सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
- चुनाव का सिद्धांत (Doctrine of Election): सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जब शिकायतकर्ताओं के पास दो विकल्प मौजूद थे और उन्होंने सोच-समझकर पहले RERA का मंच चुना, तो वे बाद में उससे पीछे नहीं हट सकते थे।
- रेरा से छूट की शर्त से बंधे होमबायर्स: कोर्ट ने कहा कि जब शिकायतकर्ताओं ने रेरा के समक्ष ही ‘नई शिकायत दर्ज करने की स्वतंत्रता’ के साथ याचिका वापस ली थी, तो उस चरण में उनके लिए उपभोक्ता आयोग का रुख करने का विकल्प खुला नहीं था।
- अनपंजीकृत प्रोजेक्ट पर रेरा का क्षेत्राधिकार: होमबायर्स का तर्क था कि प्रोजेक्ट अनपंजीकृत (Unregistered) था, इसलिए उन्हें राहत मिलने पर संदेह था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट का पंजीकरण न होना रेरा प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) को समाप्त नहीं करता।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट और उपभोक्ता कानून के टकराव पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक व्यवस्था दी है।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के उस आदेश को पूरी तरह खारिज (Set Aside) कर दिया, जिसमें होमबॉयर्स की उपभोक्ता शिकायत को विचारणीय (Maintainable) माना गया था। शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया है कि यदि किसी होमबायर ने ‘रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016’ (RERA) के तहत प्राधिकरण के समक्ष कानूनी उपाय (Remedy) अपनाने का विकल्प चुना था और बाद में अपनी शिकायत इस शर्त पर वापस ली कि वह रेरा प्राधिकरण के पास ही नई शिकायत दर्ज कराएगा, तो वह उसी विवाद (Same Cause of Action) के लिए बाद में ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम’ (Consumer Protection Act) के तहत कंज्यूमर फोरम का दरवाजा नहीं खटखटा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख विधिक टिप्पणियां
1. फोरम चुनने का अधिकार और ‘इलेक्शन ऑफ रेमेडीज’ (Election of Remedies) विकल्प के चयन पर शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया: “जब शिकायतकर्ताओं के पास उस समय उपलब्ध विधिक विकल्पों में से किसी एक को चुनने का पूरा अधिकार था, और उन्होंने पहली बार में ही 2016 के अधिनियम (RERA) के प्रावधानों के तहत प्राधिकरण से संपर्क कर वह विकल्प चुन लिया, और फिर उसी प्राधिकरण के समक्ष पुनः नई शिकायत दर्ज करने की छूट (Liberty) सुरक्षित रखते हुए अपनी शिकायत वापस ले ली—तो वे बाद में इससे पीछे नहीं हट सकते (Could not have retracted therefrom)।”
2. कंज्यूमर फोरम जाने पर विधिक रोक खंडपीठ ने आगे रेखांकित किया: “रेरा प्राधिकरण के समक्ष ही नई शिकायत दर्ज कराने की स्वतंत्रता के साथ अपनी पूर्व शिकायत वापस लेने के बाद, शिकायतकर्ताओं के लिए उस चरण में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपलब्ध उपाय का विकल्प चुनना कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं था।”
मामले की पृष्ठभूमि और विवाद
- फ्लैट की खरीद और MahaRERA का रुख: रेखा और राजकुमार हेमदेव ने काबरा एंड एसोसिएट्स (Kabra & Associates) द्वारा विकसित इमारत में फ्लैट नंबर 2101 और 2102 खरीदे थे। उन्होंने पहले महाराष्ट्र रेरा (MahaRERA) का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि डेवलपर ने धारा 3 के तहत प्रोजेक्ट का पंजीकरण नहीं कराया है। 14 मई 2019 को प्राधिकरण ने माना कि इस प्रोजेक्ट का पंजीकरण अनिवार्य नहीं था।
- रिफंड की शिकायत और वापसी: इसके बाद खरीदारों ने धारा 18 के तहत फ्लैटों के लिए चुकाई गई राशि वापस पाने (Refund) हेतु MahaRERA में शिकायत दर्ज की। बाद में उन्होंने नए सिरे से शिकायत दायर करने की छूट मांगते हुए अपनी अर्जी वापस ले ली।
- NCDRC का रुख: खरीदार वापस रेरा प्राधिकरण के पास जाने के बजाय वर्ष 2022 में सीधे राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) पहुंच गए। NCDRC ने 23 अगस्त 2023 को डेवलपर की प्रारंभिक आपत्ति को खारिज करते हुए उपभोक्ता शिकायत को सुनवाई योग्य माना।
- सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: डेवलपर ने NCDRC के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
- फ्लैट की खरीद और MahaRERA में शिकायत: होमबायर्स (रेखा और राजकुमार हेमदेव) ने काबरा एंड एसोसिएट्स के प्रोजेक्ट में दो फ्लैट खरीदे थे। उन्होंने सबसे पहले महाराष्ट्र रेरा (MahaRERA) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि बिल्डर ने प्रोजेक्ट पंजीकृत नहीं कराया है।
- रिफंड की याचिका: इसके बाद, होमबायर्स ने धारा 18 के तहत रकम वापसी (Refund) के लिए एक और शिकायत रेरा में दर्ज की। हालांकि, बाद में उन्होंने रेरा के समक्ष दोबारा नई शिकायत दर्ज करने की छूट (Liberty) मांगते हुए इस याचिका को वापस ले लिया।
- NCDRC का रुख: रेरा के पास वापस जाने के बजाय, होमबायर्स ने 2022 में राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) में केस दाखिल कर दिया। NCDRC ने 2023 में बिल्डर की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि उपभोक्ता शिकायत पोषणीय (Maintainable) है। बिल्डर ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
होमबॉयर्स की दलील और सुप्रीम कोर्ट का निष्कर्ष
- होमबॉयर्स का तर्क: खरीदारों ने दलील दी कि चूंकि प्रोजेक्ट गैर-पंजीकृत (Unregistered) था, इसलिए रेरा प्राधिकरण से राहत मिलने को लेकर अनिश्चितता थी, जिसके चलते उन्होंने कंज्यूमर फोरम का रुख किया।
- सुप्रीम कोर्ट ने दलील खारिज की: अदालत ने कहा कि रेरा प्राधिकरण द्वारा 14 मई 2019 को पारित आदेश (चाहे वह कानूनी रूप से सही हो या गलत) अंतिम हो चुका है और दोनों पक्षों पर बाध्यकारी है। किसी प्रोजेक्ट का अपंजीकृत होना रेरा प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) को समाप्त नहीं करता।
अंतिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने डेवलपर (काबरा एंड एसोसिएट्स) की अपील को स्वीकार करते हुए NCDRC के आदेश को रद्द कर दिया और फैसला दिया कि रेरा के समक्ष कार्यवाही वापस लेकर उसी फोरम में जाने की स्वतंत्रता लेने के बाद होमबॉयर्स द्वारा कंज्यूमर फोरम में दायर शिकायत पूरी तरह से गैर-विचारणीय (Not Maintainable) है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा: “जब शिकायतकर्ताओं के पास उपलब्ध कानूनी विकल्पों में से किसी एक को चुनने का अवसर था और उन्होंने पहली बार में 2016 के अधिनियम के तहत प्राधिकरण (RERA) का रुख कर उस विकल्प को चुना, तथा बाद में प्राधिकरण के समक्ष ही दोबारा नई शिकायत दाखिल करने की स्वतंत्रता सुरक्षित रखते हुए अपनी शिकायत वापस ली, तो वे बाद में अपने इस निर्णय से पीछे नहीं हट सकते थे।
Consumer Protection: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Judgment)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठासीन पीठ | न्यायमूर्ति संजय कुमार एवं न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | चुनाव का सिद्धांत (Doctrine of Election); रेरा में शिकायत वापस लेकर कंज्यूमर फोरम नहीं जाया जा सकता। |
| मामला | काबरा एंड एसोसिएट्स (डेवलपर) बनाम रेखा और राजकुमार हेमदेव (होमबायर्स) |
| अदालत का फैसला | NCDRC का आदेश रद्द; होमबायर्स की उपभोक्ता शिकायत पोषणीय नहीं। |

