Thursday, October 15, 2026
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Public-Defender System: LADCS वकीलों के अनुबंध नवीनीकरण पर रोक के NALSA के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका; यह निर्देश दिया

एट ए ग्लान्स (At a Glance of Case)

विवरणजानकारी
केस शीर्षकएसोसिएशन ऑफ लीगल एड डिफेंस काउंसल्स बनाम भारत संघ (Association of Legal Aid Defence Counsels v. UOI)
संबंधित अदालतभारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India)
पीठ (Bench)न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले
विवाद का कारणNALSA का 4 अगस्त का परिपत्र (Communication), जिसके तहत LADCS वकीलों के कॉन्ट्रैक्ट रीन्यू न करने का निर्देश दिया गया।
मुख्य मांगNALSA के परिपत्र पर रोक लगाने और पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने तक मौजूदा व्यवस्था को चालू रखने की गुहार।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ‘विधिक सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली’ (Legal Aid Defence Counsel System – LADCS) के तहत कार्यरत वकीलों के अनुबंधों का नवीनीकरण न करने के राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के 4 अगस्त के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और नालसा को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है [एसोसिएशन ऑफ लीगल एड डिफेंस काउंसल्स बनाम भारत संघ]।

न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने असम, मेघालय और नागालैंड के विभिन्न जिलों में कार्यरत लीगल एड डिफेंस काउंसिल और सहायक कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने मामले के अंतिम निपटारे तक 4 अगस्त के सर्कुलर पर अंतरिम रोक (Stay) और मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने की मांग की है।

LADCS योजना क्या है और विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

  • 2022 में शुरुआत: नालसा ने वर्ष 2022 में ‘पब्लिक डिफेंडर सिस्टम’ (Public-Defender System) की तर्ज पर आपराधिक मामलों में जरूरतमंदों और विचाराधीन कैदियों को समर्पित विधिक सहायता व प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए LADCS योजना लागू की थी।
  • निजी वकीलों की हड़ताल: इस योजना के तहत पूर्णकालिक वेतनभोगी वकीलों की नियुक्ति का पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के बार संगठनों ने कड़ा विरोध किया। वकीलों ने आरोप लगाया कि यह राज्य द्वारा वित्तपोषित एक समानांतर रक्षा प्रणाली खड़ी कर रहा है, जिससे स्वतंत्र व निजी वकीलों की प्रैक्टिस प्रभावित हो रही है।
  • हड़ताल समाप्ति और NALSA का 4 अगस्त का आदेश: बार निकायों और हाईकोर्ट के जजों के बीच बैठकों के बाद 31 जुलाई को हड़ताल समाप्त हुई। इसके तुरंत बाद नालसा ने 4 अगस्त को संचार जारी कर निर्देश दिया कि:
    • पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में कार्यरत LADCS वकीलों के अनुबंधों का सितंबर 2026 से नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।
    • शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद अनुबंधों का नवीनीकरण नहीं होगा।
    • कानूनी सहायता के मामले बार के अन्य सदस्यों, विशेषकर युवा वकीलों को सौंपे जाएंगे।

याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्तियां और दलीलें

याचिका में नालसा के इस फैसले को प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण और असंगत बताते हुए निम्नलिखित बिंदु उठाए गए:

  • समीक्षा समिति की रिपोर्ट से पहले ही फैसला: नालसा ने मार्च 2026 में LADCS योजना की समीक्षा के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट के जस्टिस पी. सैम कोशी और केरल हाईकोर्ट के जस्टिस ए.के. जयशंकरन नंबियार की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस समिति की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही नालसा ने योजना को समाप्त करने जैसा निर्णय ले लिया।
  • हितधारकों की अनदेखी: निर्णय लेने से पहले केवल कुछ राज्यों के बार प्रतिनिधियों से बात की गई, जबकि कार्यरत लीगल एड वकीलों से न तो कोई परामर्श किया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया।
  • विचाराधीन कैदियों के प्रतिनिधित्व पर संकट: प्रशिक्षित वकीलों को अचानक हटाए जाने से हजारों विचाराधीन कैदियों (Undertrial Prisoners) और लंबित आपराधिक मामलों के प्रभावी प्रतिनिधित्व में बाधा उत्पन्न होगी और संस्थागत निरंतरता प्रभावित होगी।
  • संक्रमण तंत्र (Transition Mechanism) का अभाव: मौजूदा मामलों को नए वकीलों को सौंपने के लिए कोई स्पष्ट और पर्याप्त व्यवस्था नहीं बनाई गई है।

मामले की पृष्ठभूमि और विवाद

  • LADCS योजना की शुरुआत: NALSA ने 2022 में सार्वजनिक रक्षक प्रणाली (Public Defender System) की तर्ज पर आपराधिक मामलों में पात्र आरोपियों और विचाराधीन कैदियों को पूर्णकालिक मुफ्त कानूनी सहायता देने के लिए LADCS की शुरुआत की थी।
  • बार एसोसिएशंस का विरोध: पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के वकीलों ने आरोप लगाया कि LADCS योजना के कारण राज्य द्वारा वित्तपोषित एक समानांतर रक्षा प्रणाली खड़ी हो गई है, जिससे स्वतंत्र/प्राइवेट वकीलों की प्रैक्टिस और आजीविका प्रभावित हो रही है। इस मुद्दे पर वकीलों ने विरोध प्रदर्शन और हड़ताल भी की थी।
  • NALSA का 4 अगस्त का फैसला: बार निकायों के साथ बातचीत के बाद, NALSA ने 4 अगस्त को निर्देश जारी किया कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में सितंबर 2026 से तथा अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने पर LADCS वकीलों के कॉन्ट्रैक्ट रीन्यू नहीं किए जाएंगे। साथ ही मामले युवा अधिवक्ताओं (Empanelled Lawyers) को सौंपने का निर्देश दिया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से यह रही पैरवी

याचिकाकर्ता एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता पल्लवी लंगर के माध्यम से यह याचिका दायर की गई है। शीर्ष अदालत ने मामले पर संज्ञान लेते हुए केंद्र और नालसा से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।

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