (Perfect Facilities Management Private Limited) को सेवा में कमी का दोषी पाया और पीड़ित दंपत्ति को ₹5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
मामला क्या था?: प्रीमियम फ्लैट का भारी बिल और बदहाल सुविधाएं
- फ्लैट और एग्रीमेंट: संजय खजांची और आशा खजांची ने 31 दिसंबर 2021 को अरबिंदो मार्ग, नई दिल्ली स्थित आर्किड मेट्रोपोलिस (Orchid Metropolis) में एक फ्लैट खरीदा था। फ्लैट खरीदने के साथ ही वे जून 2012 के मेंटेनेंस एग्रीमेंट के तहत मिलने वाली सुविधाओं के हकदार बन गए थे।
- लापरवाही और बदहाली: आरोप था कि कंपनी लगातार मेंटेनेंस बिल तो भेजती रही, लेकिन सुविधाएं पूरी तरह बदहाल थीं।
- स्विमिंग पूल: 3-4 सालों से पूरी तरह बंद और खस्ताहाल था।
- लिफ्ट और सुरक्षा: लिफ्ट बार-बार खराब होती थीं, बालकनी में सुरक्षा का अभाव था, और अग्निशामक यंत्रों (Fire Extinguishers) की जांच नहीं होती थी।
- गंदगी और टूट-फूट: पार्किंग और कॉमन एरिया में कचरे का ढेर था, बच्चों के पार्क में ईंट-पत्थर बिखरे थे, और गलियारों की लाइटें व फव्वारे बंद पड़े थे।
- विवाद की शुरुआत: जब दंपत्ति ने मार्च 2024 और उससे पहले कानूनी नोटिस भेजकर शिकायत की, तो कंपनी ने सुधार करने के बजाय उल्टा बकाया मेंटेनेंस चार्ज चुकाने का नोटिस थमा दिया। इसके बाद मई 2024 में पीड़ित दंपत्ति ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
उपभोक्ता आयोग की मुख्य विधिक टिप्पणियां
अनुबंध के तहत जिम्मेदारियां निभाना अनिवार्य
कंपनी की ओर से कोई भी लिखित जवाब निर्धारित समयसीमा के भीतर न दिए जाने के कारण शिकायतकर्ता के साक्ष्य और जीपीएस टैग वाली तस्वीरें (GPS Coordinates & Timestamps) निर्विवाद रहीं। उपभोक्ता आयोग की मुख्य टिप्पणी, रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री से यह स्पष्ट है कि विपक्षी दल (परफेक्ट फैसिलिटीज मैनेजमेंट) समझौते के अनुसार अपनी संविदात्मक जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह विफल रहा है। केवल मेंटेनेंस बकाया का हवाला देकर कंपनी अपनी प्राथमिक सेवा देने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
सेवा में कमी (Deficiency in Service)
कोर्ट ने माना कि बेसिक एमेनिटीज (जैसे काम करती हुई लिफ्ट, साफ-सुथरी पार्किंग, कार्यशील स्विमिंग पूल और लाइटिंग) न देना और लगातार बिल वसूलना उपभोक्ता अधिकारों का गंभीर हनन है।
उपभोक्ता आयोग का अंतिम आदेश
- ₹5 लाख का मुआवजा: आयोग ने फैसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी को 3 महीने के भीतर ₹5 लाख का मानसिक प्रताड़ना और सेवा न देने का मुआवजा चुकाने का आदेश दिया।
- ब्याज दर: तय समयसीमा (3 महीने) में भुगतान न करने पर इस राशि पर 6% प्रतिवर्ष की दर से ब्याज लगेगा।
- कानूनी खर्च: इसके अतिरिक्त, आयोग ने शिकायतकर्ता को कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में ₹15,000 का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।

