Press Freedom: मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय न्यायाधीश | न्यायमूर्ति शमीमा जहां (Gauhati High Court) |
| याचिकाकर्ता | हैदर हुसैन व अन्य (‘असमिया प्रतिदिन’ के मुख्य संपादक और प्रकाशक) |
| संबंधित कानून | IPC Sections 499 (First Exception), 500, 501; CrPC Sections 320, 482 |
| अदालत का निर्णय | जनहित में सत्य का प्रकाशन और शिकायतकर्ता की ‘कोई आपत्ति नहीं’ के आधार पर मानहानि का केस रद्द। |
Press Freedom: गुवाहाटी हाईकोर्ट (Gauhati High Court) ने असम के प्रमुख समाचार पत्र ‘असमिया प्रतिदिन’ (Asomiya Pratidin) के मुख्य संपादक और मुद्रक व प्रकाशक के खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) की कार्यवाही को रद्द कर दिया है।
न्यायमूर्ति शमीमा जहां (Justice Shamima Jahan) की एकल पीठ ने CrPC की धारा 482 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, उत्तरी लखीमपुर के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत आईपीसी की धारा 500, 501 और 34 के तहत संज्ञान लिया गया था। अदालत ने शिकायतकर्ता के इस रुख को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया कि संबंधित समाचार रिपोर्ट से समाज में उसकी प्रतिष्ठा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
Press Freedom: अदालत के मुख्य कानूनी सिद्धांत और टिप्पणियां
- जनहित में सत्य का प्रकाशन (First Exception to Section 499 IPC):“आईपीसी की धारा 499 का पहला अपवाद यह प्रदान करता है कि किसी व्यक्ति के संबंध में सत्य बात को प्रकाशित करना मानहानि नहीं माना जाएगा, यदि ऐसा प्रकाशन जनहित (Public Good) के लिए किया गया हो।”
- मानहानि मामले का शमनीय (Compounding) होना:
- कोर्ट ने CrPC की धारा 320 का हवाला देते हुए नोट किया कि मानहानि का अपराध उस व्यक्ति द्वारा समझौता योग्य (Compounded) है जिसकी मानहानि हुई है। इसके अलावा, हाई कोर्ट धारा 401/482 की शक्तियों का उपयोग करते हुए ऐसे अपराध में समझौते की अनुमति दे सकता है।
Press Freedom: मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- घटना: दिसंबर 2010 में ‘असमिया प्रतिदिन’ में दो खबरें प्रकाशित हुई थीं। एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि निर्माण कार्य में फर्जी बिल बनाकर पैसों का गबन किया गया है, जबकि दूसरी रिपोर्ट PWD उप-मंडल को आबंटित ₹1 लाख में से ₹45,000 की स्टेशनरी आपूर्ति और शेष राशि अधिकारियों में बांटने से संबंधित थी।
- मजिस्ट्रेट का रुख: शिकायतकर्ता ने रिपोर्ट को झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए मानहानि का मामला दर्ज कराया था, जिस पर मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लेते हुए समन जारी किया था।
- संपादक/प्रकाशक का तर्क: याचिकाकर्ताओं (हैदर हुसैन व अन्य) ने तर्क दिया कि रिपोर्ट कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer) द्वारा की गई अनियमितताओं को उजागर करने के लिए सद्भावना (Good Faith) और जनहित में प्रकाशित की गई थी।
- शिकायतकर्ता का बयान: हाई कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने स्वीकार किया कि इस समाचार से समाज में उनकी साख या प्रतिष्ठा (Reputation) को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और उन्हें याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है।
Press Freedom: उच्च न्यायालय का अंतिम आदेश
शिकायतकर्ता के इस बयान को स्वीकार करते हुए कि उसकी प्रतिष्ठा को कोई ठेस नहीं पहुंची है और मामला जनहित की रिपोर्टिंग से जुड़ा था, गुवाहाटी हाई कोर्ट ने निचली अदालत (उत्तर लखीमपुर) के संज्ञान आदेश को निरस्त कर दिया और आपराधिक शिकायत (CR Case No. 209/2010) को पूरी तरह रद्द (Quash) कर दिया।

