Tuesday, September 29, 2026
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POSH Committee: क्या एक ही कार्यालय में कार्यरत पति-पत्नी के वैवाहिक विवाद को POSH अधिनियम के तहत लाया जा सकता है? हाईकोर्ट करेगा समीक्षा

मामला सारांश (At a Glance)

विधिक बिंदुविवरण
माननीय अदालतइलाहाबाद उच्च न्यायालय (लखनऊ पीठ)
न्यायाधीशन्यायमूर्ति पंकज भाटिया
मूल प्रश्नक्या एक ही ऑफिस में काम करने वाले पति-पत्नी का घरेलू वैवाहिक विवाद POSH Act के तहत यौन उत्पीड़न माना जा सकता है?
अंतरिम आदेशपति के खिलाफ जारी फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट/चार्जशीट और अनुशासनात्मक कार्यवाही पर स्टे (Stay)।

POSH Committee: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ पीठ ने एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर विचार करने के लिए सहमति व्यक्त की है: क्या एक ही कार्यालय में कार्यरत पति-पत्नी के बीच अनिवार्य रूप से उत्पन्न वैवाहिक विवाद को POSH अधिनियम (कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून) के दायरे में लाया जा सकता है?

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायामूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने मौखिक रूप से अवलोकन किया कि POSH अधिनियम “एक अलग उद्देश्य के लिए बनाया गया कानून है।” अदालत ने अगली सुनवाई तक पति के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही (Disciplinary Proceedings) पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है।

क्या था पूरा मामला?

  1. पति-पत्नी एक ही ऑफिस में सहकर्मी
    • याचिकाकर्ता (पति) और उसकी पत्नी एक ही कार्यालय में काम करते हैं। दोनों का विवाह मार्च 2023 में हुआ था।
  2. कार्यस्थल की घटना और POSH शिकायत
    • अक्टूबर 2024 में हेमकुंड साहिब की यात्रा के बाद दोनों के बीच मतभेद हो गए। इसके बाद, महिला ने आंतरिक शिकायत समिति (POSH Committee) में शिकायत दर्ज कराई कि 9 अक्टूबर 2024 को उसके पति (जो उसका सहकर्मी भी है) ने कार्यालय में अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति में उसके खिलाफ अभद्र भाषा और आपत्तिजनक टिप्पणियों का प्रयोग किया।
    • विशेष बिंदु: महिला ने अपनी शुरुआती POSH शिकायत में उनके वैवाहिक संबंध (Marital Relationship) का खुलासा नहीं किया था।
  3. दहेज/जातिगत उत्पीड़न की FIR
    • इसके बाद दिसंबर 2024 में महिला ने दहेज मांग, मारपीट और जातिगत गाली-गलौज का आरोप लगाते हुए एक अलग FIR भी दर्ज कराई, जिसमें उसने अपनी शादी का जिक्र किया।
  4. POSH समिति की रिपोर्ट
    • POSH समिति ने माना कि यह वैवाहिक विवाद का मामला था, लेकिन उसने निष्कर्ष निकाला कि वैवाहिक मतभेद कार्यस्थल पर असभ्य व्यवहार का औचित्य नहीं हो सकते। समिति ने पति के व्यवहार को POSH अधिनियम के तहत उल्लंघन माना और प्रबंधन से छिपाकर शादी करने के आरोप में दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।

⚖️ उच्च न्यायालय की मुख्य टिप्पणी और कानूनी प्रश्न

  • पति (याचिकाकर्ता) का पक्ष
    • पति ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए तर्क दिया कि व्यक्तिगत और वैवाहिक विवाद को जबरन POSH की कार्यवाही में घसीटा जा रहा है और व्यक्तिगत रंजिश निकालने के लिए इस कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है।
  • हाईकोर्ट का अवलोकन
    • न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने कहा: “प्रथम दृष्टया (Prima facie), इस बात पर विचार करने की आवश्यकता है कि क्या अनिवार्य रूप से वैवाहिक विवाद से उत्पन्न होने वाली कार्यवाहियों को POSH अधिनियम के प्रावधानों के तहत लाया जा सकता है, जबकि यह कानून एक अलग उद्देश्य के लिए बनाया गया है।”

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