Wednesday, November 4, 2026
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Threat To Journalist: महिला अधिकारों पर इस्लामिक स्कॉलर कंथापुरम की टिप्पणी…धमकियां झेल रही पत्रकार को केरल हाईकोर्ट ने दी पुलिस सुरक्षा

हाईकोर्ट के मुख्य निर्देश

  • तत्काल सुरक्षा और कानून-व्यवस्था: हाईकोर्ट ने अर्नाकुलम साउथ SHO को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के घर के आसपास किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी प्रकार का व्यवधान या बाधा उत्पन्न न की जाए और कानून-व्यवस्था को बनाए रखा जाए।
  • प्रेस की स्वतंत्रता का संरक्षण: याचिका में रेखांकित किया गया कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से पत्रकारिता का हिस्सा था, जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रेस की स्वतंत्रता के दायरे में आता है।

कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने प्रेस की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(a)), पत्रकारों की शारीरिक सुरक्षा और ऑनलाइन उत्पीड़न/डॉक्सिंग (Doxxing) से जुड़े एक गंभीर मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया है।

न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस की एकल पीठ ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए एर्नाकुलम साउथ पुलिस स्टेशन के एसएचओ (SHO) और कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि याचिका के अंतिम निस्तारण तक पत्रकार के निवास के आसपास कानून-व्यवस्था की स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित और सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने वरिष्ठ टीवी पत्रकार अपर्णा कुरूप को लगातार मिल रही जान से मारने की धमकियों, दुष्कर्म की चेतावनियों और साइबर हमलों के मद्देनजर एर्नाकुलम पुलिस को उन्हें और उनके आवासीय परिसर को 24 घंटे पर्याप्त पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है।

उच्च न्यायालय के प्रमुख निर्देश

1. पत्रकार और उनके आवास को तत्काल सुरक्षा

अदालत ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए निर्देश दिया: “एर्नाकुलम साउथ पुलिस स्टेशन के एसएचओ को निर्देश दिया जाता है कि वे याचिकाकर्ता (अपर्णा कुरूप) के जीवन और उनके आवासीय अपार्टमेंट को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा (Adequate Protection) मुहैया कराएं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि इस याचिका के निस्तारण तक याचिकाकर्ता के आवास के आसपास बिना किसी बाधा या हस्तक्षेप के शांति और कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह बनी रहे।”

2. सरकार और पुलिस से रिपोर्ट तलब

  • उच्च न्यायालय ने मामले में राज्य सरकार और कोच्चि पुलिस से खतरे के आकलन (Threat Assessment) पर विस्तृत निर्देश मांगे हैं।
  • मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि

  • टीवी डिबेट का संदर्भ: बिग टीवी (Big TV) चैनल की सीनियर कोऑर्डिनेटिंग एडिटर अपर्णा कुरूप ने ‘बिग डायलॉग’ (Big Dialogue) नामक कार्यक्रम में सुन्नी विद्वान कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार द्वारा महिलाओं के सार्वजनिक जीवन में शामिल होने और उनके अधिकारों को लेकर दिए गए बयानों पर एक टीवी परिचर्चा का संचालन किया था।
  • संगठित साइबर हमले और डॉक्सिंग:
    • कार्यक्रम के प्रसारण के बाद पत्रकार को सोशल मीडिया पर अत्यधिक अश्लील गालियां, सामूहिक बलात्कार और हत्या की धमकियां मिलने लगीं।
    • उपद्रवियों ने पत्रकार का आवासीय पता, व्यक्तिगत तस्वीरें और परिवार का विवरण सार्वजनिक मंचों (Social Media) पर लीक (Doxx) कर दिया।
  • कट्टरपंथी संगठनों द्वारा हमले की आशंका:
    • याचिका में उल्लेख किया गया कि एसडीपीआई (SDPI) सहित कुछ कट्टरपंथी संगठनों के कैडर सोशल मीडिया पर उनके घर के सामने विरोध प्रदर्शन और शारीरिक हमले के लिए भीड़ जुटा रहे हैं।
    • विशेष रूप से रात के समय शारीरिक हिंसा की पुख्ता और वास्तविक आशंका (Credible Apprehension) बनी हुई है।
  • पुलिस में शिकायत के बाद भी धमकियां जारी: स्थानीय साइबर पुलिस और कमिश्नर के समक्ष औपचारिक आपराधिक शिकायत दर्ज कराने के बावजूद जब धमकियां नहीं रुकीं, तो पत्रकार ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई प्रमुख राहतें

  1. सुरक्षा का अधिकार: पत्रकार और उनके नाबालिग बेटे के जीवन, संपत्ति और आवास को निरंतर पुलिस सुरक्षा दी जाए।
  2. थ्रेट असेसमेंट: कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर को खतरे का विधिवत आकलन करने और आवश्यक एहतियाती कदम उठाने का निर्देश।
  3. प्रभावी जांच: दर्ज प्राथमिकी के आधार पर धमकियां देने वाले और व्यक्तिगत विवरण लीक करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ निष्पक्ष व त्वरित जांच सुनिश्चित की जाए।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: अपर्णा कुरूप बनाम केरल राज्य एवं अन्य [रिट याचिका (आपराधिक) – पुलिस सुरक्षा मांग]
  • प्रासंगिक कानून: भारत का संविधान – अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार), अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता); भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS)
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • याचिकाकर्ता (पत्रकार) की ओर से: अधिवक्ता मंसूर बी.एच. एवं सकीना बेगम
  • पीठ: न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस (केरल उच्च न्यायालय)

Threat To Journalist: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतकेरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस (Justice Bechu Kurian Thomas)
याचिकाकर्ताअर्पणा कुरुप (सीनियर को-ऑर्डिनेटिंग एटर, बिग टीवी)
संबंधित संवैधानिक अधिकारअनुच्छेद 19(1)(a) (प्रेस एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन की सुरक्षा)
मुख्य विवादडिबेट शो होस्ट करने पर कट्टरपंथी तत्वों द्वारा डोक्सिंग (Doxxing), साइबर एब्यूज और जान से मारने की धमकियां।
अदालत का फैसलापत्रकार और उनके आवास को तत्काल पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश; अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को।
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