Sunday, October 4, 2026
HomeBNS & BNSS LawHanging Method: फांसी की सजा के तरीके...गर्दन में फंदा डालकर फांसी देने...

Hanging Method: फांसी की सजा के तरीके…गर्दन में फंदा डालकर फांसी देने के बदले कम दर्दनाक विकल्प दी जा सकती है क्या? सुप्रीम जवाब यहां पढ़ें

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति संदीप मेहता (Supreme Court)
याचिकाकर्तावरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा
संबंधित कानूनSection 354(5) CrPC / Section 393(5) BNSS & Article 21
मुख्य निर्णयफांसी की व्यवस्था को असंवैधानिक ठहराने से इनकार। हालांकि, केंद्र सरकार विशेषज्ञ समिति बनाकर अन्य विकल्पों की वैज्ञानिक जांच कर सकती है।

Hanging Method: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने मृत्युदंड (Death Penalty) देने के वर्तमान तरीके—’गर्दन में फंदा डालकर फांसी देने’—को असंवैधानिक घोषित करने और उसकी जगह कम दर्दनाक विकल्पों (जैसे जहर का इंजेक्शन या गोली मारना) को अपनाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ (Justice Vikram Nath) और न्यायमूर्ति संदीप मेहता (Justice Sandeep Mehta) की पीठ ने ऋषि मल्होत्रा बनाम भारत संघ (Rishi Malhotra v. Union of India) मामले में यह फैसला सुनाया।

Hanging Method:अदालत के मुख्य कानूनी निष्कर्ष और टिप्पणियां

  • दीना (Dina) फैसले पर पुनर्विचार से इनकार
    • पीठ ने कहा कि दीना बनाम भारत संघ (1983) मामले में 3-जजों की संविधान पीठ द्वारा दिए गए उस फैसले को बड़ी पीठ के पास पुनर्विचार के लिए भेजने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता, जिसमें फांसी की संवैधानिकता को सही ठहराया गया था।
  • भविष्य की संवैधानिक समीक्षा के द्वार खुले:“इस याचिका का खारिज होना भविष्य की संवैधानिक समीक्षा को नहीं रोकता है, यदि भविष्य में कोई बाध्यकारी चिकित्सा, वैज्ञानिक या अनुभवजन्य साक्ष्य (Medical/Scientific Evidence) सामने आते हैं जो फांसी के मौजूदा आधार को खारिज करते हैं।”
  • केंद्र सरकार द्वारा विशेषज्ञ समिति के गठन की छूट
    • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार कानून, फॉरेंसिक मेडिसिन, न्यूरोसाइंस (तंत्रिका विज्ञान) और अपराध शास्त्र के विशेषज्ञों की एक विशेषज्ञ समिति (Expert Body) गठित करके मृत्युदंड निष्पादित करने के अन्य मानवीय विकल्पों की व्यापक समीक्षा करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

Hanging Method: मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)

  • याचिकाकर्ता की मांग: वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने 2017 में दायर याचिका में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 354(5) [अब BNSS की धारा 393(5)] की संवैधानिकता को चुनौती दी थी।
  • तर्क: याचिका में तर्क दिया गया कि फांसी में आरोपी को मृत घोषित करने में 40 मिनट तक का समय लगता है, जो अत्यंत क्रूर और अमानवीय है। इसकी जगह ‘घातक इंजेक्शन’ (Intravenous Lethal Injection) या अन्य त्वरित तरीकों को अपनाया जाना चाहिए जो कम दर्दनाक हों।
  • प्रोजेक्ट 39A का रुख: कानूनी सहायता प्रदान करने वाले संगठन ‘प्रोजेक्ट 39A’ की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि अमेरिका जैसे देशों में घातक इंजेक्शन के इस्तेमाल में भी कई तकनीकी और व्यावहारिक विफलताएं देखी गई हैं।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
clear sky
25.3 ° C
25.3 °
25.3 °
82 %
2.5kmh
0 %
Sun
33 °
Mon
33 °
Tue
32 °
Wed
33 °
Thu
32 °

Recent Comments