Tuesday, September 29, 2026
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HUMAN TRAFFICKING: मानव तस्करी में किताबी फॉर्मूला नहीं…स्टेशन लेवल पर लागू होने वाली प्रैक्टिकल रणनीति चाहिए

HUMAN TRAFFICKING: सुप्रीम कोर्ट का आदेश पुलिस प्रशासन की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अक्सर देखा गया है कि कागजी कार्रवाई के चक्कर में शुरुआती कीमती समय निकल जाता है, जिससे शिकार को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। कोर्ट की “प्रैक्टिकल अप्रोच” की मांग जमीनी स्तर पर बदलाव ला सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने देश में मानव तस्करी, विशेषकर बच्चों की तस्करी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र और सभी राज्यों को एक ‘मानक प्रक्रिया’ (Standard Procedure) तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसे कोई किताबी या अकादमिक फॉर्मूला नहीं, बल्कि ऐसी रणनीति चाहिए जिसे स्थानीय पुलिस स्टेशन स्तर पर तुरंत लागू किया जा सके।

अदालत के मुख्य निर्देश: “समय ही सबसे महत्वपूर्ण है”

  • पीठ ने रेखांकित किया कि तस्करी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे सबसे अहम होते हैं।
  • तत्काल कार्रवाई: पुलिस को गुमशुदगी की शिकायत मिलते ही जो कदम उठाने चाहिए, वे समय सीमा (Time frame) के भीतर होने चाहिए।
  • हितधारकों से चर्चा: कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव, सभी राज्यों के गृह सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGP) को निर्देश दिया कि वे सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा कर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें।
  • दिल्ली मॉडल का अध्ययन: पीठ ने सुझाव दिया कि केंद्र और अन्य राज्य दिल्ली सरकार द्वारा इस संबंध में जारी किए गए निर्देशों और प्रक्रियाओं का अध्ययन कर सकते हैं।

लापरवाह राज्यों को चेतावनी: DGP को देना होगा स्पष्टीकरण

  • अदालत ने उन राज्यों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई जो नोटिस जारी होने के बावजूद कोर्ट में पेश नहीं हुए।
  • व्यक्तिगत हलफनामा: जिन राज्यों के DGP पेश नहीं हुए हैं, उन्हें 16 अप्रैल 2026 तक व्यक्तिगत रूप से हलफनामा देकर बताना होगा कि नोटिस मिलने के बावजूद वे क्यों नहीं आए।
  • व्यक्तिगत पेशी: यदि 16 अप्रैल तक हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो संबंधित राज्यों के DGP को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
  • कोई बहाना नहीं: कोर्ट ने साफ कर दिया कि निर्धारित समय सीमा के बाद अनुपस्थिति के लिए कोई भी बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

एक नजर में: मानव तस्करी के खिलाफ कानूनी ढांचा

कानूनी प्रावधानमुख्य उद्देश्य
अनुच्छेद 23 (संविधान)मानव तस्करी और जबरन श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध।
धारा 370 (BNS/IPC)तस्करी के दोषियों के लिए कड़ी सजा (7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक)।
ट्रैकचाइल्ड (TrackChild)गुमशुदा और बरामद बच्चों के डेटा के लिए राष्ट्रीय पोर्टल।
AHTUहर जिले में ‘एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट’ का गठन।
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