Wednesday, September 16, 2026
HomeLaworder HindiMarital Cruelty: व्यवसाय स्थापित करने के नाम पर मांगी गई रकम भी...

Marital Cruelty: व्यवसाय स्थापित करने के नाम पर मांगी गई रकम भी दहेज मांग की श्रेणी में; दिल्ली हाईकोर्ट ने पति और जेठ की सजा बरकरार रखी

हाईकोर्ट के मुख्य कानूनी निष्कर्ष

  • ‘बिजनेस पर्पस’ भी दहेज मांग की श्रेणी में:अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रताड़ना के पीछे का उद्देश्य चाहे जो भी बताया गया हो, यदि वह वैवाहिक रिश्ते से जुड़ा है, तो वह दहेज ही माना जाएगा:“गवाह (PW-2) द्वारा मांग को ‘बिजनेस सेटअप’ से जुड़ा बताना इसे दहेज की परिभाषा से बाहर नहीं करता। वैवाहिक संबंध से जुड़ी मांग केवल इसलिए दहेज की मांग होने से नहीं रुकती क्योंकि उसका उद्देश्य ‘व्यक्तिगत उपयोग’ के बजाय ‘व्यापार’ बताया गया है।”दिल्ली हाईकोर्ट
  • ‘समझौता’ नहीं, केवल ‘मांग’ पर्याप्त:पीठ ने ट्रायल कोर्ट के इस सिद्धांत को दोहराया कि धारा 304-बी IPC के तहत दहेज देने का कोई तय समझौता साबित करना जरूरी नहीं है, सिर्फ मांग का अस्तित्व ही कानून की नजर में अपराध के लिए पर्याप्त है।
  • साक्ष्य अधिनियम की धारा 113-बी की उपधारणा (Presumption under Sec 113-B):शादी के साढ़े चार महीने के भीतर हुई मौत और प्रताड़ना के समय में निकटता (Proximity Test – Soon before death) के कारण कानूनी उपधारणा लागू होती है। अभियुक्त पक्ष इस उपधारणा को खारिज करने में विफल रहा।

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304-B (दहेज हत्या), धारा 498-A (वैवाहिक क्रूरता) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113-B के तहत कानूनी उपधारणा (Statutory Presumption) पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक व्यवस्था दी है।

न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की एकल पीठ ने 22 वर्षों से लंबित अपील को खारिज करते हुए पति नवीन कुमार वर्मा (10 वर्ष का सश्रम कारावास) और जेठ अजय कुमार वर्मा (3 वर्ष का सश्रम कारावास) की दोषसिद्धि व सजा को पूरी तरह बरकरार रखा तथा दोनों को शेष सजा भुगतने हेतु तत्काल आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पैसों की कोई मांग वैवाहिक रिश्ते से जुड़ी है, तो केवल इस आधार पर वह दहेज की परिभाषा से बाहर नहीं हो जाती कि उसे ‘निजी उपयोग’ के बजाय ‘व्यापार/बिजनेस शुरू करने’ के उद्देश्य से मांगा गया था। इसके अतिरिक्त, अदालत ने दोहराया कि धारा 304-B IPC को आकर्षित करने के लिए पक्षों के बीच दहेज देने का कोई पूर्व समझौता (Concluded Agreement) साबित करने की आवश्यकता नहीं है; उत्पीड़न के साथ की गई मांग (Mere Demand) ही अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां

1. ‘व्यापार’ के नाम पर मांगी गई रकम भी दहेज के दायरे में गवाह के बयान और दहेज की विधिक परिभाषा का विश्लेषण करते हुए न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव ने कहा: “यह परिस्थिति कि पीडब्लू-2 ने अपनी गवाही में मांग को व्यवसाय स्थापित करने से जुड़ा हुआ बताया, इसे दहेज (Dowry) की परिभाषा से बाहर नहीं करती है। वैवाहिक संबंध से जुड़ी कोई भी मांग केवल इसलिए दहेज मांग बनने से समाप्त नहीं हो जाती क्योंकि उसका उद्देश्य ‘व्यक्तिगत उपयोग’ के बजाय ‘व्यवसाय’ बताया गया है। ट्रायल कोर्ट का यह निष्कर्ष कि धारा 304-B IPC के तहत दहेज देने के किसी तय ‘समझौते’ (Concluded Agreement) को साबित करने की आवश्यकता नहीं है और केवल मांग ही पर्याप्त है, कानून का सही प्रतिपादन करता है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।”

2. संबंधी गवाह (Related Witnesses) स्वतः ‘हितबद्ध’ (Interested) नहीं होते

  • अदालत ने अभियुक्तों की इस दलील को खारिज कर दिया कि गवाह केवल मृतका के परिजन थे:
    • वैवाहिक घर की चारदीवारी के भीतर होने वाली क्रूरता के मामलों में परिवार के सदस्य ही स्वाभाविक गवाह (Natural Witnesses) होते हैं, जिनसे पीड़िता अपनी व्यथा साझा करती है।
    • केवल रिश्तेदार होने के आधार पर किसी गवाह की गवाही को ‘पक्षपातपूर्ण’ या अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता।

3. ‘मृत्यु से ठीक पहले’ (Soon Before Death) और धारा 113-B की उपधारणा

  • विवाह के मात्र साढ़े चार महीने के भीतर और कथित उत्पीड़न शुरू होने के तीन महीने के भीतर मृत्यु होने के तथ्य ने ‘प्रॉक्सिमिटी टेस्ट’ (Proximity Test) को पूरी तरह संतुष्ट किया।
  • इसके परिणामस्वरूप साक्ष्य अधिनियम की धारा 113-B के तहत दहेज हत्या की वैधानिक उपधारणा स्वतः लागू हो गई, जिसका खंडन (Rebut) करने में अभियुक्त पक्ष पूरी तरह विफल रहा।

Also Read; Vibration Of Train: रेलवे ट्रैक पर गुजरती ट्रेनों के कंपन से वजन में 5 ग्राम की त्रुटि संभव; 105 ग्राम चरस बरामदगी मामले में अदालत की जिरह को पढ़ डालें

मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (तुगलकाबाद दहेज हत्या कांड, 2003)

  • विवाह व घटना: मृतका का विवाह 29 नवंबर 2002 को अपीलकर्ता नवीन कुमार वर्मा के साथ हुआ था। विवाह के महज साढ़े चार महीने बाद, 10 अप्रैल 2003 को तुगलकाबाद (नई दिल्ली) स्थित ससुराल में उसका शव पंखे से लटकता हुआ पाया गया।
  • दहेज मांग व प्रताड़ना के आरोप: मृतका के पिता ने एसडीएम के समक्ष बयान दर्ज कराया कि पति नवीन और जेठ अजय ₹50,000 के दहेज की मांग को लेकर मृतका के साथ लगातार मारपीट और मानसिक प्रताड़ना करते थे।
  • एफआईआर व ट्रायल कोर्ट का फैसला:
    • पुलिस ने आईपीसी की धारा 498-A/304-B/34 के तहत एफआईआर दर्ज की।
    • ट्रायल कोर्ट ने पति नवीन को 10 वर्ष और जेठ अजय को 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, जबकि सास को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था।
  • अपील में अभियुक्तों के तर्क: अभियुक्तों ने तर्क दिया कि ₹50,000 की मांग बिजनेस के लिए थी न कि दहेज के लिए, और शादी कराने वाले मध्यस्थ ने गवाही दी थी कि दंपत्ति खुश था।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

  1. अपील खारिज व दोषसिद्धि बरकरार: उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि और कारावास की सजा को पूरी तरह सही ठहराते हुए अपील को खारिज कर दिया।
  2. तत्काल सरेंडर का निर्देश: अदालत ने दोनों अभियुक्तों को शेष बची सजा काटने के लिए तत्काल ट्रायल कोर्ट/जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण (Surrender) करने का आदेश दिया (CrPC की धारा 428 के तहत पूर्व में काटी गई हिरासत अवधि के समायोजन का लाभ देते हुए)।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: नवीन कुमार वर्मा एवं अन्य बनाम राज्य [आपराधिक अपील – 2003 तुगलकाबाद दहेज मृत्यु वाद]
  • प्रासंगिक कानून: भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 304-B (दहेज मृत्यु) एवं धारा 498-A (क्रूरता); भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 113-B (दहेज हत्या की कानूनी उपधारणा); दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 2
  • पीठ: न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव (दिल्ली उच्च न्यायालय)

Marital Cruelty: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति विमल कुमार यादव (Justice Vimal Kumar Yadav)
अपीलकर्तानवीन कुमार वर्मा (पति) और अजय कुमार वर्मा (जेठ)
घटना का समयशादी 29 नवंबर 2002; मृत्यु 10 अप्रैल 2003 (विवाह के 4.5 महीने भीतर)
संबंधित धाराएंIPC धारा 498-A (क्रूरता), 304-B (दहेज हत्या) और 34
अदालत का निर्णयदोषसिद्धि और सजा (10 वर्ष व 3 वर्ष का कठोर कारावास) बरकरार; तत्काल आत्मसमर्पण का आदेश।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
clear sky
31 ° C
31 °
31 °
74 %
3.6kmh
10 %
Wed
35 °
Thu
34 °
Fri
35 °
Sat
35 °
Sun
35 °

Recent Comments