Friday, October 2, 2026
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Printing Mistake: बीएसएनएल (BSNL) का भ्रामक रीचार्ज लीफलेट… 84,000 सेकंड की मुफ़्त कॉल के बदले कॉल कटौतियां 1-मिनट के पल्स पर

मामला संक्षेप में (Case Summary)

पहलूविवरण
फोरम/अदालतत्रिशूर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, केरल
शिकायतकर्तासी. वी. जोस (किसान)
विरोधी पक्षभारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL)
मुख्य मुद्दारीचार्ज में ‘सेकंड’ का वादा करके ‘1-मिनट पल्स’ के हिसाब से बैलेंस काटना
आदेश/मुआवजाबीएसएनएल को ₹15,000 का मुआवजा भुगतान करने का निर्देश

Printing Mistake: त्रिशूर (केरल) के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL (भारत संचार निगम लिमिटेड) को सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) का दोषी ठहराया है।

आयोग ने बीएसएनएल की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कंपनी ने इसे “केवल छपाई की गलती (Printing Mistake)” बताया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्राहक कंपनी द्वारा लिखित में दी गई जानकारी पर भरोसा करने का हकदार है। कंपनी ने उपभोक्ता को ₹449 के रीचार्ज लीफलेट में 84,000 सेकंड की मुफ़्त कॉल का वादा किया था, लेकिन कॉल कटौतियाँ 1-मिनट के पल्स (Pulse) के आधार पर की जा रही थीं।

मामले का विवरण (Case Overview)

  • शिकायतकर्ता: सी. वी. जोस (C V Jose), निवासी चालकुडी, त्रिशूर (केरल)। ये जैविक खेती (Organic Farming) करते हैं और नियमित फोन संपर्क इनकी दैनिक गतिविधियों का अहम हिस्सा है।
  • मामला: दिसंबर 2016 में शिकायतकर्ता ने ₹449 का BSNL STV 449 रीचार्ज वाउचर खरीदा। लीफलेट के अनुसार 84 दिनों की वैधता के साथ 84,000 सेकंड की फ्री कॉल मिलनी थी।
  • समस्या: वाउचर एक्टिवेट होते ही पाया गया कि यदि कॉल कुछ सेकंड की भी होती, तो भी पूरा 1 मिनट (60 सेकंड) बैलेंस से काट लिया जाता था।

उपभोक्ता आयोग का आदेश और मुख्य निष्कर्ष

त्रिशूर जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सी. टी. साबू (C T Sabu), सदस्य श्रीजा एस. और राम मोहन आर. की पीठ ने 27 जुलाई को आदेश पारित किया।

  • ग्राहकों पर गलती का बोझ नहीं:“सेवा प्रदाता द्वारा छापी गई या प्रकाशित की गई जानकारी में हुई किसी भी त्रुटि का खामियाजा उन उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता, जिन्होंने आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करके भुगतान किया है।”
  • पल्स दर का भ्रम: यदि लीफलेट में ‘सेकंड’ लिखा है, तो आम उपभोक्ता यही समझेगा कि कटौती भी सेकंड-दर-सेकंड होगी, न कि 1-मिनट पल्स के आधार पर।
  • रिफंड नहीं, केवल मुआवजा: आयोग ने रीचार्ज राशि (₹449) के रिफंड को खारिज कर दिया क्योंकि उपभोक्ता ने सेवा का काफी उपयोग कर लिया था। हालांकि, भ्रामक प्रचार, मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए बीएसएनएल को ₹15,000 का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।

बीएसएनएल की सफ़ाई (Company’s Defence)

  1. टैरिफ संशोधन: बीएसएनएल के वकीलों ने तर्क दिया कि कंपनी ने सितंबर 2016 में ही योजना को संशोधित कर 1,540 मिनट (92,400 सेकंड) कर दिया था, जो कि ग्राहक के लिए अधिक फायदेमंद था।
  2. प्रिंटिंग की चूक: अक्टूबर 2016 के प्रिंटेड कार्ड में गफ़लत के कारण पुराना विवरण (84,000 सेकंड) छप गया था।
  3. मुफ़्त रीचार्ज का ऑफर: बीएसएनएल ने दावा किया कि उन्होंने शिकायतकर्ता को मुफ़्त में ₹449 का रीचार्ज देने की पेशकश की थी, जिसे शिकायतकर्ता ने ठुकरा कर अदालत जाने का फैसला किया।

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