मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना |
| कुल आवश्यक विशेष अदालतें | 449 (वर्तमान में केवल 176 कार्यरत) |
| समय-सीमा | 6 महीने के भीतर ढांचा और नियुक्तियां पूरी करने के निर्देश |
| प्रकृति | स्वत: संज्ञान (Suo Motu) कार्यवाही — विशेष कानूनों के तहत मुकदमों को गति देना |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में नशीली दवाओं और मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों की बढ़ती संख्या और अदालतों में लंबित मुकदमों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार की स्टेटस रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश पारित किया। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमों के त्वरित निपटारे के लिए प्राथमिकता के आधार पर 6 महीने के भीतर 449 विशेष NDPS अदालतें (Exclusive NDPS Courts) स्थापित करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख विधिक टिप्पणियां
1. नशीले पदार्थों के बढ़ते मामलों पर त्वरित न्याय जरूरी विशेष अदालतों की आवश्यकता पर जोर देते हुए पीठ ने दर्ज किया: “एनडीपीएस अधिनियम के तहत लंबित मामलों की वर्तमान संख्या और देशभर में इस कानून के तहत अपराधों में आई चिंताजनक वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, यह न्यायहित में समीचीन है कि आवश्यक 449 विशेष एनडीपीएस अदालतों की स्थापना जल्द से जल्द की जाए।”
2. आवश्यक बुनियादी ढांचा और स्टाफ तत्काल मुहैया कराएं शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिया कि वे इस कमी को पूरा करने के लिए तुरंत आवश्यक अदालती बुनियादी ढांचा (Court Infrastructure), न्यायिक अधिकारी और प्रशासनिक कर्मचारी उपलब्ध कराएं ताकि ट्रायल दैनिक आधार (Day-to-day Basis) पर चलाकर मुकदमों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित हो सके।
केंद्र सरकार की स्टेटस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को अवगत कराया:
- NDPS अदालतों की कमी: पूर्व में 394 विशेष एनडीपीएस अदालतों की आवश्यकता आंकी गई थी, जिसे संशोधित कर अब 449 कर दिया गया है।
- वर्तमान स्थिति: आवश्यकता के मुकाबले वर्तमान में पूरे देश में केवल 176 विशेष एनडीपीएस अदालतें ही संचालित हैं (जो कि पहले 113 थीं)।
- विशेष क़ानूनों में त्वरित सुनवाई: यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशेष कानूनों—NDPS एक्ट, UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम), MCOCA और NIA एक्ट—के तहत मामलों को एक साल के भीतर निपटाने के लिए शुरू की गई स्वतः संज्ञान (Suo Motu) कार्यवाही के तहत दिया गया।
विभिन्न राज्यों में विशेष NIA अदालतों के लिए तय समयसीमा
ASG भाटी ने बताया कि देशभर में विशेष NIA अदालतों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है, लेकिन कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में अब भी कार्यात्मक विशेष NIA अदालतों का अभाव है। अदालत ने राज्यों के लिए निम्नलिखित समयसीमा तय की:
- कर्नाटक: राज्य में बेंगलुरु, चिकमगलूर और उडुपी में 3 विशेष एनआईए अदालतें प्रस्तावित हैं, जिन्हें दो सप्ताह के भीतर अधिसूचित करने का निर्देश दिया गया।
- केरल: 22 लंबित मामलों के लिए 2 अदालतें स्वीकृत हैं। राज्य द्वारा 2-3 महीने का समय मांगने पर सीजेआई ने प्रक्रिया में देरी न करने और तुरंत बुनियादी ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया।
- असम: एक अदालत अधिसूचित हो चुकी है; अदालत ने शेष दो प्रस्तावित अदालतों को चार सप्ताह के भीतर चालू करने का निर्देश दिया।
- तेलंगाना: नामित विशेष एनआईए अदालत को क्रियाशील बनाने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया।
- बिहार: राज्य की ओर से सूचित किया गया कि 16 लंबित मामलों के लिए 2 विशेष अदालतें पहले से ही पूरी तरह संचालित हैं।

