Tuesday, October 27, 2026
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Skill Or Chance: ताश फेंटने के बाद पत्तों का निकलना पूरी तरह संयोग है, इसमें कौन सा हुनर?; क्या ‘अंदर-बाहर’ कौशल का खेल है या जुआ, यहां जानें

हाईकोर्ट की मुख्य व कड़ी टिप्पणियां

  • शफलिंग के बाद केवल भाग्य का खेल: न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने कहा:“ताश के पत्तों के शफल (फेंटे जाने) के बाद कौन सा कार्ड किस तरफ (अंदर या बाहर) गिरेगा, यह तय करने में किसी भी प्रकार का कौशल शामिल नहीं होता। जब परिणाम तयशुदा नंबर या ताश के पत्ते के ऊपर-नीचे आने पर निर्भर करता है, तो इसमें खिलाड़ी की किसी चतुराई या हुनर की भूमिका नहीं होती।”
  • सामाजिक प्रभाव पर मौखिक टिप्पणी: याचिकाकर्ता के वकील द्वारा घुड़दौड़ (Horse Racing) से तुलना करने पर न्यायाधीश ने कहा:“क्या आप जानते हैं कि इस खेल (अंदर-बाहर) की वजह से कितने परिवारों की जिंदगी बर्बाद हो गई है? घुड़दौड़ भी बंद कर दी गई है। अंदर-बाहर पूरी तरह से भाग्य का खेल (Game of Chance) है।”
  • पुराने फैसले से असहमति: अदालत ने माना कि 1977 के E Eranna फैसले में अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा था कि अंदर-बाहर जुआ है, लेकिन बाद के फैसलों में उसे गलत तरीके से ‘गेम ऑफ स्किल’ का कानूनी सिद्धांत मान लिया गया।

बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने पारंपरिक ताश के खेल ‘अंदर-बाहर’ (Andar Bahar) के कानूनी वर्गीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा गठित की जाने वाली बड़ी पीठ (Larger Bench) को संदर्भित कर दिया है।

न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि एक बार ताश की गड्डी फेंटे (Shuffle) जाने के बाद अगला पत्ता कौन सा निकलेगा, यह पूरी तरह भाग्य या संयोग (Chance) पर निर्भर करता है, इसमें खिलाड़ी के किसी बौद्धिक हुनर या कौशल की कोई भूमिका नहीं होती। अदालत ने 1977 के उस पुराने फैसले पर असहमति और गंभीर संदेह व्यक्त किया है, जिसके आधार पर इस खेल को लंबे समय से कौशल का खेल (Game of Skill) माना जाता रहा है।

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उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां

1. ताश के पत्तों के प्रवाह में कोई कौशल शामिल नहीं अदालत ने खेल की प्रकृति का विश्लेषण करते हुए कहा: “ताश की गड्डी फेंटने के बाद खेल शुरू होने पर कौन सा पत्ता डेक से बाहर निकलेगा, इसे निर्धारित करने में किसी भी प्रकार का कोई कौशल शामिल नहीं होता है। पत्ते का पूर्व-निर्धारित संख्या के बराबर या ऊपर-नीचे आना किसी हुनर पर निर्भर नहीं करता। इसलिए अंदर-बाहर पूरी तरह से संयोग का खेल (Game of Chance) है।”

2. सामाजिक प्रभाव और परिवारों की बर्बादी पर चिंता सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि यह कौशल का खेल है और इसकी तुलना घुड़दौड़ (Horse Racing) के दांव से की, तो अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा: “अंदर-बाहर कौशल का खेल है? क्या आपने कभी इसे खेला है? अंदर-बाहर में कौन सा कौशल होता है? अंदर-बाहर खेलकर हर कोई पैसा नहीं जीतता, इसीलिए यह केवल किस्मत/संयोग है। क्या आप जानते हैं कि इस खेल से कितने परिवारों की जिंदगियां बर्बाद हो गई हैं? घुड़दौड़ पर भी प्रतिबंध लग चुका है। अंदर-बाहर पूरी तरह भाग्य का खेल है।”

3. 1977 के ‘ई. एरन्ना’ फैसले से असहमति अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के 1977 के फैसले (ई. एरन्ना बनाम कर्नाटक राज्य) से असहमति जताते हुए कहा कि उस मामले में अभियोजन द्वारा उचित साक्ष्य न पेश किए जाने के आधार पर बरी किया गया था। उस पुराने फैसले का हवाला देकर ‘अंदर-बाहर’ को लगातार ‘गेम ऑफ स्किल’ करार देना विधिक रूप से सही नहीं है और इस पर बड़ी पीठ द्वारा पुनर्विचार आवश्यक है।

मामले की पृष्ठभूमि और पुलिस छापेमारी (2020)

  • छापेमारी और जब्ती: मंगलुरु तालुक के तोक्कुरु गांव स्थित ‘माउंट विला’ नामक घर में 15-16 अगस्त 2020 की आधी रात को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारा था। वहां 10-20 लोग पैसे दांव पर लगाकर अंदर-बाहर खेल रहे थे।
  • बरामदगी: पुलिस ने मौके से ₹63,815 नकद, 16 मोबाइल फोन, ताश के पत्ते और 7 वाहन जब्त किए थे।
  • कर्नाटक पुलिस अधिनियम के तहत केस: आरोपियों के खिलाफ कर्नाटक पुलिस अधिनियम (Karnataka Police Act) की धारा 79 और 80 (अवैध जुआ घर चलाना और जुआ खेलना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

  • केस रद्द करने की मांग: आरोपियों ने हाईकोर्ट में आपराधिक कार्यवाही को रद्द (Quash) करने की याचिका दायर की।
  • कौशल के खेल का दावा: याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि ‘अंदर-बाहर’ कौशल का खेल (Game of Skill) है, इसलिए यह कर्नाटक पुलिस अधिनियम के तहत गैरकानूनी जुए के दायरे में नहीं आता। उन्होंने दलील दी कि महज पैसा दांव पर लगाने से कोई कौशल का खेल संयोग के खेल में तब्दील नहीं हो जाता।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश: बड़ी बेंच को संदर्भ

न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने माना कि चूंकि उनका दृष्टिकोण पूर्ववर्ती पीठों के निर्णयों से भिन्न है, इसलिए कानून में एकरूपता और स्पष्टता स्थापित करने के लिए इस विधिक प्रश्न का निपटारा बड़ी पीठ द्वारा किया जाना अनिवार्य है: बड़ी बेंच के विचारार्थ प्रश्न: क्या ‘अंदर-बाहर’ ताश का खेल विधिक रूप से ‘कौशल का खेल’ (Game of Skill) है अथवा यह विशुद्ध रूप से सट्टेबाजी और भाग्य पर आधारित ‘संयोग का खेल’ (Game of Chance) है?

रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह उचित बड़ी पीठ के गठन हेतु पत्रावली को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करे।

विधिक प्रतिनिधित्व

  • याचिकाकर्ताओं (अभियुक्तों) की ओर से: अधिवक्ता एम.आर. बालकृष्ण।
  • पीठ: न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज।

Skill Or Chance: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतकर्नाटक उच्च न्यायालय
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज (Justice Suraj Govindaraj)
मुख्य मुद्दाक्या ‘अंदर-बाहर’ गेम ऑफ स्किल है या गेम ऑफ चांस?
पुराना निर्णय/जीरहE Eranna v. State of Karnataka (1977) (जिसमें अभियोजन के विफल होने पर आरोपियों को बरी किया गया था)
हाईकोर्ट का रुखन्यायमूर्ति ने इसे ‘गेम ऑफ चांस’ माना और मामला चीफ जस्टिस को बड़ी पीठ के गठन हेतु रेफर किया।
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