Model Builder-Buyer Agreement-I: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Orders)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | तत्कालीन CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ एवं न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा |
| मूल मामला/याचिका | अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका (मॉडल बिल्डर-बायर एग्रीमेंट की मांग) |
| प्रस्तावित संरचना | पार्ट A: देश भर में एक समान RERA के अनिवार्य क्लाॉज़ पार्ट B: राज्यों के स्थानीय जरूरतों के अनुसार अतिरिक्त क्लाॉज़ |
| मुख्य शर्त | ‘पार्ट B’ का कोई भी नियम ‘पार्ट A’ के अनिवार्य RERA नियमों का उल्लंघन या उन्हें कमजोर नहीं कर सकता। |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में फ्लैट खरीदारों के हितों की रक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘मॉडल बिल्डर-बायर एग्रीमेंट’ (Model Builder-Buyer Agreement) तैयार करने की दिशा में राज्यों को अपने सुझाव ‘केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय’ (MoHUA) को सौंपने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा देशभर में एक समान बिल्डर-बायर समझौते को लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस समझौते में ‘रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016’ (RERA Act) के अनिवार्य प्रावधान शामिल होंगे, जिन्हें राज्यों द्वारा बदला या कमजोर (Dilute) नहीं किया जा सकेगा।
मॉडल समझौते की दो-स्तरीय संरचना (Part A और Part B)
अदालत द्वारा नियुक्त न्यायमित्र (Amicus Curiae) वरिष्ठ अधिवक्ता देवाशीष भरूका और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने समझौते का एक संग्रह (Compendium) पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे दो भागों में विभाजित किया गया है:
- भाग ‘क’ (Part A): इसमें ऐसे मूल और अनिवार्य क्लॉज (Core Clauses) शामिल हैं जो पूरे देश में एक समान होंगे। यह RERA अधिनियम 2016 के तहत घर खरीदारों को मिले अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को इन अनिवार्य शर्तों को हटाने या कमजोर करने की अनुमति नहीं होगी।
- भाग ‘ख’ (Part B): इस भाग को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जाएगा। हालांकि, यह शर्त अनिवार्य होगी कि Part B का कोई भी क्लॉज Part A के प्रावधानों के विपरीत नहीं होना चाहिए और न ही RERA कानून को कमजोर करता हो।
राज्यों के विशेष सुझाव और आपत्तियां
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र ने बताया कि तीन राज्यों ने विशेष मुद्दे उठाए हैं:
- हरियाणा: राज्य ने अपने स्तर पर कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए हैं।
- नागालैंड: यहाँ संविधान का अनुच्छेद 371A (विशेष दर्जा व भूमि अधिकार) प्रभावी होता है, जिसे ध्यान में रखना आवश्यक है।
- तमिलनाडु: राज्य ने सुझाव दिया है कि निर्माण और भूमि के लिए दो अलग-अलग समझौते होने चाहिए।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: शीर्ष अदालत ने राज्यों और हितधारक संघों (Associations) को अपने सुझाव केंद्र सरकार को भेजने का निर्देश दिया, ताकि अंतिम रूप देने से पहले इन सभी सिफारिशों पर विचार किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
पीठ ने आदेश दर्ज करते हुए कहा: “एएसजी भाटी और न्यायमित्र भरूका ने रिकॉर्ड पर एक संग्रह रखा है जिसमें ‘Part A’ क्लॉज (जो पूरे देश में एक समान प्रस्तावित हैं) और ‘Part B’ क्लॉज (जिन्हें राज्यों द्वारा इस शर्त के साथ जोड़ा जा सकता है कि वे Part A के विपरीत न हों और RERA के अनुरूप हों) शामिल हैं। यह संग्रह सभी राज्यों और संबंधित एसोसिएशनों को वितरित कर दिया गया है। हम राज्यों और एसोसिएशनों को निर्देश देते हैं कि वे अपनी प्रतिक्रियाएं और सुझाव केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय को सौंपें, ताकि अंतिम मसौदा तैयार करते समय हरियाणा, नागालैंड और तमिलनाडु द्वारा उठाए गए मुद्दों सहित सभी सुझावों पर विचार किया जा सके।”
मामले की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
बिल्डरों द्वारा एकतरफा और मनमाने अनुबंध थोपने से घर खरीदारों को होने वाले उत्पीड़न को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यह पहल की है। इससे पहले भी शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह राज्यों द्वारा बनाए गए RERA नियमों की गहन जांच करे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अनिवार्य उपभोक्ता सुरक्षा मानकों को समझौते में शामिल किया गया है। केंद्र सरकार का उद्देश्य एक ऐसा राष्ट्रव्यापी मानक ढांचा तैयार करना है जो घर खरीदारों के हितों को पूर्ण विधिक सुरक्षा प्रदान करे।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और महत्व
शीर्ष अदालत ने कहा कि होमबायर्स (घर खरीदारों) के हितों की रक्षा और बिल्डरों द्वारा मनमानी शर्तों के थोपे जाने को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का मॉडल बिल्डर-बायर एग्रीमेंट अत्यंत आवश्यक है। अदालत ने दोहराया कि RERA कानून के तहत आवश्यक मूलभूत मानकों को किसी भी राज्य द्वारा ढीला नहीं किया जा सकता।

