Sunday, October 4, 2026
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Admission On False ST Certificate: फार्मेसी कोर्स में फर्जी एसटी प्रमाण पत्र से दाखिला…ओपेन कैटेगिरी के लागू दर पर भरी फीस, जानिए केस

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना एवं न्यायमूर्ति मनमोहन (Supreme Court)
संबद्ध विश्वविद्यालयसंत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय
राहत का मुख्य आधारपूरे पाठ्यक्रम के दौरान ओपन कैटेगरी की दर से फीस जमा करना
भविष्य की पाबंदीआरक्षण (ST Quota) के तहत किसी भी अगले लाभ पर पूर्ण प्रतिबंध

Admission On False ST Certificate: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय से संबद्ध एक संस्थान को फार्मेसी (Pharmacy) की छात्रा का रोका गया परिणाम घोषित करने और उसकी डिग्री जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह राहत इस आधार पर दी कि छात्रा ने अपने पूरे पाठ्यक्रम के दौरान अनॉरक्षित/ओपन कैटेगिरी (Open Category) के लागू दरों पर फीस का भुगतान किया था।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना (Justice BV Nagarathna) और न्यायमूर्ति मनमोहन (Justice Manmohan) की पीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) के फैसलों को रद्द करते हुए अपने पूर्व निर्णयों (अजय दत्तात्रेय बांदेवाड बनाम महाराष्ट्र राज्य तथा मृदुला बनाम महाराष्ट्र राज्य) के आधार पर छात्रा की अपीलों को स्वीकार कर लिया।

Admission On False ST Certificate: मामले की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

  • नामांकन और फीस भुगातान (2014-18): छात्रा ने वर्ष 2014-15 में एसटी (ST) श्रेणी के तहत फार्मेसी में प्रवेश लिया था। कॉलेज द्वारा सूचित किए जाने पर कि वह ओपन कैटेगरी से भी प्रवेश के योग्य है, उसने ओपन कैटेगरी की पूरी फीस जमा की और 2018 में अपनी पढ़ाई पूरी की।
  • जाति प्रमाण पत्र रद्द (2017): जाति स्क्रूटनी कमेटी (Caste Scrutiny Committee) ने साक्ष्य के अभाव में 2017 में उसके एसटी प्रमाण पत्र को अमान्य घोषित कर दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने उसकी छठी और आठवीं परीक्षा के परिणाम और डिग्री रोक दिए।
  • हाई कोर्ट में मुकदमेबाजी:
    1. छात्रा की याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने 2022 में यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह ‘गोंड’ (Gond) जनजाति से संबंध साबित नहीं कर पाई और नियमतः प्रवेश को ओपन कैटेगरी में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
    2. कॉलेज के प्राचार्य द्वारा एनओसी (NOC) दिए जाने के बाद कि उसने ओपन कैटेगरी की फीस दी है, छात्रा ने दोबारा याचिका दायर की, लेकिन हाई कोर्ट ने 2022 के फैसले का हवाला देकर कोई राहत देने से इनकार कर दिया।

Admission On False ST Certificate: सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य आदेश एवं शर्तें

सर्वोच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार करते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए।

  1. डिग्री और परिणाम जारी हों: विश्वविद्यालय को निर्देश दिया गया कि वह छात्रा की छठी व आठवीं तिमाही का परिणाम घोषित करे और उत्तीर्ण होने पर डिग्री तथा मूल दस्तावेज लौटाए।
  2. भविष्य में लाभ पर पूर्ण रोक: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रा भविष्य में किसी भी उच्च शिक्षा या सार्वजनिक रोजगार (Public Employment) के लिए इस रद्द एसटी प्रमाण पत्र का सहारा नहीं लेगी।
  3. नया प्रमाण पत्र न बनाने की शर्त: छात्रा एसटी श्रेणी का नया जाति प्रमाण पत्र बनवाने का कोई प्रयास नहीं करेगी।
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