Tuesday, October 27, 2026
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Drug Racket: पंजाब की जेलों में जाने के बाद कैदियों में 4 से 5 गुना बढ़ रही है नशे की लत; 44% कैदी ड्रग्स पर निर्भर, केंद्र व PGIMER से मांगा मेडिकल प्रोटोकॉल

अदालत के मुख्य निर्देश

  1. अनुच्छेद 21 (Right to Life) का हवाला: पीठ ने कहा कि जब तक कैदियों की नशा मुक्ति के लिए कोई वैज्ञानिक रणनीति लागू नहीं की जाएगी, तब तक वे संविधान द्वारा प्रदत्त ‘जीवन के अधिकार’ का पूर्ण उपयोग नहीं कर पाएंगे।
  2. पीजीआईएमईआर (PGIMER) और केंद्र सरकार को निर्देश:
    • PGIMER चंडीगढ़ को निर्देश दिया गया है कि वह नशा पीड़ित कैदियों के इलाज और उन्हें सामान्य स्थिति में लाने के लिए एक स्पष्ट मेडिकल प्रोटोकॉल तैयार कर कोर्ट के सामने पेश करे।
  • केंद्र सरकार और पंजाब सरकार से नशा मुक्ति कार्यक्रमों, परामर्शदाताओं (Counsellors) की उपलब्धता और जेल नियमों के कार्यान्वयन पर जवाब मांगा गया है।

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब की जेलों में बंद कैदियों के बीच तेजी से फैलती नशे की लत (Drug Dependency) को लेकर गंभीर चिंता और क्षोभ व्यक्त किया है।

मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि कैदियों की नशे की लत को खत्म करने की कोई ठोस और वैज्ञानिक रणनीति नहीं बनाई गई, तो वे कभी भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अपने जीवन के अधिकार (Right to Life) का पूरा उपयोग नहीं कर पाएंगे [कोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन बनाम पंजाब राज्य एवं अन्य]। अदालत ने आधिकारिक आंकड़ों का संज्ञान लेते हुए कहा कि पंजाब की जेलों में प्रवेश करने के बाद नशे पर निर्भर होने वाले कैदियों की संख्या में 4 से 5 गुना की चौंकाने वाली वृद्धि हुई है।

चौंकाने वाले आंकड़े: जेल में प्रवेश के बाद 83% कैदियों का OOAT में पंजीकरण

अदालत में पेश सरकारी आंकड़ों और एमिकस क्यूरी की दलीलों से निम्नलिखित चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

  • कुल कैदियों में से 44% ड्रग्स पर निर्भर: पंजाब की जेलों में बंद कुल 35,449 कैदियों में से 15,768 कैदी (44%) सक्रिय रूप से नशे के आदी (Drug-Dependent) हैं।
  • जेल जाने के बाद बढ़ी लत: जेल में प्रवेश करते समय केवल 2,540 कैदी ‘आउट पेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट’ (OOAT क्लीनिक) में पंजीकृत थे। लेकिन जेल में रहने के दौरान यह संख्या बढ़कर 15,768 हो गई। यानी करीब 83% कैदियों का पंजीकरण जेल में जाने के बाद हुआ।
  • मानसा जेल का खौफनाक अनुपात: मानसा सत्र प्रभाग के प्रशासनिक न्यायाधीश (हाईकोर्ट जज) की निरीक्षण रिपोर्ट में पाया गया कि मानसा जेल के कुल 767 कैदियों में से 530 कैदी (लगभग 69%) OOAT क्लीनिक में उपचाराधीन हैं और उन्हें ब्यूप्रेनॉर्फिन-नालोक्सोन (Buprenorphine + Naloxone) की गोलियां दी जा रही हैं।

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उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां

1. जेलों में गंभीर विफलता का संकेत

आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए खंडपीठ ने कहा: “यह डेटा दर्शाता है कि केवल वही लोग ड्रग-डिपेंडेंट नहीं हैं जो जेल आ रहे हैं, बल्कि जेल में प्रवेश के बाद नशे की लत के शिकार होने वाले कैदियों की संख्या में 4 से 5 गुना की वृद्धि हुई है। यह पंजाब की जेलों में व्याप्त एक अत्यंत गंभीर विकृति और विफलता को इंगित करता है।”

2. संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का दायित्व

अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा: “हम रेखांकित करते हैं कि यह अत्यंत गंभीर मुद्दा है। हम उम्मीद करते हैं कि प्राधिकारी भारत के संविधान के तहत कैदियों के जीवन के अधिकार की रक्षा करने और उनकी मदद करने के अपने संवैधानिक दायित्वों के प्रति सजग रहेंगे।”

पंजाब बनाम हरियाणा: जेलों में स्थिति की तुलना

सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार द्वारा पेश हलफनामे का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने दोनों राज्यों की स्थिति में अंतर नोट किया:

राज्यकुल कैदीड्रग-डिपेंडेंट कैदीप्रतिशत / सुधार स्थिति
पंजाब35,44915,76844% (जेल में जाने के बाद संख्या 4-5 गुना बढ़ी)
हरियाणा27,1111,2954.7% (इलाज के बाद मरीजों में 534 की कमी दर्ज)

हाईकोर्ट के कड़े निर्देश

  1. पंजाब सरकार को आदेश: अदालत ने पंजाब सरकार को जेल नियमों के तहत नशा पीड़ितों के लिए एक ठोस व वैज्ञानिक नशामुक्ति कार्यक्रम (Scientific De-addiction Programme) लागू करने और जेलों में प्रशिक्षित काउंसलरों की उपलब्धता पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
  2. केंद्र सरकार से कार्ययोजना तलब: केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया कि वह कैदियों को सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए सुझाई गई कार्यप्रणाली (Methodology) रिकॉर्ड पर रखे।
  3. PGIMER चंडीगढ़ को मेडिकल प्रोटोकॉल का निर्देश: अदालत ने पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ (PGIMER) को निर्देश दिया कि वह ऐसे नशा-निर्भर कैदियों के इलाज और पुनर्वास के लिए एक स्पष्ट और विस्तृत मेडिकल प्रोटोकॉल (Medical Protocol) तैयार कर अदालत को सौंपे।

मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को तय की गई है।

विधिक प्रतिनिधित्व

  • न्यायालय द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी: अधिवक्ता तनु बेदी, साथ में अधिवक्ता अक्षत शर्मा और गौरव मिश्रा।
  • पंजाब राज्य की ओर से: वरिष्ठ उप महाधिवक्ता (Senior DAG) सलिल सभरवाल।
  • केंद्र सरकार की ओर से: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) सत्य पाल जैन और केंद्र सरकार के वकील प्रज्वल चौहान।
  • हरियाणा राज्य की ओर से: अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) दीपक बालियान।
  • PGIMER चंडीगढ़ की ओर से: अधिवक्ता अवनीत अवस्थी।
  • केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की ओर से: अधिवक्ता अभिनव सूद, एकक्षरा महाजन मंधार, नितेश झझरिया और अर्श बीर।

Drug Racket: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतपंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय (P&H High Court)
पीठासीन पीठचीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर
न्यायालय मित्र (Amicus Curiae)अधिवक्ता तनू बेदी (Tanu Bedi)
मामले की पृष्ठभूमिमनसा सत्र मंडल के प्रशासनिक जज की रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान मामला
मुख्य मुद्दापंजाब की जेलों में बंद 44% कैदी नशा पीड़ित; 83% को जेल में प्रवेश के बाद लत लगी या OOAT में रजिस्ट्रेशन हुआ।

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