Sunday, October 4, 2026
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Indian Coast Guard: पुरुषों के लिए व्यवस्था है, तो महिलाओं को इनकार कैसे?; भारतीय तटरक्षक बल में महिला अफसर के स्थायी कमीशन का केस पढ़ें

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठCJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना
याचिकाकर्ताप्रियंका त्यागी (डिप्टी कमांडेंट, ICG)
मूल मुद्दाIndian Coast Guard (ICG) में महिला Short Service Commission अधिकारियों को Permanent Commission देना।
अदालत का अंतिम संदेशयदि ICG स्वयं महिला अधिकारी को स्थायी कमीशन में अवशोषित नहीं करता, तो सर्वोच्च न्यायालय स्पष्ट आदेश जारी करेगा।

Indian Coast Guard: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard – ICG) में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission – PC) न दिए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant), न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) महिला अधिकारी प्रियंका त्यागी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि ICG स्वयं फैसला नहीं लेता, तो अदालत उचित आदेश पारित करेगी।

Indian Coast Guard: अदालत की मुख्य टिप्पणियां और कड़े सवाल

  • नीति न होने का बहाना नहीं चलेगा:“अति-तकनीकी (Hyper-technical) आपत्तियां काम नहीं करेंगी। यदि आपके पास पुरुष अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन की व्यवस्था है, तो आप महिला अधिकारियों को इससे कैसे वंचित कर सकते हैं? आप अपनी ही गलती (नीति न बनाने) का लाभ नहीं उठा सकते।”
  • वरिष्ठता और अपमान पर चिंता
    • पीठ ने कहा कि प्रियंका त्यागी योग्य अधिकारियों की सूची में सबसे वरिष्ठ हैं और उन्हें उनके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पदोन्नति के लिए अनुशंसित किया गया था। कोर्ट ने कहा, “हम किसी अधिकारी को इस तरह अपमानित नहीं होने दे सकते। तटरक्षक बल को खेल भावना (Sportsmanship) दिखानी चाहिए।”

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Indian Coast Guard: सुनवाई के दौरान बहस के मुख्य बिंदु

  • याचिकाकर्ता का पक्ष (अधिवक्ता सिद्धांत शर्मा)
    • कोर्ट को बताया गया कि प्रियंका त्यागी के पास 4,500 घंटे से अधिक की उड़ान (Flying) का अनुभव है, जो पुरुष और महिला दोनों वर्ग के अधिकारियों में सबसे अधिक है।
    • इसके अलावा, उन्हें चाइल्ड केयर लीव (CCL) देने से भी मना कर दिया गया था, जिसके कारण उन्हें अपने 15 महीने के छोटे बच्चे को छोड़कर अंडमान में सेवा देने जाना पड़ा था।
  • अटॉर्नी जनरल (AG) आर. वेंकटरमणी का पक्ष
    • अटॉर्नी जनरल ने तर्क दिया कि इसे लैंगिक मुद्दा (Gender Issue) न माना जाए। उन्होंने नौसेना (Indian Navy) और तटरक्षक बल के बुनियादी ढांचे में अंतर का हवाला दिया।
    • उन्होंने कहा कि ICG में महिला अधिकारियों के लिए विशिष्ट बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की कमी रही है, इसलिए रातों-रात पद सृजित नहीं किए जा सकते। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिया कि अधिकारी को समायोजित (Accommodate) करने की संभावना पर पुनर्विचार किया जाएगा।

Indian Coast Guard: मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)

  1. नियुक्ति और पदोन्नति: प्रियंका त्यागी को 2009 में सहायक कमांडेंट के रूप में नियुक्त किया गया था। वे 2015 में डिप्टी कमांडेंट और 2021 में कमांडेंट (JG) के पद पर पदोन्नत हुईं। 2021 में उन्होंने अपने कमांडिंग अधिकारियों की सिफारिश के साथ स्थायी अवशोषण (Permanent Absorption) का अनुरोध किया।
  2. आवेदन खारिज होना: 2022 में उनका अनुरोध यह कहकर वापस कर दिया गया कि रक्षा मंत्रालय की 2019 की नीति ICG पर लागू नहीं होती और ICG में महिला अधिकारियों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
  3. दिसंबर 2023 में रिहाई और हाई कोर्ट का रुख: मई 2023 में उन्हें रिहाई का आदेश दिया गया, जिसे उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट द्वारा अंतरिम राहत न दिए जाने पर उन्हें दिसंबर 2023 में सेवामुक्त कर दिया गया।
  4. सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट से अपने पास स्थानांतरित कर लिया और अंतरिम आदेश के जरिए उन्हें पूर्व पद पर बनाए रखने की अनुमति दी।

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