विवाद की पृष्ठभूमि और मुख्य आरोप
- प्रसारण का विवरण: 27 अगस्त को DD न्यूज पर प्रसारित शो “DECODE” के एक एपिसोड में सुधीर चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान शेरावत की तस्वीर दिखाई और उन पर “संसद भवन उखाड़ दिया जाएगा… नेपाल बना दिया जाएगा” जैसे नारे लगाने का आरोप लगाया।
- गलत पहचान का दावा: शेरावत का कहना है कि उन्होंने यह बयान कभी नहीं दिया। यह टिप्पणी किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति द्वारा किसी अलग कार्यक्रम में की गई थी, जो उनसे पूरी तरह अलग दिखता है।
- जांच में लापरवाही: याचिका के अनुसार, प्रसारण से पहले कोई सत्यापन (Verification) नहीं किया गया और न ही शेरावत को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। जानबूझकर कम गुणवत्ता वाली फुटेज इस्तेमाल की गई ताकि पहचान में भ्रम बना रहे।
- जान से मारने की धमकियां: शेरावत ने तर्क दिया कि प्रसारण के तुरंत बाद यह क्लिप X (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर वायरल हो गई, जिसके बाद उन्हें सिर कलम करने, हाथ-पैर तोड़ने और गोली मारने की धमकियां मिलने लगीं। इंस्टाग्राम पर दी गई उनकी सफाई राष्ट्रीय चैनल की पहुंच के सामने अपर्याप्त साबित हुई।
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्रकार सुधीर चौधरी, उनकी प्रोडक्शन कंपनी ‘एस्प्रिट प्रोडक्शंस’ (Essprit Productions) और सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती (DD News) को एक दीवानी मानहानि मुकदमे (Defamation Suit) में समन जारी किया है।
न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की एकल पीठ ने मुकदमे पर समन जारी करने के साथ-साथ अंतरिम रोक (Interim Injunction) की अर्जी पर भी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को होगी। यह वाद सामाजिक कार्यकर्ता विजय शेरावत द्वारा दायर किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि डीडी न्यूज पर प्रसारित कार्यक्रम में उन्हें गलत तरीके से “देश विरोधी” के रूप में चित्रित किया गया और झूठा दावा किया गया कि वे संसद भवन को उखाड़ने और देश को नेपाल जैसा बनाने के नारे लगा रहे थे।
मानहानि मुकदमे में लगाए गए मुख्य आरोप
1. डीडी न्यूज के कार्यक्रम ‘DECODE’ में गलत पहचान
- याचिका के अनुसार, सुधीर चौधरी द्वारा संचालित कार्यक्रम “DECODE” के एक एपिसोड में विजय शेरावत की तस्वीर दिखाते हुए उन्हें उस व्यक्ति के रूप में पेश किया गया जिसने नारे लगाए थे: “संसद भवन उखाड़ दिया जाएगा… नेपाल बना दिया जाएगा”।
- शेरावत का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई बयान कभी नहीं दिया। यह बयान किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति द्वारा किसी अलग कार्यक्रम में दिया गया था और दोनों व्यक्तियों के चेहरे और शारीरिक बनावट में स्पष्ट अंतर है।
2. बिना सत्यापन (Verification) और खराब क्वालिटी फुटेज का इस्तेमाल
- वाद में आरोप लगाया गया है कि प्रसारण से पहले तथ्यों का कोई सत्यापन नहीं किया गया और न ही शेराव जानबूझकर स्पष्टीकरण लेने का कोई अवसर दिया गया।
- आरोप है कि जानबूझकर कम गुणवत्ता (Low-resolution) वाले वीडियो फुटेज का उपयोग किया गया ताकि दोनों चेहरों के अंतर को छिपाया जा सके।
3. जान से मारने और सिर कलम करने की धमकियां
- वादी के अनुसार, राष्ट्रीय टेलीविजन पर प्रसारण के कुछ ही घंटों के भीतर यह क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (X और इंस्टाग्राम) पर वायरल हो गई।
- इसके परिणामस्वरूप उन्हें और उनके परिवार को गोली मारने, सिर कलम करने और हाथ-पैर तोड़ने जैसी खुली धमकियां मिलने लगीं; यहां तक कि कुछ उपयोगकर्ताओं ने हमला करने के लिए उनका घर का पता तक मांगा।
- शेरावत ने 31 जुलाई को अपने इंस्टाग्राम पर स्पष्टीकरण वीडियो भी पोस्ट किया, लेकिन 4,224 फॉलोअर्स वाले निजी खाते की पहुंच 1.4 अरब डिजिटल व्यूज का दावा करने वाले राष्ट्रीय चैनल के दुष्प्रचार का मुकाबला नहीं कर सकी।
याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें
- ₹5 करोड़ का हर्जाना: छवि को जानबूझकर पहुंचे गंभीर नुकसान, मानसिक प्रताड़ना और प्रतिष्ठा हनन के बदले ₹5 करोड़ का मुआवजा।
- अंतरिम रोक और कंटेंट हटाना (Takedown): सुधीर चौधरी, डीडी न्यूज और अन्य प्रतिवादियों को इस मानहानिकारक सामग्री को आगे प्रसारित, पुनर्प्रकाशित या डिजिटल रूप से सर्कुलेट करने से रोकने का स्थायी व अंतरिम आदेश।
हाईकोर्ट का रुख और निर्देश
न्यायमूर्ति प्रसाद ने अंतरिम रोक की याचिका पर सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए कहा: “अपेक्षा की जाती है कि सुनवाई की अगली तारीख (22 सितंबर) पर प्रतिवादी संख्या 1, 2 और 3 (सुधीर चौधरी, प्रोडक्शन कंपनी और डीडी न्यूज) अंतरिम रोक के संबंध में अपनी दलीलें प्रस्तुत करने के लिए पूरी तरह तैयार रहेंगे।”
विधिक प्रतिनिधित्व
- वादी (विजय शेरावत) की ओर से: अधिवक्ता पुष्प शर्मा, आदित्य नारायण शुक्ला, जय अल्लाघ और प्रसून शेखर।
मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद (Justice Subramonium Prasad) |
| वादी (Plaintiff) | विजय शेरावत (एक्टिविस्ट / छात्र) |
| प्रतिवादी (Defendants) | सुधीर चौधरी, एसप्रिट प्रोडक्शंस एवं प्रसार भारती (DD News) |
| मांगा गया मुआवजा | ₹5 करोड़ |
| अगली सुनवाई | 22 सितंबर 2026 (अंतरिम रोक याचिका पर) |

