Saturday, July 18, 2026
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Weak Enforcement: जब तक अपराधियों के हाथ-पैर नहीं काटे जाएंगे, तब तक लोग कानून का पालन नहीं करेंगे…क्यों रही यह टिप्पणी, पढ़ डालिए केस

Weak Enforcement: कर्नाटक हाईकोर्ट से आपराधिक न्याय प्रणाली और सख्त सजा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और तल्ख टिप्पणी सामने आई है।

दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई

हाईकोर्ट के जस्टिस आर. नटराज ने मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के एक छात्र की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए यह सख्त रुख अपनाया। उन्होंने देश में कमजोर कानून प्रवर्तन (Weak Enforcement) पर गहरी चिंता व्यक्त की। हाईकोर्ट ने एक दुष्कर्म मामले (Rape Case) में 23 वर्षीय आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तक अपराधियों के हाथ-पैर नहीं काटे जाएंगे, तब तक लोग कानून का पालन नहीं करेंगे।”

अदालत की सख्त टिप्पणी: मिडिल-ईस्ट की तरह कड़े कानूनों की जरूरत

चिंता: सुनवाई के दौरान जस्टिस आर. नटराज ने समाज में बढ़ रही आपराधिक प्रवृत्तियों और कानून के प्रति खत्म होते डर पर बात कर गंभीर टिप्पणी की।

कानून ने अपने दांत खो दिए हैं: कानून ने अपने दांत खो दिए हैं क्योंकि हम अपराधियों से कड़ाई से नहीं निपटते। यही कारण है कि मध्य-पूर्व (Middle East) देशों के विपरीत, यहां अपराध करना इतना आसान हो गया है। अगर आप पैर या हाथ काट दें, तो शायद तभी लोगों को समझ आएगा और वे कानून का पालन करेंगे। चूंकि हमारे यहां लोकतंत्र है, इसलिए हर कोई इसे हल्के में लेता है।

नमक खाया है, तो पानी पीना पड़ेगा: आरोपी छात्र द्वारा जेल में दो महीने बिताए जाने की दलील पर जज ने कहा, “यदि आपने नमक खाया है, तो आपको पानी पीना ही पड़ेगा (यानी जैसा किया है, वैसा भुगतना पड़ेगा)। उसे अभी 4-5 दिन और जेल में रहने दीजिए, ताकि उसे जेल की आदत हो जाए। कौन जानता है, सजा होने के बाद उसे वहां वापस जाना ही पड़े।

क्या है पूरा मामला? (The Allegations)

मामला: यह मामला उडुपी (कर्नाटक) के मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के एक छात्र गोपी रेड्डी कार्तिक रेड्डी से जुड़ा है, जो 5 अप्रैल 2026 से न्यायिक हिरासत में है।

पीड़िता के आरोप: शिकायतकर्ता युवती और आरोपी दोनों एमआईटी मणिपाल में सहपाठी (Classmates) थे। युवती का आरोप है कि जुलाई 2023 में आरोपी ने उससे प्यार का इजहार किया था, लेकिन बाद में उसके चरित्र पर शक होने के कारण युवती ने उससे दूरी बना ली।

अपार्टमेंट में दुर्व्यवहार: आरोप के अनुसार, 12 सितंबर 2023 को आरोपी बातचीत के बहाने युवती को अपने अपार्टमेंट में ले गया और वहां उसकी मर्जी के खिलाफ उसके साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न (Sexual Assault) किया।

मानसिक आघात और शिकायत: इस घटना के बाद पीड़िता गहरे मानसिक तनाव और डिप्रेशन में चली गई, जिसके लिए कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज (KMC), मणिपाल में उसका इलाज चला। बाद में उसने बेंगलुरु में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) से संपर्क किया, जिसके बाद उडुपी महिला पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375(a) और 376 के तहत मामला दर्ज किया गया।

बचाव पक्ष की दलीलें (Defense Arguments)

आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता अयांतिका मोंडल ने अदालत में दलील दी कि आरोपी पिछले लगभग दो महीने से जेल में बंद है और उसने कोई अपराध नहीं किया है। यह शिकायत उस घटना के करीब तीन साल बाद दर्ज कराई गई है, जिसका जिक्र किया जा रहा है (दस्तावेजों के अनुसार शिकायत 2023 की घटना के संदर्भ में बाद में दर्ज हुई)। यदि छात्र को लंबे समय तक जेल में रखा गया, तो एक होनहार छात्र होने के नाते उसका पूरा पेशेवर और शैक्षणिक भविष्य बर्बाद हो जाएगा।

मामले की वर्तमान स्थिति: एक नज़र में (Core Matrix)

मुख्य बिंदुविवरण / वर्तमान स्थिति
आरोपी का विवरणगोपी रेड्डी कार्तिक रेड्डी (उम्र 23 वर्ष), छात्र, MIT मणिपाल।
दर्ज धाराएंIPC की धारा 375 और 376 (बलात्कार)।
अदालत का अंतरिम रुखफिलहाल कोर्ट ने आरोपी को कोई अंतरिम राहत या जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है।
अगली सुनवाईकर्नाटक हाई कोर्ट ने इस जमानत याचिका पर राज्य सरकार (अभियोजन पक्ष) को नोटिस जारी किया है और मामले को 8 जून 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

निष्कर्ष (Takeaway)

यद्यपि हाथ-पैर काटने जैसी कड़ी शारीरिक सजाओं की बात अदालत की एक मौखिक और प्रतीकात्मक (Rhetorical) टिप्पणी थी, जिसका उद्देश्य अपराधों के प्रति समाज में घटते खौफ को रेखांकित करना था, लेकिन भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में संवैधानिक सीमाओं के भीतर ऐसी सजाएं संभव नहीं हैं। हालांकि, हाई कोर्ट का यह कड़ा रुख साफ संकेत देता है कि महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों के मामलों में न्यायपालिका जमानत देने के मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। अब इस मामले पर 8 जून को राज्य सरकार के जवाब के बाद आगे की बहस होगी।

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