केस मैट्रिक्स एवं घटनाक्रम सारांश (Overview)
| विषय / बिंदु | विवरण एवं न्यायिक अवलोकन |
| संबंधित अदालत | कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) |
| विशेष सत्र तिथि | 1 अगस्त 2026 (शनिवार) |
| आयोजन का कारण | 6 जुलाई (श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती) की छुट्टी के बदले विशेष कार्य दिवस |
| वकीलों की उपस्थिति | अत्यंत कम; बार एसोसिएशन के अनुरोध के कारण राज्य के वकील अनुपस्थित रहे। |
| मुख्य न्यायिक कार्यवाही | जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने सभी 130 listed मामलों को “Not Today” कर स्थगित किया। |
| प्रमुख जनहित याचिका (PIL) | बारुईपुर एनकाउंटर (प्रभास मोंडल) पर निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग — सुनवाई 18 अगस्त को। |
Special Court: 210 कार्य दिवसों के अपने वार्षिक रोस्टर को पूरा करने के उद्देश्य से कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा शनिवार (1 अगस्त) को आयोजित विशेष अदालती सत्र वकीलों की अनुपस्थिति के कारण प्रभावित रहा।
वकीलों के उपस्थित न होने के कारण जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत में सूचीबद्ध सभी 130 मामलों पर “नॉट टुडे” (Not Today) दर्ज कर सुनवाई स्थगित करनी पड़ी।
पृष्ठभूमि: विशेष शनिवार सत्र का आयोजन क्यों हुआ?
- यह पूरा मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय के वार्षिक कैलेंडर और एक अतिरिक्त छुट्टी के समायोजन से जुड़ा है।
- वार्षिक रोस्टर: दिसंबर 2025 में घोषित कैलेंडर के अनुसार, कलकत्ता हाई कोर्ट के लिए वर्ष में 210 कार्य दिवस और 61 निर्धारित छुट्टियां तय की गई थीं।
- अतिरिक्त अवकाश समायोजन: मई में चुनाव परिणाम आने के बाद, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) तपाब्रत चक्रवर्ती ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर 6 जुलाई (सोमवार) को अदालत में छुट्टी घोषित की थी।
- 1 अगस्त का शनिवार सत्र: 6 जुलाई के कार्य दिवस के नुकसान की भरपाई करने के लिए हाई कोर्ट ने 1 अगस्त (शनिवार) को एक विशेष कार्य दिवस के रूप में अधिसूचित किया था।
- बार एसोसिएशन का रुख: चूंकि सप्ताहांत में अत्यावश्यक मामलों के अलावा नियमित अदालतें नहीं चलती हैं, इसलिए कलकत्ता हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित कर जजों से अनुरोध किया था कि वकीलों की संभावित गैर-मौजूदगी को देखते हुए कोई एकतरफा (Ex-parte) आदेश पारित न किया जाए।
कोर्टरूम का घटनाक्रम: पुलिस मामलों की कोर्ट में सन्नाटा
- 130 मामले स्थगित: पुलिस से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की कोर्टरूम में राज्य सरकार के काउंसिल (वकील) उपस्थित नहीं हुए। जज ने क्रम संख्या 1 से 130 तक सूचीबद्ध सभी मामलों को पुकारा और प्रत्येक पर “नॉट टुडे” दर्ज करते हुए सुबह 11:10 बजे कार्यवाही समाप्त कर दी।
- महुआ मोइत्रा और अन्य याचिकाएं: सांसद महुआ मोइत्रा के वकील ने अपनी अपील का उल्लेख (Mentioning) करने का प्रयास किया, लेकिन पीठ ने स्पष्ट किया कि आवश्यक आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं। एक अन्य पूर्व तृणमूल विधायक द्वारा नए दर्ज एफआईआर (FIR) से सुरक्षा की मांग पर जज ने टिप्पणी की कि अदालत केवल विशिष्ट कार्यवाहियों पर सुनवाई कर सकती है, केवल आशंकाओं पर नहीं।
बारुईपुर एनकाउंटर पर नई जनहित याचिका (PIL)
सप्ताहांत की इस विशेष सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) की अध्यक्षता वाली कोर्टरूम नंबर 1 में एक महत्वपूर्ण मानवाधिकार मामला भी सामने आया।
- एनकाउंटर पर सवाल: मानवाधिकार कार्यकर्ता सुजातो भद्रा ने बारुईपुर मामले के मुख्य आरोपी प्रभास मोंडल की पुलिस एनकाउंटर (हिरासत में मौत) में हुई हत्या के खिलाफ एक नई जनहित याचिका (PIL) दाखिल की।
- अग्रिम चेतावनी की उपेक्षा: याचिकाकर्ता के वकील रघुनाथ चक्रवर्ती ने अदालत को बताया कि एनकाउंटर से चार दिन पहले (4 जुलाई) ही मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बारुईपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी को पत्र लिखकर हिरासत में हत्या की आशंका जताई थी। इसके बावजूद पुलिस ने कोई सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए और 8 जुलाई को आरोपी एनकाउंटर में मारा गया।
- न्यायिक जांच की मांग: याचिका में मौत की स्वतंत्र न्यायिक जांच (Independent Judicial Inquiry) की मांग की गई है।
- अदालत का निर्देश: राज्य सरकार द्वारा यह बताए जाने पर कि इस विषय पर पहले से अन्य याचिकाएं लंबित हैं और स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई है, हाई कोर्ट ने इस नई PIL को अन्य याचिकाओं के साथ 18 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

