सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां
- निर्णय टालने पर नाराजगी: ओडिशा सरकार के वकील ने जब एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) की अस्वस्थता का हवाला देते हुए 4 सप्ताह का समय मांगा, तो पीठ ने इसे खारिज कर दिया। जस्टिस मनोज मिश्रा ने कहा:“आप निर्णय लेने से बच नहीं सकते। अर्जी को स्वीकार करें या खारिज करें, लेकिन फैसला लीजिए। आप दो साल से इसे लटका रहे हैं। अगर आप इसे खारिज करना चाहते हैं तो खारिज कीजिए, हम अपने स्तर पर विचार करेंगे।”
- अधिकारियों को समन करने की चेतावनी: जब राज्य के वकील ने कहा कि उनके पास कोई स्पष्ट निर्देश नहीं हैं, तो कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई (17 सितंबर) तक यदि निर्णय नहीं लिया गया, तो राज्य के जिम्मेदार सचिव को समन भेजा जाएगा।
दारा सिंह का पक्ष और रिहाई की मांग का आधार
- 25 वर्ष से अधिक की कैद: दारा सिंह के वकील विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन ने दलील दी कि दारा सिंह 60 वर्ष से अधिक उम्र के हो चुके हैं और जेल में 25 साल से अधिक का समय (बिना पैरोल) बिता चुके हैं।
- सुधारवादी सिद्धांत (Reformative Theory): याचिका में दावा किया गया है कि यह अपराध उनकी युवावस्था में “आवेश” में हुआ था और अब वे अपने कृत्यों पर पश्चाताप कर रहे हैं तथा पूरी तरह से सुधर चुके हैं।
- समानता का तर्क: याचिका में राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों को समय से पूर्व रिहा किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले का हवाला भी दिया गया है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 1999 के बहुचर्चित ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो मासूम बेटों की हत्या के मामले में उम्रकैद काट रहे दोषी रवींद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई (Premature Release/Remission) याचिका पर फैसला लेने में देरी को लेकर ओडिशा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए ओडिशा सरकार द्वारा एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) के अस्वस्थ होने का हवाला देकर 4 सप्ताह का समय मांगने पर गहरा असंतोष व्यक्त किया और मामले को 17 सितंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध कर दिया। शीर्ष अदालत ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य का ‘सेंटेंस रिव्यू बोर्ड’ (Sentence Review Board) या तो रिहाई अर्जी को स्वीकार करे या खारिज करे, लेकिन निर्णय तुरंत ले; अन्यथा सरकार के गृह सचिव या संबंधित शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया जाएगा [रवींद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह बनाम ओडिशा राज्य]।
सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख व तीखी टिप्पणियां
1. दो साल से फैसला टालने पर फटकार राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताते हुए न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा ने कहा: “आप (राज्य प्राधिकारी) निर्णय लेने से बच नहीं सकते। आपको किसी एक तरफ फैसला करना ही होगा। आप पिछले 2 साल से फैसले को लटकाए हुए हैं। अर्जी को स्वीकार करना है तो स्वीकार करें, खारिज करना है तो खारिज करें, लेकिन कोई निर्णय लें और अदालत को सूचित करें। हम इस मामले को यूं ही अधर में लटके रहने की अनुमति नहीं दे सकते।”
2. अधिकारियों को तलब करने की अंतिम चेतावनी जब राज्य के वकील ने कहा कि उनके पास इस संबंध में कोई निर्देश (Instructions) नहीं हैं, तो पीठ ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी: “हम सुनवाई आगे नहीं टाल रहे हैं। निर्देश प्राप्त करें और आदेश पारित करें। यदि 17 सितंबर तक निर्णय नहीं लिया गया, तो हम आपके सचिव (Secretary) या जो भी प्रभारी अधिकारी हैं, उन्हें सीधे अदालत में तलब करेंगे।”
मामले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1999 का ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड)
- घटना का विवरण: जनवरी 1999 में ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में भीड़ ने ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों—फिलिप (10 वर्ष) और टिमोथी (6 वर्ष)—को उस समय स्टेशन वैगन (गाड़ी) में जिंदा जला दिया था, जब वे रात में सो रहे थे।
- सजा का इतिहास:
- 2003 (ट्रायल कोर्ट): सीबीआई की विशेष अदालत ने दारा सिंह को मृत्युदंड (Death Sentence) सुनाया था।
- 2005 (उड़ीसा हाईकोर्ट): हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) में बदल दिया।
- 2011 (सुप्रीम कोर्ट): सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए दारा सिंह की उम्रकैद की सजा की पुष्टि की थी।
दारा सिंह द्वारा रिहाई के पक्ष में दिए गए तर्क
अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दायर रिट याचिका में दारा सिंह (उम्र 60 वर्ष से अधिक) ने निम्नलिखित आधारों पर समयपूर्व रिहाई की मांग की है:
- 25 वर्ष से अधिक की जेल: दारा सिंह बिना पैरोल के 25 साल से अधिक की वास्तविक जेल अवधि (Incarceration) पूरी कर चुका है।
- राज्य की रिमिशन नीति: ओडिशा सरकार की नीति के अनुसार, जिन दोषियों की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली गई है, वे 25 वर्ष की जेल काटने के बाद रिमिशन के पात्र हो जाते हैं।
- पश्चाताप और सुधार: याचिका में कहा गया कि यह अपराध युवावस्था के जोश और अत्यधिक भावावेश में घटित हुआ था। अब वह अपने कृत्यों पर गहरा पश्चाताप करता है और पूरी तरह सुधर चुका है।
- राजीव गांधी हत्याकांड के फैसले की नजीर: याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2022 के उस फैसले का हवाला दिया गया है जिसके तहत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों को लंबी कैद और सुधरे आचरण के आधार पर समयपूर्व रिहा किया गया था।
17 सितंबर 2026 तक अंतिम समयसीमा
पीठ ने याद दिलाया कि 19 अगस्त 2026 के आदेश में सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को अंतिम अवसर दिया गया था। अदालत ने निर्देश दिया कि राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General) या संबंधित अधिकारी 17 सितंबर 2026 को रिमिशन अर्जी पर लिए गए ठोस विधिक निर्णय के साथ अदालत में उपस्थित रहें।
विधिक प्रतिनिधित्व
- याचिकाकर्ता (दारा सिंह) की ओर से: अधिवक्ता हरिशंकर जैन एवं अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन।
- ओडिशा राज्य की ओर से: राज्य के पैनल अधिवक्ता।
Dara Singh’s Plea: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठासीन पीठ | जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई |
| याचिकाकर्ता | रवींद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह (Dara Singh) |
| घटना की पृष्ठभूमि | जनवरी 1999 में ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या |
| सजा का इतिहास | 2003 में फांसी की सजा -> 2005 में ओडिशा HC द्वारा उम्रकैद में बदलाव -> 2011 में SC से पुष्टि |
| सुप्रीम कोर्ट का आदेश | राज्य सरकार 17 सितंबर 2026 तक रिहाई अर्जी पर अंतिम निर्णय से अवगत कराए। |

