Friday, September 18, 2026
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Malicious Letters: जजों, एमिकस क्यूरी-वकीलों को बदनाम करने के लिए बेनामी पत्र भेजने वाले बिल्डर यह न समझें कि न्यायपालिका डर जाएगी; यह है केस

न्यायिक फटकार और सुनवाई के मुख्य बिंदु

  • CBI को सौंपा जाएगा अनाम शिकायतों का बैच: CJI सूर्यकांत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG ऐश्वर्या भाटी) से कहा कि रजिस्ट्री को मिले अनाम पत्रों के नए जत्थे को जांच के लिए CBI के हवाले किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसके पीछे डिफॉल्टर बिल्डरों के साथ-साथ उन वकीलों व सलाहकारों की भूमिका है जो न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करना चाहते हैं।
  • अदालत को डराने की कोशिश नाकाम: पीठ ने बिल्डरों के वकीलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि गुमनाम पत्र भेजकर न्यायपालिका को दबाव में लेने या बदनाम करने के इस हथकंडे को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।

बिल्डर-बैंक सांठगांठ और सबवेंशन योजना घोटाले पर CBI की रिपोर्ट

ASG ऐश्वर्या भाटी ने सबवेंशन स्कीम (Subvention Scheme) में हुई धांधलियों पर CBI की जांच रिपोर्ट पेश की:

  1. क्या था सबवेंशन घोटाला? अप्रैल 2025 में कोर्ट के निर्देशों के बाद हुई जांच में खुलासा हुआ कि निजी बिल्डरों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर मिलीभगत की। खरीदारों के नाम पर कर्ज की राशि सीधे बिल्डरों के खातों में डायवर्ट कर दी गई, जबकि फ्लैट का कब्जा दिए बिना आम खरीदारों पर भारी-भरकम EMI का बोझ डाल दिया गया।
  2. इन प्रमुख बैंकों के अधिकारी जांच के घेरे में: CBI ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धाराओं के तहत भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, HDFC बैंक और ICICI बैंक के संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
  3. अब तक की कार्रवाई:
    • कुल 50 FIR दर्ज की जा चुकी हैं।
    • 18 मामलों में जांच पूरी हो चुकी है।
    • 17 मामलों में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है और 1 क्लोजर रिपोर्ट सौंपी गई है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मध्यमवर्गीय होमबायर्स के साथ धोखाधड़ी करने वाले बेईमान रियल एस्टेट बिल्डरों द्वारा न्यायिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने, जजों को धमकाने और व्यवस्था पर अनुचित दबाव बनाने के लिए चलाए जा रहे सुनियोजित दुष्प्रचार अभियानों (Smear Campaigns) पर अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन-न्यायाधीशों की विशेष पीठ ने यह सख्त निर्देश उस समय जारी किए जब फ्लैट खरीदारों के धन के गबन, दशकों के विलंब और बिल्डर-बैंक साठगांठ से जुड़े सबवेंशन घोटालों की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत के मौजूदा जजों, कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) और पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं को निशाना बनाने वाले बेनामी पत्रों की बाढ़ का खुलासा हुआ। शीर्ष अदालत ने खुली अदालत में कड़ी चेतावनी दी है कि बेनामी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों (Anonymous Malicious Letters) के जरिए न्यायपालिका को किसी भी कीमत पर भयभीत या विचलित नहीं किया जा सकता। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया है कि वह इन पत्रों के पीछे छिपे सिंडिकेट्स, दोषी प्रमोटरों और उनके दुष्ट कानूनी सलाहकारों (Rogue Legal Advisors) की पहचान कर उनके खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज करे और सख्त विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करे।

शीर्ष अदालत की प्रमुख टिप्पणियां और कड़ा रुख

1. ‘न्यायपालिका बेनामी दबावों और गीदड़भभकियों से नहीं डरेगी’ बिल्डरों की ओर से पेश वकीलों को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दो टूक शब्दों में कहा:

  • जब अदालत हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों के जीवन भर की गाढ़ी कमाई लूटने वाले प्रमोटरों के खिलाफ शिकंजा कस रही है, तब इस तरह के गुप्त और कायरतापूर्ण हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
  • पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका किसी भी छायादार दबाव (Shadowy pressure ploys) के आगे नहीं झुकेगी।
  • अदालत की रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह प्राप्त हुए सभी बेनामी पत्रों और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के नए जत्थे को सीधे सीबीआई को सौंपे, ताकि जांच एजेंसी वास्तविक लेखकों, वित्तीय स्रोतों और इसके पीछे काम कर रहे नेटवर्क का पर्दाफाश कर सके।

2. मुख्य संलिप्तता: डिफाल्टर बिल्डर और अनैतिक विधिक सलाहकार

  • मुख्य न्यायाधीश ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी को संबोधित करते हुए रेखांकित किया कि प्रथम दृष्टया यह साफ प्रतीत होता है कि इस पूरे दुर्भावनापूर्ण अभियान के सूत्रधार वही डिफाल्टर बिल्डर हैं जो अदालती सख्ती से बचना चाहते हैं, और उन्हें ऐसे अनैतिक कानूनी सलाहकार शह दे रहे हैं जो न्यायिक प्रक्रिया को बाधित (Derail) करने की साजिश रच रहे हैं।

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सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट: सबवेंशन घोटाले में बड़ा खुलासा

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अप्रैल 2025 में शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्देशों के अनुपालन में सबवेंशन योजनाओं (Subvention Schemes) में वित्तीय अनियमितताओं और बैंक-बिल्डर मिलीभगत पर सीबीआई की व्यापक जांच स्थिति रिपोर्ट पेश की:

  • व्यवस्थित भ्रष्टाचार और गबन: सीबीआई जांच में यह बात सामने आई है कि निजी बिल्डरों ने वाणिज्यिक बैंकों के शीर्ष अधिकारियों के साथ आपराधिक मिलीभगत करके बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन की हेराफेरी की।
  • होमबायर्स पर दोहरी मार: बैंकों से प्रोजेक्ट के नाम पर स्वीकृत ऋण की पूरी राशि मकान निर्माण के बिना ही बिल्डरों के खातों में डायवर्ट कर ली गई, जबकि निर्माण कार्य ठप रहने के बावजूद निर्दोष फ्लैट खरीदारों पर भारी-भरकम ईएमआई (EMI) का बोझ लाद दिया गया।
  • जांच और अभियोजन की अद्यतन स्थिति:
    • सीबीआई ने अब तक कुल 50 नियमित मामले (FIRs) दर्ज किए हैं।
    • 18 मामलों में व्यापक जांच पूरी कर ली गई है।
    • सक्षम ट्रायल कोर्ट्स में 17 औपचारिक चार्जशीट (Charge Sheets) दाखिल की जा चुकी हैं, जबकि एक मामले में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है।
  • बैंक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम: सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के कई बड़े बैंकों—जैसे भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ इंडिया (BOI), यूको बैंक (UCO Bank), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) के संलिप्त अधिकारियों और प्रबंधकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) और आपराधिक षड्यंत्र की कड़े धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

विधिक विवरण

  • प्रासंगिक कानून: भारतीय न्याय संहिता, 2023 / आईपीसी की धाराएं (आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी और न्याय प्रशासन में बाधा); भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PC Act) की धारा 7 व 13; न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971; भारत का संविधान – अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की अंतर्निहित शक्ति) एवं अनुच्छेद 129 (अभिलेख न्यायालय के रूप में अवमानना पर दंड देने की शक्ति)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत: * न्यायिक स्वतंत्रता एवं भयमुक्त न्याय प्रशासन का सिद्धांत — ‘न्यायाधीशों, एमिकस क्यूरी या अदालती अधिकारियों को बदनाम करने, उन पर व्यक्तिगत लांछन लगाने या झूठी शिकायतों के जरिए डराने का कोई भी प्रयास सीधे तौर पर आपराधिक अवमानना और न्याय की धारा में विष घोलने के समान है।’
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • केंद्र सरकार / सीबीआई की ओर से: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी
  • पीठ: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना (सर्वोच्च न्यायालय)

Malicious Letters: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतसर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
पीठासीन पीठCJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची, जस्टिस वी. मोहना
मुख्य मुद्दाजजों/वकीलों के खिलाफ अनाम शिकायत पत्र और बिल्डर-बैंक सबवेंशन घोटाला
जांच एजेंसीकेंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)
CBI की प्रगति50 FIR दर्ज, 18 मामलों की जांच पूरी, 17 चार्जशीट दाखिल
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