विवाद और संकट का मुख्य कारण
- 9 मार्च के आदेश का अंत: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल्स को निष्क्रिय होने से बचाने के लिए 9 मार्च 2026 को NGT के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 8 सितंबर तक बढ़ाया था। यह समयसीमा अब समाप्त हो रही है।
- सिंगल-मेम्बर बेंच पर रोक: NGT एक्ट के नियमों के अनुसार कोई भी सिंगल-मेम्बर बेंच सुनवाई नहीं कर सकती। कम से कम एक न्यायिक सदस्य और एक विशेषज्ञ सदस्य (Expert Member) का होना अनिवार्य है।
- जोनल पीठों का काम ठप होने का डर: बार एसोसिएशन ने तर्क दिया कि 8 सितंबर के बाद दक्षिणी पीठ (चेन्नई) और पश्चिमी पीठ (पुणे) सहित 3 पीठों में कोरम पूरा न होने से काम रुक जाएगा। केवल दिल्ली स्थित प्रधान पीठ (Principal Bench) ही आंशिक रूप से कार्य कर पाएगी, जिससे देश भर के पर्यावरण से जुड़े मामलों का बोझ दिल्ली पर आ जाएगा।
- नई नियुक्तियों में देरी: ट्रिब्यूनल से जुड़े नए कानूनों और धारा 24(3) के प्रावधानों के बावजूद, नई नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी होने में समय लगेगा, जिससे इस बीच में न्यायिक शून्यता (Judicial Vacuum) पैदा हो जाएगी।
नई दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि न्यायिक और विशेषज्ञ सदस्यों की भारी कमी के कारण 8 सितंबर से NGT की तीन क्षेत्रीय (जोनल) पीठों का कामकाज पूरी तरह ठप हो सकता है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एनजीटी बार एसोसिएशन द्वारा मामले के शीघ्र सूचीबद्धीकरण (Urgent Listing) के अनुरोध के बाद यह आदेश दिया। पहले यह मामला 15 सितंबर के लिए सूचीबद्ध था। शीर्ष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस याचिका पर 8 सितंबर 2026 से पहले विशेष सुनवाई करने पर सहमति जताई है।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एनजीटी बार एसोसिएशन की प्रमुख दलीलें
1. कोरम के अभाव में कामकाज बंद होने का खतरा बार एसोसिएशन के वकील ने पीठ को अवगत कराया:
- सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में ट्रिब्यूनल को निष्क्रिय होने से बचाने के लिए सदस्यों का कार्यकाल 8 सितंबर, 2026 तक बढ़ाया था।
- यह विस्तारित कार्यकाल 8 सितंबर को समाप्त हो रहा है। एनजीटी अधिनियम के तहत ‘सिंगल-मेंबर बेंच’ (एक सदस्यीय पीठ) द्वारा सुनवाई की अनुमति नहीं है।
- कोरम पूरा न होने के कारण दक्षिणी जोनल बेंच (चेन्नई) और पश्चिमी जोनल बेंच (पुणे) सहित 3 क्षेत्रीय बेंचों में 8 सितंबर के बाद कामकाज पूरी तरह बंद हो जाएगा।
2. सभी मामलों का बोझ दिल्ली प्रिंसिपल बेंच पर आने की आशंका वकील ने रेखांकित किया:
- यदि सदस्यों का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया या नई नियुक्तियां नहीं हुईं, तो जोनल बेंचों के पूरी तरह ठप होने के बाद सभी मुकदमों की सुनवाई केवल दिल्ली स्थित प्रिंसिपल बेंच में करनी पड़ेगी।
- वर्तमान में दिल्ली में दो पीठें कार्यरत हैं, जिनमें से एक 8 सितंबर के बाद बंद हो जाएगी।
3. नई नियुक्तियों में समय लगने की दलील बार एसोसिएशन ने कहा कि ट्रिब्यूनल से संबंधित नए कानून के तहत चयन प्रक्रिया पूरी होने और नई नियुक्तियां होने में समय लगेगा। रातों-रात नियुक्तियां संभव नहीं हैं। ऐसे में जब तक नई नियुक्तियां नहीं हो जातीं, अंतरिम व्यवस्था के तौर पर सदस्यों के कार्यकाल को आगे बढ़ाया जाना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए अंतरिम आदेश
- फरवरी 2026: न्यायिक सदस्यों की सेवानिवृत्ति से उत्पन्न संकट को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नई नियुक्तियों या अगले आदेश तक 3 न्यायिक सदस्यों को काम जारी रखने की अंतरिम अनुमति दी थी।
- 9 मार्च 2026: शीर्ष अदालत ने विभिन्न ट्रिब्यूनलों के अध्यक्षों और सदस्यों के कार्यकाल को अधिकतम आयु सीमा की शर्त के अधीन 8 सितंबर 2026 तक विस्तार दिया था, ताकि ट्रिब्यूनल निष्प्रभावी न हों।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी बार एसोसिएशन की इस दलील को स्वीकार किया कि 8 सितंबर के बाद ट्रिब्यूनल के ठप होने से पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई प्रभावित होगी। पीठ ने आश्वासन दिया कि 8 सितंबर को कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही इस मामले पर सुनवाई की जाएगी।
Lack of Member: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Issue)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठासीन पीठ | CJI सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना |
| संबंधित संस्थान | नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal – NGT) |
| समयसीमा | सदस्यों का विस्तारित कार्यकाल 8 सितंबर 2026 को समाप्त हो रहा है |
| प्रभावित पीठें | दक्षिणी पीठ (Chennai), पश्चिमी पीठ (Pune) और दिल्ली की एक अन्य पीठ |
| कानूनी अड़चन | NGT अधिनियम के तहत एकल-सदस्यीय (Single-Member) पीठ सुनवाई नहीं कर सकती |

