मुख्य बिंदु (Key Indicators)
- घटना के समय इंफाल में तैनाती: शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 5 अक्टूबर 2023 की सुबह 6:30 बजे दो भाइयों (जिनमें से एक सेना का जवान है) ने उनके साथ मारपीट की और लूटपाट की। हालांकि, जवान के कमांडिंग ऑफिसर (CO) के प्रामाणिक आधिकारिक रिकॉर्ड ने साबित किया कि वह उस वक्त इंफाल में अपनी सैन्य सेवा पर उपस्थित था।
- शारीरिक रूप से असंभव (Physically Impossible): हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायत बेहद लापरवाही से दर्ज कराई गई थी। किसी भी व्यक्ति के लिए एक ही समय में हजारों मील दूर दो अलग-अलग भौगोलिक स्थानों पर मौजूद होना शारीरिक रूप से असंभव है।
- सिविल विवाद को आपराधिक रंग देना: कोर्ट ने पाया कि पड़ोसियों के बीच आम रास्ते (Common Passage) को लेकर 16 साल से सिविल विवाद चल रहा था। दबाव बनाने और सिविल दावों को वापस लेने पर मजबूर करने की नीयत से यह पुलिस शिकायत दर्ज कराई गई थी।
- दूसरे भाई पर केस जारी रहेगा: हाईकोर्ट ने जवान के खिलाफ कार्यवाही निरस्त कर दी, लेकिन उसके भाई के खिलाफ मामले की सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया, क्योंकि गवाहों के बयानों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर विवाद के दौरान उसके मौजूद रहने के संकेत मिले हैं।
कोलकाता: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पड़ोसियों के बीच संपत्ति विवाद से उपजी एक झूठी आपराधिक कार्यवाही से भारतीय सेना के जवान को राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज मामला रद्द कर दिया है। अदालत ने पाया कि घटना की कथित तारीख और समय पर जवान घटनास्थल से हजारों किलोमीटर दूर इंफाल (मणिपुर) में सक्रिय सैन्य ड्यूटी पर तैनात था।
न्यायमूर्ति उदय कुमार की एकल पीठ ने 25 अगस्त को आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि एक सेवारत सैनिक को झूठे और प्रतिशोध की भावना से दर्ज मुकदमे का दंश झेलने के लिए विवश करना न्यायिक प्रक्रिया का अस्वीकार्य दुरुपयोग है।
उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां
पीठ ने आधिकारिक सैन्य रिकॉर्ड और शिकायत की सत्यता पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा: “यह निर्विवाद और प्रामाणिक आधिकारिक रिकॉर्ड शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की विश्वसनीयता को पूरी तरह ध्वस्त कर देता है। एक स्पष्ट रूप से झूठी और दुर्भावनापूर्ण पुलिस रिपोर्ट के आधार पर देश के एक सैनिक को आपराधिक मुकदमे के अपमान और मानसिक प्रताड़ना को सहने के लिए मजबूर करना न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है।”
अदालत ने आगे कहा: “एफआईआर को बिना सोचे-समझे और अत्यधिक लापरवाही के साथ तैयार किया गया, जिसमें 5 अक्टूबर 2023 की सुबह हुगली में हुए एक स्थानीय झगड़े में सेवारत सैनिक का नाम भी जोड़ दिया गया। किसी भी व्यक्ति के लिए एक ही समय पर हजारों मील की दूरी पर स्थित दो अलग-अलग भौगोलिक स्थानों पर शारीरिक रूप से उपस्थित होना पूरी तरह असंभव है।”
संपत्ति विवाद और झूठे आरोप
- पड़ोसियों का विवाद: विवाद हुगली में दो पड़ोसी परिवारों के बीच एक 4-फुट संकरे साझा रास्ते, जल निकासी और कथित अवैध निर्माण को लेकर चल रहे दीवानी मुकदमे (Civil Dispute) से उपजा था।
- दिसंबर 2023 में शिकायत: दीवानी मामले में बढ़त न मिलने पर विपक्षी पक्ष ने 6 दिसंबर 2023 को पुलिस शिकायत दर्ज कराई। इसमें आरोप लगाया गया कि 5 अक्टूबर 2023 को सुबह 6:30 बजे सेना के जवान और उसके भाई ने अज्ञात लोगों के साथ मिलकर मारपीट की, संपत्ति खाली करने की धमकी दी और ₹7,500 नकद लूट लिए।
आधिकारिक सैन्य रिकॉर्ड ने साबित की निर्दोषता
- कमांडिंग ऑफिसर का प्रमाण पत्र: जांच के दौरान सेना के कमांडिंग ऑफिसर ने आधिकारिक तौर पर प्रमाणित किया कि कथित घटना के समय जवान इंफाल में सक्रिय सैन्य ड्यूटी पर तैनात था।
- दबाव बनाने की रणनीति: याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि यह आपराधिक मामला केवल इसलिए दर्ज कराया गया था ताकि दीवानी विवाद में समझौता करने और अपने वैध दावों को वापस लेने का दबाव बनाया जा सके।
अंतिम आदेश
- सैनिक के खिलाफ मामला रद्द: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सेना के जवान के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक कार्यवाहियों को पूरी तरह रद्द (Quash) कर दिया।
- भाई के खिलाफ सुनवाई जारी रहेगी: अदालत ने पाया कि जवान का भाई स्थानीय निवासी था और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों व मेडिकल रिपोर्ट से मारपीट की संभावना दिखती है, इसलिए उसके खिलाफ निचली अदालत में मुकदमा जारी रहेगा।
कलकत्ता हाईकोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति उदय कुमार ने फैसला सुनाते हुए सख्त लहजे में कहा: “एक अचूक और प्रामाणिक आधिकारिक रिकॉर्ड शिकायतकर्ता के आरोपों की विश्वसनीयता को पूरी तरह ध्वस्त कर देता है। एक झूठी और प्रतिशोधात्मक रिपोर्ट के आधार पर देश के एक सैनिक को आपराधिक मुकदमे के अपमान और मानसिक प्रताड़ना को सहने के लिए मजबूर करना न्यायिक प्रक्रिया का एक अवांछनीय दुरुपयोग है। देश के जवान को झूठे मामले का सामना करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।”
Indian Army: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति उदय कुमार (Justice Uday Kumar) |
| मामला/विवाद | हुगली में पड़ोसियों के बीच 4 फीट के रास्ते और संपत्ति को लेकर विवाद |
| मुख्य आरोपी/याचिकाकर्ता | भारतीय सेना का एक कार्यरत जवान और उसका भाई |
| अदालत का निर्णय | सेना के जवान के खिलाफ केस रद्द; उसके भाई के खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा। |

