Tuesday, October 27, 2026
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Consumer Disputes: मात्र ₹250 के फूड ऑर्डर रद्द करने पर जोमैटो को झटका; ग्राहक को मानसिक प्रताड़ना व कानूनी खर्च समेत ₹8,250 चुकाएं

उपभोक्ता आयोग के मुख्य निष्कर्ष और निर्देश

  1. जोमैटो के दावे पर सवाल: आयोग ने जोमैटो के “संपर्क न होने” वाले दावे को खारिज कर दिया। आयोग ने माना कि जब उसी समय उसी पते पर बाकी 3 ऑर्डर डिलीवर हो गए थे, तो केवल दो ऑर्डरों के लिए ग्राहक का पहुंच से बाहर होना तार्किक नहीं लगता।
  2. गोल्ड मेंबरशिप और सेवा में कमी: आयोग ने रेखांकित किया कि जोमैटो गोल्ड का सदस्य होने के नाते ग्राहक प्रीमियम सेवा का हकदार था, लेकिन जोमैटो ने कानूनी नोटिस का जवाब तक नहीं दिया। यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act) के तहत सेवा में गंभीर लापरवाही है।
  3. मुआवजे का विवरण
    • मूल राशि का रिफंड: ₹250.61 (ऑर्डर तिथि से भुगतान तक 6% वार्षिक ब्याज के साथ)।
    • मानसिक तनाव व असुविधा का मुआवजा: ₹5,000/-
    • कानूनी कार्यवाही/मुकदमे का खर्च: ₹3,000/-

नई दिल्ली: दिल्ली के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission) ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो (Zomato) द्वारा ग्राहक के दो फूड ऑर्डर मनमाने ढंग से रद्द करने और रिफंड न देने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है।

आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार तथा सदस्य निपुर चंदना और राजेश की पीठ ने यह निर्णय पारित किया। आयोग ने जोमैटो को आदेश के अनुपालन के लिए 45 दिनों की समयसीमा दी है। फोरम ने इसे ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practice) करार देते हुए जोमैटो को ₹250.61 के मूल ऑर्डर की राशि ब्याज सहित लौटाने और ग्राहक को कुल ₹8,250 से अधिक का मुआवजा व कानूनी खर्च देने का आदेश दिया है [मनोज कुमार बनाम जोमैटो प्राइवेट लिमिटेड]।

उपभोक्ता आयोग की प्रमुख टिप्पणियां

1. ‘फोन न लगने’ का बहाना खारिज जोमैटो के इस दावे पर अविश्वास जताते हुए कि ग्राहक का फोन नहीं लग रहा था, आयोग ने रेखांकित किया:

  • जब उसी समय और उसी पते पर तीन अन्य ऑर्डर सफलतापूर्वक डिलीवर किए गए, तो यह तर्क गले नहीं उतरता कि केवल इन दो ऑर्डर्स के समय ग्राहक का संपर्क नंबर उपलब्ध नहीं था।
  • ग्राहक एक ‘जोमैटो गोल्ड’ (Zomato Gold) सदस्य था, जो प्रीमियम सेवाओं का हकदार था, लेकिन कंपनी उचित सेवा प्रदान करने में पूरी तरह विफल रही।

2. सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार कंपनी द्वारा एकतरफा ऑर्डर रद्द करना, रिफंड देने से मना करना और कानूनी नोटिस का जवाब तक न देना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में घोर लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार का स्पष्ट उदाहरण है।

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मामले की पृष्ठभूमि और विवाद (अगस्त 2024)

  • जन्मदिन के लिए 5 ऑर्डर: शिकायतकर्ता मनोज कुमार ने अगस्त 2024 में अपनी भतीजी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में जोमैटो से 5 अलग-अलग फूड ऑर्डर किए थे।
  • दो ऑर्डर रद्द और रिफंड से इनकार: 3 ऑर्डर डिलीवर हो गए, लेकिन ₹146.73 और ₹103.88 (कुल ₹250.61) मूल्य के दो ऑर्डर जोमैटो ने यह कहकर रद्द कर दिए कि ग्राहक से संपर्क नहीं हो पा रहा है। कंपनी ने कैंसिलेशन चार्ज का हवाला देकर रिफंड देने से भी साफ इनकार कर दिया।
  • उपभोक्ता फोरम का रुख: पीड़ित ग्राहक ने पहले लीगल नोटिस भेजा और कोई जवाब न मिलने पर उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई।

एकतरफा कार्यवाही (Ex-Parte Proceedings)

  • जोमैटो का गैर-हाजिर रहना: नोटिस तामील होने के बावजूद जोमैटो नियत समयसीमा के भीतर आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ और न ही अपना कोई लिखित जवाब दाखिल किया।
  • अखंडित साक्ष्य: 10 जून 2025 को आयोग ने जोमैटो के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही करने का फैसला किया। शिकायतकर्ता ने हलफनामे के साथ चैट ट्रांसक्रिप्ट, ऑर्डर रसीदें और लीगल नोटिस के पुख्ता सबूत पेश किए, जिनका जोमैटो की ओर से कोई खंडन नहीं किया गया।

उपभोक्ता आयोग का अंतिम आदेश और मुआवजे का विवरण

उपभोक्ता आयोग ने जोमैटो को 45 दिनों के भीतर निम्नलिखित भुगतान करने का निर्देश दिया:

  • ₹250.61: मूल ऑर्डर राशि (ऑर्डर की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 6% वार्षिक ब्याज के साथ)।
  • ₹5,000: मानसिक संताप और असुविधा के लिए मुआवजा (Compensation for Mental Distress)。
  • ₹3,000: मुकदमा खर्च (Litigation Expenses)।
  • कुल देय राशि: ₹8,250.61 (प्लस 6% वार्षिक ब्याज मूल राशि पर)।

Consumer Disputes:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित आयोगजिला उपभोक्ता आयोग, दिल्ली
पीट/कोरमअध्यक्ष संजय कुमार, सदस्य निपुर चंदना एवं राजेश
केस का नामManoj Kumar v Zomato Private Limited
कुल मुआवजा राशि₹8,250.61 (मूल रिफंड + ब्याज + ₹5,000 मानसिक पीड़ा + ₹3,000 मुकदमे का खर्च)
अनुपालन अवधिआदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर
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