Sunday, October 4, 2026
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Caste Discrimination In Temples: ईश्वर के दरबार में भेदभाव नहीं; मंदिरों में जातिगत भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं…जनहित याचिका को पढ़िए

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन एवं न्यायमूर्ति ई. मनोहरन (Madras High Court)
संबंधित मंदिरअरुलमिगु देवराज स्वामी मंदिर, कांचीपुरम
मुख्य सिद्धांतमंदिरों और पूजा स्थलों में जातिगत भेदभाव असंवैधानिक है; परंपरा का उपयोग भेदभाव के लिए नहीं हो सकता।
अंतिम आदेशमंदिर प्रशासन द्वारा सभी भक्तों से समान व्यवहार के आश्वासन के बाद याचिका निस्तारित (Closed)।

Caste Discrimination In Temples: मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कहा है कि पूजा स्थलों में जाति के आधार पर भेदभाव की कोई जगह नहीं है। अदालत ने जोर देकर कहा कि धार्मिक परंपराओं का इस्तेमाल किसी भी भक्त के साथ पक्षपात या भेदभाव करने के लिए नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन (Justice G Jayachandran) और न्यायमूर्ति ई. मनोहरन (Justice E Manoharan) की खंडपीठ ने कांचीपुरम स्थित ऐतिहासिक अरुलमिगु देवराज स्वामी मंदिर में गैर-ब्राह्मण भक्तों से भेदभाव के आरोपों पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

अदालत की मुख्य टिप्पणियां और संवैधानिक रुख

  • ईश्वर की दृष्टि में सभी समान:“ईश्वर की दृष्टि में सभी जीव समान हैं और ईश्वर किसी में भेदभाव नहीं करता। इसे ध्यान में रखते हुए यह माना गया है कि किसी भी पूजा स्थल में भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं है।”
  • श्रीमद्भगवद्गीता का संदर्भ
    • पीठ ने भगवद्गीता के एक श्लोक का हवाला देते हुए कहा कि ईश्वर सभी जीवों के प्रति समान भाव रखता है—वह न तो किसी का पक्षपात करता है और न ही किसी से घृणा।

Caste Discrimination In Temples: मामले की पृष्ठभूमि और आरोप (Case Background)

  • याचिकाकर्ता: ‘तिरुकाची नम्बी तिरुमलादियार सेवा संगम’ के सचिव माधवन रामानुज दासन ने मद्रास हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की थी।
  • आरोप: याचिका में आरोप लगाया गया था कि कांचीपुरम मंदिर के श्री मणवाला मामुनिगल मंदिर में गैर-ब्राह्मण भक्तों को मुख्य द्वार की बजाय साइड के दरवाजे से प्रवेश कराया जाता है। इसके अतिरिक्त, उन्हें तीर्थम (पवित्र जल), प्रसाद और सटारी (सिर पर रखा जाने वाला धार्मिक मुकुट) देने में भेदभाव किया जाता है तथा उन्हें मंत्र/भजन गाने से रोका जाता है।

Caste Discrimination In Temples: मंदिर प्रशासन की सफाई और कोर्ट का फैसला

  1. समान व्यवहार का आश्वासन: तमिलनाडु सरकार के ‘हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती’ (HR&CE) विभाग और मंदिर प्रशासन ने भेदभाव के आरोपों को खारिज किया। प्रशासन ने कोर्ट को वचन (Undertaking) दिया कि तीर्थम, प्रसाद और सटारी वितरण में सभी भक्तों के साथ बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार किया जाएगा। कोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया।
  2. प्रबंधम/भजन पाठ का अधिकार: मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ‘अध्यापक मिरासी’ (Thenkalai Sect) को विशिष्ट सेवा समय (सथुमरई) के दौरान भजन गाने का पारंपरिक अधिकार प्राप्त है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य भक्तों को ‘नालायिरा दिव्य प्रबंधम’ (पवित्र ग्रंथ) का पाठ करने से रोका जाए।
  3. याचिका का निपटारा: कोर्ट ने दर्ज किया कि याचिकाकर्ता या किसी अन्य भक्त समूह को मंदिर में प्रबंधम का पाठ करने से नहीं रोका जाएगा। इस प्रकार, पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ आम भक्तों की आस्था का भी सम्मान बना रहेगा।

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