मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| पीठ | मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तेजस कारिया |
| घटना स्थल | सत्या निकेतन (दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस के पास) |
| मुख्य निर्देश | MCD को निर्माण की वैधता जांचने के आदेश; DU, MCD व सरकार को जवाब तलब। |
| अगली सुनवाई | 25 सितंबर 2026 |
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में छात्रों के पेइंग गेस्ट (PG) के रूप में संचालित एक बहुमंजिला इमारत के ढहने की भीषण त्रासदी पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है।
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार और नागरिक प्रशासन इस दुखद घटना से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते। अदालत ने मलबे में फंसे छात्रों के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाने और MCD को उच्चतम स्तर पर जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय करने का निर्देश दिया है [अनिकेत कुमार गुप्ता बनाम दिल्ली सरकार एवं अन्य]। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को तय की गई है।
उच्च न्यायालय की प्रमुख और तल्ख टिप्पणियां
1. सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती हादसे में हताहत छात्रों की स्थिति पर क्षोभ जताते हुए खंडपीठ ने कहा: “आप (सरकार) अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते… 50 युवा छात्र जो अपने जीवन की दहलीज पर खड़े थे… उनमें से अधिकांश शायद अभी भी मलबे के नीचे दबे हैं, इससे अधिक दुखद कुछ नहीं हो सकता।”
2. अवैध निर्माण और छात्रावासों की भारी कमी पीजी हॉस्टलों की अनियंत्रित और खतरनाक स्थिति पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा: “सरकारी व विश्वविद्यालय छात्रावासों की संख्या के मामले में बेहद दयनीय स्थिति है। छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल न होने के कारण ये निजी पीजी न केवल बेहद खतरनाक बन चुके हैं, बल्कि छात्रों के जीवन और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। पीजी मालिक लापरवाही से अवैध निर्माण करते हैं—यदि अनुमति दो मंजिलों की होती है, तो छह मंजिलें खड़ी कर दी जाती हैं, और यह हादसा शायद उसी का नतीजा है।”
3. हर दूसरे साल ऐसी त्रासदियों पर सवाल अदालत ने निराशा जताते हुए पूछा कि राष्ट्रीय राजधानी में हर दूसरे साल ऐसी त्रासदियां क्यों दोहराई जाती हैं और दिल्ली सरकार इन्हें स्थायी रूप से रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठा रही है।
मामले की पृष्ठभूमि और जनहित याचिका (PIL) की मांगें
- सत्य निकेतन हादसा: दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला पीजी इमारत ढह गई, जिसमें अब तक कम से कम 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और कई छात्र मलबे में फंसे हैं। संचालक के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा चुकी है।
- याचिकाकर्ता अनिकेत कुमार गुप्ता की मांगें:
- मृतकों के परिजनों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
- हादसे के कारणों, भवन योजनाओं के उल्लंघन, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट, फायर सेफ्टी और मरम्मत कार्य की वैधता की स्वतंत्र व समग्र जांच हो।
- सत्य निकेतन और दिल्ली के सभी प्रमुख छात्र आवासीय क्षेत्रों (Student Clusters) में स्थित पीजी/हॉस्टलों का तत्काल व्यापक स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
हाईकोर्ट द्वारा जारी मुख्य निर्देश
- शीर्ष स्तरीय जांच और अधिकारियों की जवाबदेही: नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया गया कि वह उच्चतम स्तर पर जांच करे कि क्या इमारत वैध स्वीकृत नक्शे के साथ बनी थी। साथ ही इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रस्तावित दंडात्मक कार्रवाई से अदालत को अवगत कराए।
- DU और सरकार से विस्तृत जवाब तलब:
- दिल्ली विश्वविद्यालय (DU): कितने छात्र हर साल प्रवेश लेते हैं और उनमें से कितनों को विश्वविद्यालय द्वारा छात्रावास की सुविधा दी जाती है।
- केंद्र व दिल्ली सरकार: दिल्ली में कितने छात्र ऐसे निजी पीजी में रहने को मजबूर हैं और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने की क्या योजना है।
- MCD: दिल्ली में पीजी/हॉस्टलों को विनियमित (Regulate) करने के लिए क्या वैधानिक या कार्यकारी नियम मौजूद हैं।
सोशल मीडिया पर संवेदनहीनता पर सॉलिसिटर जनरल की चिंता
- केंद्र सरकार, एमसीडी और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि बचाव अभियान पूरी ताकत से जारी है।
- एसजी मेहता ने मलबे में दबे या घायल छात्रों के संवेदनशील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर चिंता जताई और कहा—“मौत और त्रासदी को सनसनीखेज (Sensationalised) नहीं बनाया जा सकता।” अदालत ने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार करने की बात कही।

