अदालत के निर्देश और शर्तें
- 30 नवंबर तक दंडात्मक कार्रवाई पर रोक: अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि 30 नवंबर 2026 तक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाया जाए।
- जांच जारी रहेगी: राहत के बावजूद, अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस की जांच (Investigation) नहीं रुकेगी और बनर्जी को जांच में सहयोग करना होगा।
- 48 घंटे का नोटिस: यदि जांच एजेंसी को पूछताछ के लिए बनर्जी की उपस्थिति की आवश्यकता होती है, तो उन्हें कम से कम 48 घंटे पहले नोटिस देना होगा।
- विदेश यात्रा का संज्ञान: अदालत को सूचित किया गया कि बनर्जी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत इलाज के लिए विदेश गए हैं और 22 सितंबर को लौटेंगे। इसलिए, पुलिस को 24 सितंबर के बाद ही कोई नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने ‘सेवाश्रय’ (Sebaashray) मेडिकल कैंपों से जुड़े विवाद में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लगातार दर्ज हो रही प्राथमिकियों (FIRs) पर पश्चिम बंगाल राज्य को कड़ी चेतावनी दी है।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए तीन और एफआईआर में उन्हें 30 नवंबर 2026 तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई (Coercive Action) से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि एक ही तरह की शिकायतों पर बार-बार केस दर्ज करने का सिलसिला जारी रहा, तो वह पूर्व में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के मामले में पारित आदेश की तरह बिना अदालत की अनुमति के नई एफआईआर दर्ज करने पर पूर्ण प्रतिबंध (Blanket Injunction) लगाने का आदेश जारी कर देगी।
उच्च न्यायालय की प्रमुख और तल्ख टिप्पणियां
1. ‘Enough is enough’ — बार-बार एफआईआर दर्ज करने पर कोर्ट नाराज
अदालत ने लगातार मामलों के दर्ज होने पर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा: “अब बहुत हो गया (Enough is enough)। मैं मई 2026 से इन मामलों की सुनवाई कर रहा हूं। अब मैं तंग आ चुका हूं। अगर यही चलता रहा, तो मैं समन्वय पीठ द्वारा शुभेंदु अधिकारी के मामले में पारित आदेश का हवाला देते हुए एक ऐसा आदेश पारित करूंगा कि इस अदालत की अनुमति के बिना कोई भी नई एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकेगी। यह सीटी एक साल पहले क्यों नहीं बजाई गई? हर दिन एक के बाद एक शिकायतें आ रही हैं।”
2. हिरासत में पूछताछ (Custodial Interrogation) का कोई औचित्य नहीं
कथित अपराधों में बनर्जी की सीधी संलिप्तता के अभाव पर सवाल उठाते हुए पीठ ने टिप्पणी की: “अभिषेक बनर्जी और एफआईआर में लगाए गए आरोपों के बीच कोई प्रथम दृष्टया सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है। क्या उन्होंने कोई दवा लिखी थी? जब उन्होंने व्यक्तिगत रूप से किसी मरीज का इलाज नहीं किया, तो हिरासत में लेकर पूछताछ की क्या आवश्यकता है? पुलिस अपनी निष्पक्ष जांच जारी रखे, लेकिन हिरासत की जरूरत नहीं है।”
3. राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता पर टिप्पणी
अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया कि शिकायतों के पीछे वही व्यक्ति है जो संसदीय चुनावों में बनर्जी से दो बार चुनाव हार चुका है। पीठ ने सवाल उठाया कि चुनाव हारने वाले राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी द्वारा एक के बाद एक शिकायतें दर्ज कराने का क्या पैटर्न है।
मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर के आरोप
- ‘सेवाश्रय’ मेडिकल कैंप विवाद: अभिषेक बनर्जी द्वारा अपने संसदीय क्षेत्र में आयोजित किए गए सेवाश्रय स्वास्थ्य शिविरों को लेकर चिकित्सा लापरवाही (Medical Negligence), एक्सपायर्ड दवाओं के उपयोग और बिना आवश्यक वैधानिक अनुमतियों के कुछ मेडिकल प्रक्रियाओं के संचालन के आरोपों के तहत कई एफआईआर दर्ज की गई थीं।
- राज्य सरकार का तर्क: राज्य की ओर से दलील दी गई कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और कैंप आयोजक के रूप में बनर्जी अपने अधीनस्थों के माध्यम से वैधानिक उल्लंघनों से जुड़े हो सकते हैं। ड्रग कंट्रोलर द्वारा कथित तौर पर एक्सपायर्ड दवाएं जब्त की गई हैं।
- बनर्जी का पक्ष: वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में मिले संरक्षण को निष्प्रभावी करने के लिए जानबूझकर राजनीति से प्रेरित मुकदमों की झड़ी लगाई जा रही है, जिससे अदालत का कीमती समय बर्बाद हो रहा है।
हाईकोर्ट द्वारा जारी निर्देश
- 30 नवंबर तक दंडात्मक कार्रवाई पर रोक: अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि इन तीन नई एफआईआर के सिलसिले में 30 नवंबर 2026 तक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम (जैसे गिरफ्तारी) न उठाया जाए।
- जांच नहीं रुकेगी; 48 घंटे का पूर्व नोटिस: पुलिस को जांच जारी रखने की पूरी छूट दी गई है। यदि पुलिस को पूछताछ के लिए उन्हें बुलाना हो, तो कम से कम 48 घंटे का अग्रिम नोटिस देना अनिवार्य होगा।
- विदेश यात्रा और 24 सितंबर के बाद नोटिस: कोर्ट को अवगत कराया गया कि बनर्जी सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार चिकित्सीय उपचार के लिए 3 सितंबर को विदेश गए हैं और 22 सितंबर को लौटेंगे। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पुलिस उन्हें कोई भी नोटिस 24 सितंबर 2026 के बाद ही जारी करे।
- अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी, जहां पुलिस को जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।
विधिक प्रतिनिधित्व
- याचिकाकर्ता (अभिषेक बनर्जी) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और अधिवक्ता अयान भट्टाचार्य।
मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य |
| केस का नाम | Abhishek Banerjee v. State of West Bengal & Ors. |
| संबंधित मामला | ‘सेवाश्रय’ (Sebaashray) मेडिकल कैंप से जुड़ी शिकायतें |
| मुख्य आदेश | 30 नवंबर 2026 तक दंडात्मक कार्रवाई पर रोक; बिना अनुमति नई FIR पर रोक लगाने का संकेत। |

