शीर्ष अदालत की मुख्य टिप्पणियां और सुझाव
- 2013 के नियमों की विफलता: वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ कृपाल ने कोर्ट को वालंटियर्स द्वारा किए गए सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि 2013 के सुरक्षा दिशानिर्देशों के बावजूद तेजाब आसानी से दुकानों पर मिल रहा है। औद्योगिक उपयोग जारी रख घरेलू सफाई के लिए तेजाब के विकल्पों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
- डिजिटल ट्रैकिंग और कड़े उपाय: CJI सूर्य कांत ने एसिड बिक्री को नियंत्रित करने के लिए कई सुझाव दिए, जिनमें आयु सीमा तय करना, खरीदार का लिखित उद्देश्य दर्ज करना और ऑटोमेटेड ट्रैकिंग सिस्टम स्थापित करना शामिल है।
- एसिड निगलने (Acid Ingestion) पर नियम संशोधन: कोर्ट को बताया गया कि तेजाब पिलाए जाने वाले पीड़ितों को विकलांगता प्रमाण पत्र पाने में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार की 2024 की डिसेबिलिटी असेसमेंट गाइडलाइंस में संशोधन का ड्राफ्ट अंतिम चरण में है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देश में तेजाब हमलों (Acid Attacks) की भयावहता और बाजारों में तेजाब की बेरोकटोक उपलब्धता पर गंभीर रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह तेजाब की खुदरा बिक्री (Retail Sale) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने या अत्यधिक सख्त नियामक सुरक्षा उपायों (Strict Regulatory Safeguards) को लागू करने पर विचार करे [शाहीन मलिक बनाम भारत संघ]।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एसिड अटैक पीड़ितों के लिए व्यापक पुनर्वास योजनाएं (Rehabilitation Schemes) तैयार कर 6 सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड पर पेश करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब उसे अवगत कराया गया कि वर्ष 2013 में जारी दिशानिर्देशों के बावजूद तेजाब आज भी आसानी से खरीदा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
1. 2013 के दिशानिर्देश निष्प्रभावी साबित हुए
पुराने नियमों के अप्रभावी होने पर पीठ ने कहा: “हमें अवगत कराया गया है कि वर्ष 2013 में कुछ दिशानिर्देश तय किए गए थे, जो अब कमोबेश निष्प्रभावी (Obsolete) हो चुके हैं और उनका पालन नहीं हो रहा है। इसलिए भारत सरकार को निर्देश दिया जाता है कि वह बाजार में तेजाब की खुदरा बिक्री को कड़ाई से विनियमित करने या उस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर विचार करते हुए एक ठोस योजना तैयार करे।”
2. पीड़ितों पर नियमन का बोझ नहीं डाला जा सकता
सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा: “हम तेजाब हमले के पीड़ितों पर यह बोझ नहीं डाल सकते कि वे हमें बताएं कि इसका नियमन कैसे किया जाए। यह सरकार और प्रशासन का कर्तव्य है।”
सुनवाई के दौरान जब 17 साल पहले एसिड अटैक झेल चुकी एक पीड़िता ने रोते हुए रोज हो रहे हमलों पर रोक लगाने की गुहार लगाई, तो सीजेआई ने भावुक व आश्वस्त करते हुए कहा: “हम लगे हुए हैं। कुछ ना कुछ करेंगे। इसको ऐसे नहीं छोड़ेंगे। कहीं न कहीं logical conclusion (तार्किक निष्कर्ष) तक लेकर जाएंगे।”
याचिकाकर्ता और न्यायमित्र द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु
- सर्वेक्षण में खुली नियमों की पोल: वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ कृपाल ने अदालत को बताया कि वालंटियर्स द्वारा किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि 2013 के नियमों के बावजूद कोई भी व्यक्ति आसानी से दुकानों से तेजाब खरीद सकता है।
- खुदरा बिक्री पर रोक की मांग: याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि तेजाब की औद्योगिक आपूर्ति (Industrial Sale) भले जारी रहे, लेकिन घरेलू सफाई के नाम पर होने वाली खुदरा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए क्योंकि इसके विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं।
- एसिड पिलाने (Acid Ingestion) के मामलों में दिव्यांगता प्रमाण पत्र: यह मुद्दा भी उठाया गया कि केंद्र ने जबरन तेजाब पिलाने के पीड़ितों को दिव्यांगता कानून के तहत मान्यता दी है, लेकिन मौजूदा आकलन मानदंड केवल ‘शारीरिक विकृति’ (Physical Disfigurement) पर केंद्रित होने के कारण आंतरिक चोटों से जूझ रहे पीड़ितों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र मिलने में कठिनाई हो रही है।
केंद्र सरकार (ASG) का रुख
- केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि ऐतिहासिक लक्ष्मी बनाम भारत संघ मामले के बाद केंद्र ने एडवाइजरी और ‘मॉडल रूल्स’ राज्यों को भेजे थे। हालांकि, राज्यों ने न तो जरूरी कमेटियों का गठन किया और न ही नियमों को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू किया।
- दिव्यांगता प्रमाण पत्र के मुद्दे पर एएसजी ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि 2024 के दिव्यांगता आकलन दिशानिर्देशों में संशोधन का अंतिम मसौदा तैयार है और जल्द ही इसे अधिसूचित किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुझाए गए सुरक्षा उपाय व निर्देश
- खरीद का डिजिटल रिकॉर्ड व आयु सीमा: सीजेआई ने सुझाव दिया कि तेजाब खरीद के लिए न्यूनतम आयु सीमा तय हो, खरीदार से लिखित कारण दर्ज कराया जाए और एक स्वचालित (Automated/Centralized) ट्रैकिंग सिस्टम बने ताकि यह पता चल सके कि बाजार में कितना तेजाब बिक रहा है।
- स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में इमरजेंसी प्रोटोकॉल: अदालत ने एनजीओ को निर्देश दिया कि वे 4 सप्ताह में सुझाव दें कि हमले के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार (Emergency Protocol/Post-attack Treatment) और रोकथाम को स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा कैसे बनाया जाए।
- राज्यों की जवाबदेही (6 सप्ताह): सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पीड़ितों के मुआवजे, चिकित्सा और रोजगार/पुनर्वास के लिए तैयार योजनाओं की स्थिति रिपोर्ट 6 सप्ताह में दाखिल करनी होगी।
पीड़ितों के लिए CJI का आश्वासन
सुनवाई के दौरान जब एक एसिड अटैक पीड़िता ने अपनी आपबीती साझा करते हुए त्वरित कार्रवाई की अपील की, तो CJI सूर्य कांत ने हिंदी में उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा: “हम लगे हुए हैं। कुछ न कुछ करेंगे। इसको ऐसे नहीं छोड़ेंगे। कहीं न कहीं logical conclusion (तार्किक निष्कर्ष) तक लेकर जाएंगे।”
Acid Fully Ban: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Supreme Court Directions)
| विवरण | जानकारी |
| मामला | शाहीन मलिक बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (Shaheen Malik v. Union of India) |
| पीठासीन पीठ | CJI सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना |
| मुख्य मुद्दा | बाजारों में तेजाब (Acid) की सुगम बिक्री और पीड़ितों का पुनर्वास। |
| राज्यों के लिए निर्देश | सभी राज्य/UTs 6 सप्ताह में एसिड अटैक पीड़ितों के लिए पुनर्वास योजनाएं पेश करें। |
| स्कूली पाठ्यक्रम | NGOs 4 सप्ताह के भीतर स्कूलों/कॉलेजों के लिए एसिड जागरूकता पाठ्यक्रम का खाका सौंपें। |

