सुप्रीम COURT की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश
- अस्थायी नहीं, ‘स्थायी ढांचा’ (Permanent Setup) जरूरी: अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को स्पष्ट किया कि NTA में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर काम करने वाले अधिकारियों की संख्या बहुत कम होनी चाहिए।“जब तक NTA का अपना स्थायी ढांचा, स्थायी वर्टिकल्स और स्थायी कर्मचारी नहीं होंगे, तब तक संस्थागत जवाबदेही तय नहीं हो सकती। हम खुद आकर देखेंगे कि व्यवस्था वास्तव में काम कर रही है या नहीं।”
- नीलेकणि समिति की प्रगति रिपोर्ट: केंद्र सरकार ने पीठ को अवगत कराया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में संरचनात्मक सुधारों के लिए गठित नंदन नीलेकणि (Nandan Nilekani) टास्क फोर्स की अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की उम्मीद है। कोर्ट ने DoPT के संयुक्त सचिव को इस पर 2 सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।
- सुझाव केवल कागजों पर न रहें: पीठ ने कहा कि पूर्व ISRO प्रमुख के. राधाकृष्णन समिति ने कई अच्छे सुझाव दिए थे, लेकिन असली चुनौती उनके धरातल पर क्रियान्वयन (Implementation) की है।
- सार्वजनिक पारदर्शिता: अदालत ने NTA को अपने द्वारा दाखिल हलफनामे को वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया, ताकि छात्र और हितधारक अपने सुझाव दे सकें।
याचिकाओं में उठाई गई मुख्य मांगें (CBT और statutory body)
- कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT): FAIMA (Federation of All India Medical Association) और अन्य संघों द्वारा दायर याचिकाओं में पेन-एंड-पेपर मोड के बजाय CBT (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) मॉडल अपनाने और क्वेश्चन पेपर्स की ‘डिजिटल लॉकिंग’ की मांग की गई है।
- संसदीय जवाबदेही: यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने मांग की है कि NTA को एक वैधानिक संस्था (Statutory Body) का दर्जा दिया जाए जो सीधे संसद के प्रति जवाबदेह हो।
- पब्लिक एग्जामिनेशन कानून: केंद्र सरकार ने बताया कि Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2026 के तहत कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू किए गए हैं।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) सहित देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार होने वाले पेपर लीक, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ढांचागत कमजोरियों और परीक्षा सुधारों पर एक असाधारण और कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA), यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) और अन्य हितधारकों द्वारा दायर याचिकाओं के समूह पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स (High-Powered Task Force) को दो सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट हलफनामे के रूप में दाखिल करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल तात्कालिक या कामचलाऊ बदलावों से राष्ट्रीय परीक्षाओं की शुचिता बहाल नहीं हो सकती; इसके लिए पूरी परीक्षा प्रणाली का संस्थागत स्थायीकरण (Institutionalisation & Permanence) अनिवार्य है। अदालत ने संकेत दिया है कि पीठ के दोनों न्यायाधीश स्वयं नई दिल्ली स्थित एनटीए के अपग्रेडेड मुख्यालय का भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) करने जाएंगे ताकि यह परखा जा सके कि नया सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र कागजों से इतर वास्तव में काम कर रहा है या नहीं।
शीर्ष अदालत की प्रमुख विधिक टिप्पणियां एवं मौखिक निर्देश
1. ‘हम खुद एक दिन NTA दफ्तर आएंगे’: जजों द्वारा निरीक्षण का संकेत जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि एनटीए का गोपनीय व प्रशासनिक संचालन अब मिंटो रोड, नई दिल्ली स्थित एक अलग स्थायी 55,520 वर्ग फीट के परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया है, तो न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने कहा: “मैं और मेरे साथी जज एक दिन खुद वहां आएंगे। हम आकर व्यक्तिगत रूप से देखेंगे कि सिस्टम वास्तव में काम कर रहा है या नहीं, जरूरी मैनपावर तैनात है या नहीं और क्या व्यवस्थाएं की गई हैं। यह केवल छात्रों का नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार का भविष्य है; हम उन्हें बार-बार निराश नहीं होने दे सकते।”
2. प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर निर्भरता खत्म हो, कम से कम आधा स्टाफ स्थायी हो
- पीठ ने NTA में प्रशासनिक निरंतरता और संस्थागत स्मृति (Institutional Memory) के अभाव पर चिंता जताते हुए कहा:“एनटीए के तंत्र को संस्थागत रूप से मजबूत करना पेपर लीक रोकने की पहली शर्त है। केवल तात्कालिक उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। पूरे सिस्टम का स्थायीकरण (Permanency) सबसे अहम है। वहां स्थायी सेटअप, स्थायी वर्टिकल्स और कम से कम आधा स्टाफ स्थायी होना चाहिए। हर कोई अन्य विभागों से प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर नहीं आ सकता, क्योंकि प्रतिनियुक्ति पर आए लोगों से संस्थागत स्थिरता नहीं बनती।”
3. ‘राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट केवल कागज पर सिमट कर न रह जाए’
- अदालत ने जोर देकर कहा कि पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन समिति ने सुधारों पर कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की थीं, लेकिन मुख्य समस्या उनके जमीनी क्रियान्वयन (Implementation) की है।
- पीठ ने कहा कि नंदन नीलेकणि समिति की सिफारिशों का भी यही हश्र नहीं होना चाहिए; सुधारों को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा जाना चाहिए।
केंद्र सरकार व सॉलिसिटर जनरल का पक्ष (टास्क फोर्स और अपग्रेडेशन)
- नंदन नीलेकणि पैनल की रिपोर्ट सितंबर अंत तक: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स ने हितधारकों और पूर्व राधाकृष्णन समिति के सदस्यों के साथ व्यापक परामर्श पूरा कर लिया है और वह सितंबर 2026 के अंत तक अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर देगी।
- मिंटो रोड पर नया सुरक्षा तंत्र: * केंद्र सरकार ने हलफनामे में बताया कि एनटीए का गोपनीय मुख्यालय अब मिंटो रोड स्थित 55,520 वर्ग फीट के सुरक्षित सरकारी भवन में शिफ्ट कर दिया गया है।
- यह परिसर सीआईएसएफ (CISF) कर्मियों, आधुनिक एक्स-रे स्कैनिंग, मेटल डिटेक्टर्स और उन्नत डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल से लैस है।
- वरिष्ठ स्तर पर आईएएस, आईपीएस और भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS) के अधिकारियों को शामिल कर विशेषज्ञ नेतृत्व तैयार किया गया है।
- पेन-पेपर से सीबीटी (CBT) मोड पर विचार: केंद्र ने स्पष्ट किया कि जेईई (JEE) की तर्ज पर नीट-यूजी को पेन-एंड-पेपर मोड से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलने और इसे एकल या दो-चरणीय (Single or Two-stage) प्रारूप में आयोजित करने पर सक्रिय विमर्श चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी अंतरिम निर्देश
- DoPT के संयुक्त सचिव को हलफनामे का निर्देश: उच्चाधिकार प्राप्त समिति के साथ समन्वय कर रहे कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के संयुक्त सचिव को दो सप्ताह के भीतर समिति द्वारा की गई प्रगति का विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया।
- हलफनामा सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड हो: शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि एनटीए द्वारा किए गए सुधारों का हलफनामा आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए ताकि छात्र और आम जनता प्रगति की समीक्षा कर सकें।
- सुझावों के लिए नोडल व्यवस्था: आम हितधारकों और विशेषज्ञों से सीधे सुझाव प्राप्त करने के लिए केंद्र को एक नोडल काउंसिल नियुक्त करने और समर्पित ईमेल आईडी बनाने का निर्देश दिया गया।
- अगली सुनवाई: मामले को तीन सप्ताह बाद आगे के निर्देशों के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) एवं अन्य बनाम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एवं अन्य [W.P.(C) No. 651/2026 एवं संबद्ध याचिकाएं – सर्वोच्च न्यायालय]
- प्रासंगिक कानून: लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026 (Public Examinations Unfair Means Act); राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 (NMC Act); भारत का संविधान – अनुच्छेद 14, 21 एवं अनुच्छेद 142
- प्रमुख याचिकाकर्ता पक्ष:
- FAIMA की ओर से: अधिवक्ता तन्वी दुबे
- यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) की ओर से: अधिवक्ता चारू माथुर एवं रितु रानीवाल
- हस्तक्षेपकर्ता: डॉ. मंगला कोहली (नीट परीक्षा की संस्थापक/पूर्व अतिरिक्त डीजीएचएस)
- केंद्र/NTA की ओर से: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता
- पीठ: न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे (सर्वोच्च न्यायालय)
NTA Paper Leak: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठासीन पीठ | जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे |
| मुख्य मुद्दा | NEET-UG पेपर लीक की रोकथाम, NTA का पुनर्गठन और टेक्नोलॉजी रिफॉर्म्स |
| विशेष समितियां | नंदन नीलेकणि समिति (टैस्क फोर्स) और के. राधाकृष्णन समिति |
| अदालत का निर्देश | DoPT के संयुक्त सचिव 2 सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें; मामला 3 सप्ताह बाद सूचीबद्ध। |

