कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा जारी प्रमुख दिशा-निर्देश
- पहचान और लाइसेंसिंग (Identification & Licensing)
- स्थानीय प्राधिकारियों को बिना लाइसेंस वाले, मियाद खत्म हो चुके लाइसेंस या व्यावसायिक उपयोग के लिए अस्वीकृत भवनों में चल रहे PG की पहचान करनी होगी।
- ट्रेड लाइसेंस मिलने मात्र से अवैध निर्माण को नियमित नहीं माना जाएगा।
- ओवरक्राउडिंग और जगह का मापदंड
- प्रति निवासी न्यूनतम 70 वर्ग फीट (70 sq ft) जगह का पालन अनिवार्य है।
- स्वीकृत क्षमता, कमरों की संख्या, बेड और प्रति व्यक्ति उपलब्ध क्षेत्र का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
- अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा (Fire & Electrical Safety)
- फायर सेफ्टी को प्राथमिक जीवन-सुरक्षा आवश्यकता माना जाएगा।
- अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguishers), स्मोक डिटैक्टर, आपातकालीन निकास (Emergency Exits), और एलपीजी रसोई सुरक्षा का नियमित निरीक्षण होगा।
- ओवरलोडेड वायरिंग या बिजली के खतरों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- CCTV प्रणाली और गोपनीयता (Privacy Protection)
- प्रवेश/निकास द्वार और कॉमन कॉरिडोर में कार्यात्मक CCTV कैमरे अनिवार्य हैं।
- गोपनीयता का अधिकार: बेडरूम, बाथरूम, टॉयलेट या चेंजिंग रूम में CCTV कैमरे लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
- गंभीर घटनाओं के मामलों में CCTV फुटेज से छेड़छाड़ या मिटाने पर कानूनी कार्रवाई होगी।
- महिला सुरक्षा और अपराध की रिपोर्टिंग
- नियंत्रित प्रवेश, आगंतुक सत्यापन, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षाकर्मी तैनात करने होंगे।
- यौन उत्पीड़न, हमला या धमकी की शिकायतों को आंतरिक तंत्र के नाम पर दबाया नहीं जा सकता; उन्हें तुरंत पुलिस/कानून के हवाले करना होगा।
- प्रबंधकों की जिम्मेदारी
- दिन-प्रतिदिन के संचालन के लिए ऑपरेटर सीधे जिम्मेदार होंगे। केवल भवन मालिक होने मात्र से हर परिचालन उल्लंघन के लिए मकान मालिक को उत्तरदायी नहीं ठहराया जाएगा।
बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरु शहर में तेजी से फैल रहे अनियंत्रित पेइंग गेस्ट (PG) आवासों, भारी ओवरक्राउडिंग (अत्यधिक भीड़), अग्नि सुरक्षा नियमों के घोर उल्लंघन और निवासियों (विशेषकर महिलाओं व युवाओं) के बुनियादी सुरक्षा अधिकारों पर एक युगांतरकारी फैसला सुनाया है।
न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए वृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP), ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA), अग्निशमन विभाग, पुलिस और बेसकॉम (BESCOM) सहित सभी संबंधित प्राधिकरणों को आपसी समन्वय से काम करने और छह सप्ताह के भीतर एक एकीकृत विनियामक प्रोटोकॉल (Consolidated Protocol) अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वैध पीजी आवास चलाना कोई अवांछित गतिविधि नहीं है, लेकिन इसे जीवन और व्यक्तिगत सुरक्षा की कीमत पर मनमाने तरीके से संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उच्च न्यायालय ने सभी सक्षम प्रशासनिक निकायों को बिना लाइसेंस वाले पीजी की पहचान करने, जोखिम-आधारित निरीक्षण करने और अग्नि, भवन निर्माण व बिजली सुरक्षा मानदंडों का कड़ाई से पालन कराने के लिए विस्तृत विनियामक दिशानिर्देश जारी किए हैं [प्राइवेट पेइंग गेस्ट नियमन मामला]।
उच्च न्यायालय द्वारा जारी प्रमुख विनियामक दिशानिर्देश
1. अवैध पीजी की पहचान और लाइसेंसिंग जांच
- सक्षम स्थानीय प्राधिकारियों को उन सभी परिसरों की व्यापक पहचान करनी होगी जो बिना लाइसेंस, समाप्त हो चुके लाइसेंस या ऐसे भवनों में चल रहे हैं जिन्हें पीजी उपयोग के लिए अनुमोदित नहीं किया गया है।
- अधिकारियों को केवल ऑपरेटरों द्वारा दर्शाए गए बोर्ड या नाम पर निर्भर रहने के बजाय परिसर में चलने वाली वास्तविक गतिविधियों की प्रकृति की जांच करनी होगी।
2. भवन निर्माण एवं भूमि उपयोग (Building & Land-Use Norms)
- अधिकारियों को यह सत्यापित करना अनिवार्य होगा कि पीजी परिसर स्वीकृत भवन योजना (Sanctioned Plan), अनुमत भूमि उपयोग, ज़ोनिंग विनियमों और संरचनात्मक सुरक्षा (Structural Safety) के अनुरूप हैं या नहीं।
- अनधिकृत मेजेनाइन फ्लोर, छतों पर अवैध शेड/कमरे और खुले स्थानों के अवैध रूपांतरण पर रोक लगाई जाएगी।
- विधिक स्पष्टीकरण: अदालत ने साफ तौर पर कहा कि केवल ट्रेड लाइसेंस (Trade Licence) मिल जाने से भवन का कोई अनधिकृत या अवैध निर्माण स्वतः नियमित (Regularised) नहीं माना जा सकता।
3. ओवरक्राउडिंग पर रोक और प्रति व्यक्ति न्यूनतम स्थान
- अधिकारियों को स्वीकृत क्षमता, कमरों व बिस्तरों की कुल संख्या, वास्तविक ऑक्यूपेंसी और प्रति निवासी उपलब्ध क्षेत्रफल का भौतिक सत्यापन करना होगा।
- अदालत ने रेखांकित किया कि बेंगलुरु पीजी लाइसेंसिंग ढांचे के तहत प्रति निवासी न्यूनतम 70 वर्ग फीट (Minimum 70 sq. ft.) क्षेत्र उपलब्ध होना अनिवार्य है। केवल ऑपरेटर द्वारा दिए गए घोषणापत्र पर भरोसा करने के बजाय मौके पर सत्यापन आवश्यक है।
4. अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा (Fire & Electrical Safety) सर्वोच्च प्राथमिकता
- अग्नि सुरक्षा को जीवन-सुरक्षा की प्राथमिक शर्त माना गया है। निरीक्षण में फायर एनओसी/क्लीयरेंस, अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguishers), स्मोक डिटेक्टर्स, आपातकालीन रोशनी, सुरक्षित सीढ़ियां, निकासी मार्ग (Evacuation Routes) और रसोई/एलपीजी सुरक्षा की अनिवार्य जांच होगी।
- इलेक्ट्रिकल पैनल, अर्थिंग, ओवरलोडेड सर्किट, खुले तारों और शॉर्ट सर्किट के खतरों की गहन जांच की जाएगी। जहां तात्कालिक खतरा दिखे, वहां कानूनन तुरंत दंडात्मक कार्रवाई होगी।
5. सीसीटीवी निगरानी एवं निजता का अधिकार (Right to Privacy)
- सीसीटीवी का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना होगा, जिसमें कैमरों का कवरेज, प्रवेश-निकास द्वार, सामान्य गलियारे, रिकॉर्डिंग की समय-शुद्धता, पर्याप्त स्टोरेज बैकअप और पावर बैकअप शामिल हैं।
- निजता का संरक्षण: बेडरूम, बाथरूम, शौचालय, चेंजिंग रूम या ऐसे किसी भी क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरा लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है जहां रहने वालों को निजता की वैध अपेक्षा होती है।
- किसी गंभीर घटना के बाद फुटेज को संरक्षित रखना अनिवार्य होगा; फुटेज से छेड़छाड़ या उसे मिटाने पर आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई होगी।
6. महिला सुरक्षा और आपराधिक शिकायतों का निस्तारण
- महिला पीजी और असुरक्षित श्रेणी के निवासियों के लिए नियंत्रित प्रवेश (Controlled Entry), आगंतुक सत्यापन (Visitor Verification), पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती अनिवार्य होगी।
- यौन उत्पीड़न, हमला, पीछा करना (Stalking), धमकी या हिंसा संबंधी शिकायतों पर कानून के अनुसार अनिवार्य रूप से कार्रवाई की जाएगी। पीजी संचालक ऐसी शिकायतों को दबा नहीं सकते और न ही पीड़ितों को मामलों को केवल ‘आंतरिक स्तर’ पर निपटाने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
7. संचालक (Operator) बनाम भवन मालिक की कानूनी जवाबदेही
- अदालत ने भवन मालिकों, पट्टेदारों और दैनिक संचालन करने वाले प्रबंधकों की जिम्मेदारियों में विधिक अंतर स्पष्ट किया।
- दैनिक नियमों के पालन, अनुमत ऑक्यूपेंसी, निवासियों के रिकॉर्ड, सुरक्षा, सीसीटीवी, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा की प्राथमिक कानूनी जिम्मेदारी संचालक (Operator) की होगी।
- केवल भवन का मालिक होने मात्र से किसी स्वतंत्र ऑपरेटर द्वारा किए गए प्रत्येक परिचालन उल्लंघन के लिए मालिक को स्वतः उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता; दायित्व का निर्धारण उनकी वास्तविक भूमिका और वैधानिक कर्तव्यों के आधार पर होगा।
सुनवाई के दौरान सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
- बेंगलुरु ईस्ट का भयावह परिदृश्य: सुनवाई के दौरान अदालत को सूचित किया गया कि अकेले बेंगलुरु ईस्ट क्षेत्र में लगभग 5,000 पीजी आवास संचालित हो रहे हैं, जिनमें से लगभग 2,500 पीजी बिना किसी वैध लाइसेंस, बिना स्वीकृत नक्शे और बिना पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के अवैध रूप से चल रहे हैं।
- बेंगलुरु नॉर्थ में कार्रवाई: बीबीएमपी और जीबीए के वकील ने बताया कि बेंगलुरु नॉर्थ में 68 अवैध पीजी आवासों को नोटिस जारी किए गए हैं और आवश्यकता पड़ने पर सुनवाई का अवसर देने के बाद सक्षम दीवानी अदालतों में मामले दर्ज किए जाएंगे।
6 सप्ताह में मांगा गया एकीकृत प्रोटोकॉल (Consolidated Protocol)
उच्च न्यायालय ने प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि वे छह सप्ताह के भीतर एक व्यापक संयुक्त प्रोटोकॉल पेश करें, जिसमें स्पष्ट रूप से निर्धारित हो:
- लागू होने वाली कानूनी व विनियामक आवश्यकताएं।
- प्रवर्तन (Enforcement) के लिए जिम्मेदार विशिष्ट अधिकारी।
- निरीक्षण की कार्यप्रणाली (Inspection Methodology) और साक्ष्य मानक।
- उल्लंघनों का वर्गीकरण और कमियों को सुधारने (Rectification) के लिए दी जाने वाली समय-सीमा।
- कानूनों के गैर-अनुपालन के परिणाम और दंडात्मक प्रावधान।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: पेइंग गेस्ट आवास सुरक्षा एवं नियमन विवाद [रिट याचिका – कर्नाटक उच्च न्यायालय]
- प्रासंगिक कानून: कर्नाटक नगर निगम अधिनियम, 1976 / वृहत बेंगलुरु महानगर पालिका अधिनियम, 2020; कर्नाटक अग्नि बल अधिनियम एवं राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC); भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 एवं भारतीय न्याय संहिता, 2023 (सुरक्षा व निजता उल्लंघन); भारत का संविधान – अनुच्छेद 21 (जीवन, गरिमा और व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार)
- शामिल एजेंसियां: ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA), बीबीएमपी, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग, बेंगलुरु पुलिस, बीडब्ल्यूएसएसबी (BWSSB) और बेसकॉम (BESCOM)
- पीठ: न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज (कर्नाटक उच्च न्यायालय)
- अगली सुनवाई: 28 सितंबर 2026
PG Facility: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज (Justice Suraj Govindaraj) |
| मुख्य मुद्दा | बेंगलुरु के PG आवासों में सुरक्षा, ओवरक्राउडिंग और लाइसेंस का अभाव |
| प्राधिकरण | BBMP, ग्रेट बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA), फायर डिपार्टमेंट, BESCOM आदि |
| मुख्य समयसीमा | 6 सप्ताह के भीतर एकीकृत प्रोटोकॉल (Consolidated Protocol) जमा करने का निर्देश |

