Friday, October 2, 2026
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MV Act: माता-पिता की सड़क दुर्घटना में मृत्यु पर शादीशुदा और कमाऊ बच्चे भी मुआवजे के हकदार…एक्ट की धारा 166 के तहत प्रावधान को पढ़कर समझें

MV Act: मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह एवं न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया
संबंधित कानूनMotor Vehicles Act, 1988 (Section 166)
मुख्य निर्णय1. बालिग, शादीशुदा व कमाऊ बच्चे भी मृत माता-पिता के मुआवजे के वैध दावेदार हैं।
2. पत्नी के साथ-साथ सभी बच्चों को भी अलग से ‘कंसोर्टियम’ राशि पाने का अधिकार है।
बढ़ा हुआ मुआवजा₹11,00,672 से बढ़ाकर ₹12,47,272 किया गया।

MV Act: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) के तहत एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत तय किया है। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि माता-पिता की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर उनके बालिग, विवाहित और कमाऊ (Gainfully Employed) बच्चे भी कानूनी प्रतिनिधि (Legal Representative) होने के नाते धारा 166 के तहत मुआवजे का दावा पेश कर सकते हैं। हालांकि, मुआवजे की कुल राशि उनके वित्तीय निर्भरता (Extent of Dependency) के स्तर पर निर्भर करेगी।

न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह (Justice N Kotiswar Singh) और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया (Justice N V Anjaria) की पीठ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेश में संशोधन करते हुए यह निर्णय सुनाया।

MV Act:अदालत के मुख्य कानूनी सिद्धांत (Key Legal Principles)

  • कानूनी प्रतिनिधि की परिभाषा (Legal Representative)
    • मोटर वाहन अधिनियम में ‘लीगल रिप्रेजेंटेटिव’ को अलग से परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन इसका अर्थ उस व्यक्ति से है जो कानूनन मृतक की संपत्ति (Estate) का प्रतिनिधित्व करता है।
    • मंजूरी बेरा (2007) और नेशनल इंश्योरेंस बनाम बीरेंद्र (2020) मामलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वास्तविक निर्भरता के बजाय संपत्ति का हस्तांतरण (Devolution of Estate) मुख्य आधार है।
  • कंसोर्टियम (Consortium / संगति-सहानुभूति का मुआवजा)
    • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति के प्रत्येक कानूनी प्रतिनिधि को हुए नुकसान की भरपाई के लिए ‘कंसोर्टियम’ एक अनिवार्य और अभिन्न हिस्सा है।
    • स्पौसल कंसोर्टियम (Spousal Consortium): जीवनसाथी (पति/पत्नी) को साथी का साथ, सहयोग और स्नेह खोने पर दिया जाता है।
    • पारेंटल कंसोर्टियम (Parental Consortium): माता-पिता की असामयिक मृत्यु पर बच्चों को मिलने वाला मार्गदर्शन, सुरक्षा, प्रशिक्षण और वात्सल्य का मुआवजा।
    • फिलियल कंसोर्टियम (Filial Consortium): बच्चे की मृत्यु पर माता-पिता को उनके जीवनकाल में लगने वाले मानसिक आघात और प्रेम के नुकसान का मुआवजा।

MV Act: मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)

  • दुर्घटना: 23 जून 2016 को 48 वर्षीय शेख जानीमिया (सुरक्षा गार्ड, मासिक वेतन ₹9,000) की तेज रफ्तार कार की टक्कर से मौत हो गई थी।
  • दावेदार: मृतक की पत्नी और उनके तीन बच्चे (उम्र 18 से 21 वर्ष)।
  • निचली अदालतों का रुख:
    • मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT), हैदराबाद ने कुल ₹8,44,000 का मुआवजा दिया था।
    • तेलंगाना उच्च न्यायालय ने इसे बढ़ाकर ₹11,00,672 किया, लेकिन कंसोर्टियम मद (Consortium Head) में त्रुटि की और बच्चों को पारेंटल कंसोर्टियम नहीं दिया।

MV Act:सर्वोच्च न्यायालय का फैसला और मुआवजा बढ़ोतरी

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट दोनों ने कानूनी प्रतिनिधियों (बच्चों) को ‘पारेंटल कंसोर्टियम’ न देकर कानूनी गलती की थी।

  • प्रणय सेठी (2017) निर्णय का पालन: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, प्रति व्यक्ति ₹40,000 का कंसोर्टियम देय होता है, जिसमें हर 3 साल पर 10% की वृद्धि का नियम है।
  • संशोधित राशि: 10% बढ़ोतरी के बाद, पत्नी (Spousal Consortium) और तीनों बच्चों (Parental Consortium) में से प्रत्येक को ₹48,400 का भुगतान करने का आदेश दिया गया।
  • अंतिम आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय द्वारा तय राशि को बढ़ाते हुए कुल मुआवजा ₹12,47,272 (7.5% वार्षिक ब्याज के साथ) कर दिया।

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