मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय पीठ | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार एवं न्यायमूर्ति मोहम्मद युसुफ वानी |
| याचिकाकर्ता | मोनिसा मंजूर मीर (व्यक्तिगत रूप से उपस्थित) |
| प्रतिवादी | UT of J&K (वरिष्ठ अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल मोहसिन एस. कादरी द्वारा प्रतिनिधित्व) |
| मुख्य निर्देश | बड़ी बसों में सीट 1-12 और मिनी बसों में सीट 1-9 पर ‘Reserved for Ladies’ लिखना अनिवार्य; ड्राइवरों हेतु संवेदीकरण अभियान चलाना। |
Women First In Bus: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने केंद्र शासित प्रदेश के परिवहन आयुक्त को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे सार्वजनिक परिवहन बसों में महिलाओं के लिए अनिवार्य सीट आरक्षण और उनकी सुरक्षा से जुड़े अन्य उपायों को सख्ती से लागू करवाएं।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक वाहनों में महिलाओं की आरक्षित सीटों पर स्पष्ट रूप से बड़े व मोटे (Bold) अक्षरों में ‘Reserved for Ladies’ लिखा होना चाहिए।
Women First In Bus: पीठ और मामले की पृष्ठभूमि
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) संजीव कुमार और न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ ने यह फैसला मोनिसा मंजूर मीर बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर शीर्षक वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए सुनाया।
यह याचिका अधिवक्ता मोनिसा मंजूर मीर द्वारा व्यक्तिगत रूप से दायर की गई थी। याचिका में जम्मू-कश्मीर के सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के लिए अनिवार्य सीट आरक्षण और सुरक्षा संबंधी मौजूदा प्रशासनिक निर्देशों व कानूनी प्रावधानों के गैर-अनुपालन पर गंभीर चिंता जताई गई थी। उच्च न्यायालय ने इस मामले में 20 फरवरी को केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, जिसके बाद 10 अगस्त को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए।
Women First In Bus: उच्च न्यायालय द्वारा जारी प्रमुख निर्देश
- सीटों का विशिष्ट आरक्षण व स्पष्ट अंकन: अदालत ने परिवहन आयुक्त को सर्कुलर संख्या 3 TC/2025 के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके तहत बड़ी बसों में सीट संख्या 1 से 12 और मिनी बसों में सीट संख्या 1 से 9 तक महिलाओं के लिए चिन्हित व आरक्षित होनी चाहिए। प्रत्येक वाहन में इन सीटों पर स्पष्ट रूप से मोटे अक्षरों में ‘Reserved for Ladies’ लिखा होना अनिवार्य है।
- चालकों और सहायकों का संवेदीकरण: जम्मू-कश्मीर विधिक सेवा प्राधिकरण (J&K Legal Services Authority) को जागरूकता कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया गया है। विशेष रूप से सार्वजनिक परिवहन के ड्राइवरों और सहायकों (Helpers/Conductors) को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे महिलाओं के लिए तय सीटों को सुरक्षित रखने में अपनी भूमिका समझ सकें।
- शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना: परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस को संयुक्त रूप से एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) तैयार करने का आदेश दिया गया है, ताकि महिला यात्री किसी भी असुविधा या नियम उल्लंघन की स्थिति में आसानी से शिकायत दर्ज करा सकें और तत्काल समाधान पा सकें।
- अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report): न्यायालय ने संबंधित विभागों को इन सभी निर्देशों का तत्काल पालन करने और अगली सुनवाई की तारीख पर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
अदालती कार्यवाही और अगली तारीख
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अधिवक्ता मोनिसा मंजूर मीर स्वयं उपस्थित हुईं, जबकि प्रशासन (प्रतिवादियों) की ओर से वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता (Senior AAG) मोहसिन एस. कादरी और सहायक वकील महा मजीद पेश हुए। उच्च न्यायालय अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को करेगा।

