Friday, September 18, 2026
HomeLaw Firms & Assoc.LLB Education: दूरस्थ/मुक्त शिक्षा से स्नातक करने वाले 3-वर्षीय एलएलबी स्नातकों को...

LLB Education: दूरस्थ/मुक्त शिक्षा से स्नातक करने वाले 3-वर्षीय एलएलबी स्नातकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत; अनंतिम नामांकन की मिली अनुमति

मामले का मुख्य संदर्भ

  • विवाद का कारण: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के ‘लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008’ के नियम 5 की व्याख्या के आधार पर तेलंगाना बार काउंसिल ने ऐसे उम्मीदवारों का नामांकन रोक दिया था/अस्वीकार कर दिया था, जिनकी पूर्व स्नातक डिग्री (जैसे B.A./B.Com.) ओपन यूनिवर्सिटी या डिस्टेंस लर्निंग (जैसे डॉ. बी.आर. अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी या मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी) से थी।
  • तेलंगाना हाईकोर्ट का फैसला: तेलंगाना हाईकोर्ट ने 2024 में बार काउंसिल के इनकार के फैसले को सही ठहराया था, जिसके बाद उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा बनाए गए रूल्स ऑफ लीगल एजुकेशन, 2008 के नियम 5 (Rule 5 of the Rules of Legal Education, 2008) के व्याख्या विवाद, दूरस्थ/मुक्त विश्वविद्यालय (Open/Distance Mode) से प्राप्त स्नातक डिग्री की वैधता और वकालत के पेशे में प्रवेश के अधिकार पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल को निर्देश दिया है कि वह उन सभी विधि स्नातकों (Law Graduates) को अधिवक्ता के रूप में अनंतिम नामांकन (Provisional Enrolment) प्रदान करे, जिन्होंने अपनी 3-वर्षीय एलएलबी की डिग्री तो नियमित (Regular Mode) रूप से प्राप्त की है, लेकिन उनकी पूर्ववर्ती स्नातक डिग्री (जैसे बीए/बीकॉम) ओपन या पत्राचार माध्यम से पूरी हुई थी।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के 2024 के उस आदेश के खिलाफ दायर सिविल अपीलों पर यह अंतरिम राहत दी, जिसमें ओपन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों के नामांकन को खारिज करने के बार काउंसिल के फैसले को सही ठहराया गया था।

शीर्ष अदालत के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं टिप्पणियां

1. नियमित एलएलबी धारकों को प्रैक्टिस से वंचित रखना अनुचित पीठ ने दोनों पक्षों के हितों में संतुलन बनाते हुए रेखांकित किया:

  • यह निर्विवाद तथ्य है कि सभी अपीलार्थियों ने बीसीआई द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से नियमित (Regular) रूप से 3-वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया है।
  • उनके नामांकन में एकमात्र अड़चन केवल उनकी पूर्ववर्ती स्नातक योग्यता (Pre-law Degree) के माध्यम (Open/Distance Mode) को लेकर खड़ी की गई है।
  • अपीलों के लंबित रहने के दौरान नामांकन से लगातार वंचित रखने से इन स्नातकों के करियर पर अपूरणीय क्षति होगी और नियमित लॉ डिग्री होने के बावजूद वे वकालत के पेशे में आने से रुक जाएंगे।

2. अनंतिम नामांकन से कोई साम्य (Equity) सृजित नहीं होगा अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट कानूनी शर्तें तय कीं:

  • दिया जाने वाला यह नामांकन पूरी तरह ‘अनंतिम’ (Provisional) रहेगा और अपीलों के अंतिम न्यायिक फैसले के अधीन (Subject to the final outcome) होगा।
  • यह अनंतिम नामांकन उम्मीदवारों के पक्ष में कोई ‘इक्विटी’ (विधिक साम्य या स्थायी अधिकार का दावा) सृजित नहीं करेगा।
  • नामांकन से पूर्व संबंधित राज्य बार काउंसिल द्वारा सभी शैक्षणिक दस्तावेजों का सामान्य सत्यापन और अन्य अनिवार्य औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

3. नियम 5 की कानूनी व्याख्या अंतिम सुनवाई में होगी

  • शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस अंतरिम चरण में बीसीआई विधिक शिक्षा नियमावली, 2008 के नियम 5 की संवैधानिकता या मेरिट पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं कर रही है।
  • नियम 5 के सटीक अर्थ और डिस्टेंस एजुकेशन से डिग्री धारकों की बार नामांकन पात्रता के मुख्य विधिक प्रश्न पर अपीलों की अंतिम सुनवाई के दौरान विस्तृत निर्णय लिया जाएगा।

Also Read; Advocates Act: बिना राज्य बार काउंसिल में विधिवत इनरोलमेंट के किसी को भी वकालत करने या खुद को वकील बताने की अनुमति नहीं दी जा सकती

मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल विवाद)

  • उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता: * एक समूह ने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद डॉ. बी.आर. अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी, हैदराबाद से ओपन मोड में स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने बीसीआई से मान्यता प्राप्त संस्थानों से रेगुलर मोड में 3-वर्षीय एलएलबी पूरी की।
    • एक अन्य अपीलार्थी ने वर्ष 2006 में मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी से दूरस्थ शिक्षा (Distance Mode) के माध्यम से बी.कॉम पूरा किया था और वर्ष 2020 में उस्मानिया विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज से नियमित छात्र के रूप में एलएलबी उत्तीर्ण की थी।
  • बार काउंसिल द्वारा नामांकन से इनकार: तेलंगाना राज्य बार काउंसिल ने बीसीआई के नियम 5 का हवाला देते हुए उनका नामांकन आवेदन निरस्त कर दिया। बार काउंसिल का तर्क था कि ओपन/डिस्टेंस मोड से प्राप्त स्नातक डिग्री 3-वर्षीय नियमित एलएलबी पाठ्यक्रम के बाद नामांकन के लिए वैध पूर्व-शर्त नहीं मानी जा सकती।
  • तेलंगाना हाईकोर्ट का आदेश (2024): तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बार काउंसिल के रुख को बरकरार रखते हुए उम्मीदवारों की याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) का नियम 5 क्या है?

  • रूल्स ऑफ लीगल एजुकेशन, 2008 के नियम 5 के तहत 3-वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री होना अनिवार्य है।
  • इसके स्पष्टीकरण और शर्तों में यह प्रावधानित किया गया है कि ओपन यूनिवर्सिटी या पत्राचार माध्यम से सीधे डिग्री पाने वाले (जिन्होंने 10+2 की बुनियादी बुनियादी स्कूली शिक्षा पूरी किए बिना डिग्री ली हो) विधि पाठ्यक्रम में प्रवेश के पात्र नहीं होंगे।
  • राज्य बार काउंसिलें इसकी अत्यंत संकीर्ण व्याख्या करते हुए उन छात्रों का भी नामांकन रोक रही थीं जिन्होंने नियमित 10+2 के बाद ओपन यूनिवर्सिटी से विधिवत ग्रेजुएशन किया था। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने ऐसे छात्रों को बड़ी राहत दी है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: विधि स्नातक (अपीलार्थी) बनाम तेलंगाना स्टेट बार काउंसिल एवं अन्य [सिविल अपील / अंतरिम आवेदन – सर्वोच्च न्यायालय]
  • प्रासंगिक कानून: अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961) की धारा 24 (नामांकन की पात्रता); बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स ऑफ लीगल एजुकेशन, 2008 का नियम 5 (पात्रता की शर्तें); भारत का संविधान – अनुच्छेद 19(1)(g) (पेशा व व्यापार का मौलिक अधिकार) एवं अनुच्छेद 142
  • पीठ: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता (सर्वोच्च न्यायालय)

LLB Education:सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश व तर्क

विषयसुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी / आदेश
नियमित कानून डिग्रीयह निर्विवाद है कि सभी उम्मीदवारों ने मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से नियमित (Regular Mode) माध्यम में 3-वर्षीय LL.B. कोर्स पूरा किया है।
पूर्वाग्रह से बचावअपील लंबित रहने के दौरान नामांकन से लगातार इनकार करने से उम्मीदवारों को अनावश्यक नुकसान होगा और वे नियमित लॉ डिग्री पूरी करने के बावजूद वकालत में प्रवेश करने से वंचित रह जाएंगे।
अनंतिम प्रकृति (Provisional Nature)दिया गया नामांकन केवल अनंतिम (Provisional) होगा और अंतिम सिविल अपीलों (Civil Appeals) के फैसले के अधीन रहेगा। इससे उम्मीदवारों के पक्ष में कोई स्थायी अधिकार (Equity) उत्पन्न नहीं होगा।
अंतिम निर्णय पर रुखकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने नियम 5 की व्याख्या के गुण-दोष (Merits) पर निर्णय नहीं दिया है, इस पर अंतिम सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
scattered clouds
28 ° C
28 °
28 °
78 %
2.6kmh
47 %
Fri
29 °
Sat
35 °
Sun
36 °
Mon
35 °
Tue
35 °

Recent Comments