Saturday, June 20, 2026
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VIOLENCE-DATA: 2014 से 2024 के बीच हिंसक घटनाओं में 53% से 70% तक की कमी…नया सर्वे आया, पढ़ें

VIOLENCE-DATA: देश के तीन प्रमुख आंतरिक सुरक्षा क्षेत्रों जम्मू-कश्मीर, नक्सल प्रभावित इलाके और पूर्वोत्तर राज्यों में 2014 के बाद से हिंसा में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

नक्सल प्रभावित इलाकों में हिंसक घटनाएं भी कम हुईं

सूत्रों के मुताबिक, 2004 से 2014 के मुकाबले 2014 से 2024 के बीच इन इलाकों में हिंसक घटनाओं में 53% से 70% तक की कमी आई है। नक्सल प्रभावित इलाकों में 2004 से 2014 के बीच 16,463 हिंसक घटनाएं हुई थीं, जो 2014 से 2024 के बीच घटकर 7,744 रह गईं। इस दौरान सुरक्षा बलों की मौतों में 73% की गिरावट आई—1,851 से घटकर 509। वहीं, नागरिकों की मौतें भी 70% घटीं 4,766 से घटकर 1,495 हो गईं।

नक्सलियों पर कार्रवाई का असर

2025 में अब तक सुरक्षा बलों ने 226 नक्सलियों को मार गिराया है, जिनमें दो केंद्रीय समिति के सदस्य भी शामिल हैं। 418 नक्सली गिरफ्तार किए गए और 896 ने आत्मसमर्पण किया। 2024 में 290 नक्सली मारे गए थे, 1,090 गिरफ्तार हुए और 881 ने सरेंडर किया था। अब तक शीर्ष 18 नक्सली नेताओं को भी सुरक्षा बलों ने निशाना बनाकर खत्म किया है।

ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के तहत 27 हार्डकोर नक्सली मारे गए

ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के तहत 27 हार्डकोर नक्सली मारे गए और 23 मई को 24 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इस कार्रवाई का असर यह रहा कि इस साल स्थानीय निकाय चुनाव सफलतापूर्वक कराए गए। छत्तीसगढ़ के सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर में पहली बार 66 जगहों पर मतदान हुआ। नक्सल प्रभावित गांव पुवर्ती, जो कुख्यात माओवादी हिडमा का जन्मस्थान है, वहां भी पहली बार स्वतंत्रता के बाद 23 फरवरी को मतदान हुआ।

जम्मू-कश्मीर में भी हालात सुधरे

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर में 2004 से 2014 के बीच 7,217 हिंसक घटनाएं हुई थीं, जो 2014 से 2024 के बीच घटकर 2,242 रह गईं—यानी 69% की गिरावट। आतंकवादी घटनाओं में मौतों की संख्या भी 2,829 से घटकर 920 हो गई—68% की कमी। 2024 में घाटी में एक भी पत्थरबाजी की घटना दर्ज नहीं हुई, जबकि 2010 में 2,654 संगठित पत्थरबाजी की घटनाएं हुई थीं। उस साल 132 हड़तालें हुई थीं, 112 नागरिकों की जान गई थी और 6,235 लोग घायल हुए थे।

पूर्वोत्तर में भी शांति की ओर बढ़ते कदम

पूर्वोत्तर राज्यों में भी 2004 से 2014 के बीच 11,327 हिंसक घटनाएं हुई थीं, जो 2014 से 2024 के बीच घटकर 3,493 रह गईं—यानी 70% की गिरावट। सुरक्षा बलों की मौतें 456 से घटकर 135 और नागरिकों की मौतें 2,651 से घटकर 397 हो गईं—85% की कमी। 2019 से 2024 के बीच केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठनों के साथ करीब 12 महत्वपूर्ण शांति समझौते किए हैं।

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