Monday, August 17, 2026
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Supreme Court: YouTube वीडियो से नहीं होता दोषी या बरी होने का फैसला…ये काम कोर्ट का है

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने केरल के एक पत्रकार को महिला नेता के खिलाफ आपत्तिजनक वीडियो डालने पर फटकार लगाई।

पत्रकार ने डाला था वीडियो

दरअसल, पत्रकार ने अपने यूट्यूब चैनल ‘क्राइम ऑनलाइन’ पर यह वीडियो डाला था। कोर्ट ने कहा कि किसी को दोषी ठहराना या बरी करना यूट्यूब वीडियो से नहीं होता, यह काम कोर्ट का है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा, “आप चाहते हैं कि लोग आपके यूट्यूब वीडियो के आधार पर दोषी ठहराए जाएं? ऐसा नहीं होता। कोर्ट ही फैसला करता है।” बेंच ने आगे कहा, “यूट्यूब पर कुछ अच्छा बोलिए। क्राइम ऑनलाइन क्यों डालते हैं? केरल में कुछ अच्छा हो रहा है, भगवान का अपना देश है, उसके बारे में बात कीजिए।”

पत्रकार टीपी नंदकुमार की अंतरिम जमानत बढ़ाई

कोर्ट ने इस मामले में पत्रकार टीपी नंदकुमार को दी गई अंतरिम जमानत को आगे बढ़ा दिया है। नंदकुमार ने इस मामले में अग्रिम जमानत की मांग की थी। उन पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, डराने-धमकाने और बदनामी फैलाने के इरादे से अश्लील सामग्री इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से फैलाने का आरोप है। इसके अलावा, उन पर आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत भी केस दर्ज किया गया है, जो इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण को दंडनीय बनाता है।

यह था राज्य पुलिस का आरोप

राज्य पुलिस का आरोप है कि नंदकुमार द्वारा पोस्ट किए गए यूट्यूब वीडियो में महिला नेता के खिलाफ आपत्तिजनक, यौन संकेत वाले और धमकी भरे बयान थे, जिनका मकसद उन्हें अपमानित करना और उनकी छवि खराब करना था। केरल हाईकोर्ट ने 9 जून को नंदकुमार को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था और उन्हें पुलिस के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इसके बाद पत्रकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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