Wednesday, November 4, 2026
HomeDelhi High CourtRed Corner Notice: न्यायिक कार्यवाही का मज़ाक उड़ाना बंद करो; यह मत...

Red Corner Notice: न्यायिक कार्यवाही का मज़ाक उड़ाना बंद करो; यह मत सोचो कि हम तुम्हें ऐसे ही छोड़ देंगे या तो तुम खुद अदालत में पेश हो जाओ, वरना हम तुम्हें खींचकर यहां ले आएंगे

अदालत में वर्चुअल सुनवाई के दौरान हंगामा

  1. अदालत की सख्त चेतावनी: 18 सितंबर को सुनवाई के दौरान अदीश्वर सिंघल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए जुड़ा और अदालत की कार्यवाही में बाधा डालते हुए विवादित आचरण करने लगा। इस पर न्यायमूर्ति नवीन चावला ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा:“हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आप अदालत में उपस्थित हों, यह मत सोचिए कि हम आपको इस तरह छोड़ देंगे। आप कार्यवाही का मज़ाक उड़ा रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं। या तो आप खुद यहाँ आएं, या फिर हम आपको यहाँ लेकर आएंगे।”
  2. विदेश भागने और पासपोर्ट एक्सपायर होने का खुलासा: केंद्र सरकार के वकील अमित तिवारी ने अदालत को बताया कि आरोपी सिंघल वर्ष 2024 में भारत से इटली गया था और तब से वापस नहीं लौटा है। उसका भारतीय पासपोर्ट भी समाप्त (Expired) हो चुका है और उसकी वर्तमान लोकेशन अज्ञात है।
  3. अमेरिका (California) से वीसी जॉइन करने का शक: दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया कि अप्रैल की सुनवाई के दौरान आरोपी जिस IP एड्रेस से जुड़ा था, वह अमेरिका के कैलिफोर्निया का था। इस पर कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट एक्सपायर होने के बावजूद वह संभवतः किसी अन्य पहचान का इस्तेमाल कर रहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए मुख्य निर्देश

  • विदेश मंत्रालय को निर्देश: कोर्ट ने केंद्रीय विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह अमेरिका के संबंधित अधिकारियों को आरोपी के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW), उसके समाप्त हो चुके पासपोर्ट और IP एड्रेस की जानकारी दे।
  • साइबर सेल द्वारा जांच: दिल्ली पुलिस की साइबर सेल को निर्देश दिया गया है कि वह उस IP एड्रेस की गहन जांच करे जिससे सिंघल वीसी सुनवाई में शामिल हुआ था।
  • व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश: कोर्ट ने आरोपी को 9 दिसंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का अंतिम निर्देश दिया है।

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भारतीय न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाने, अदालतों पर मनगढ़ंत व अपमानजनक आरोप लगाने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के ज़रिए अदालती कार्यवाहियों को जानबूझकर बाधित करने वाले एक फरार व्यक्ति के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने सिंघल के खिलाफ शुरू की गई स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना कार्यवाही (Suo Motu Criminal Contempt) की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया है कि वह इंटरपोल (Interpol) के माध्यम से अदीश्वर सिंघल (Adeeshwar Singhal) नामक व्यक्ति के खिलाफ तत्काल रेड कॉर्नर नोटिस (Red Corner Notice) जारी कराए, ताकि गैर-जमानती वारंट (NBW) के अनुपालन में उसे गिरफ्तार कर अदालत के समक्ष पेश किया जा सके [अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान बनाम अदीश्वर सिंघल]।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां एवं सख्त चेतावनी

1. ‘या तो खुद आओ, वरना हम तुम्हें यहाँ ले आएंगे’ 18 सितंबर को जब अदीश्वर सिंघल ने विदेश से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए सुनवाई में जुड़कर पुनः अमर्यादित और विघटनकारी आचरण (Disruptive Conduct) किया तथा न्यायाधीशों पर लांछन लगाए, तो न्यायमूर्ति नवीन चावला ने खुली अदालत में कड़ी चेतावनी दी: “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि तुम इस अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हो। यह बिल्कुल मत सोचना कि हम तुम्हें इस तरह छोड़ देंगे। तुम न्यायिक कार्यवाही का सरेआम मज़ाक उड़ा रहे हो और झूठे आरोप लगा रहे हो। या तो तुम खुद यहाँ अदालत में हाजिर हो जाओ, वरना हम तुम्हें यहाँ खींचकर ले आएंगे।”

2. केवल लुकआउट सर्कुलर (LOC) पर्याप्त नहीं, रेड नोटिस अनिवार्य

  • पीठ ने रेखांकित किया कि प्रत्यर्थी/आरोपी के खिलाफ पहले ही गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए जा चुके हैं।
  • अदालत ने दर्ज किया:“आरोपी के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया गया है, लेकिन एनबीडब्ल्यू जारी होने के बावजूद केवल एलओसी उसकी भौतिक उपस्थिति सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। इसलिए हम केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश देते हैं कि वह इंटरपोल के ज़रिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करे ताकि हमारे आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके।”

Also Read; Disclosing Identity: जज भी पीड़िता के नाम की जगह ‘X’ लिखते हैं, फिर आपने हैंडबुक में नाम कैसे उजागर कर दिया? POSH हैंडबुक का विवाद जानिए

जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

  • 2024 में इटली भागा, भारतीय पासपोर्ट समाप्त: केंद्र सरकार के स्थायी वकील अमित तिवारी ने अदालत को सूचित किया कि आरोपी अदीश्वर सिंघल वर्ष 2024 में भारत से इटली चला गया था और तब से वापस नहीं लौटा है। इसके अलावा उसका भारतीय पासपोर्ट भी समाप्त (Expired) हो चुका है और वह अज्ञात ठिकाने पर छिपा हुआ है।
  • फर्जी पहचान का संदेह: उच्च न्यायालय ने मौखिक रूप से कहा कि पासपोर्ट समाप्त होने के बाद यह तय है कि वह किसी अन्य फर्जी पहचान (Other identity) का उपयोग करके विदेश में रह रहा है।
  • अमेरिका में मिला आईपी एड्रेस: दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर ने अदालत को बताया कि अप्रैल 2026 में हुई पिछली सुनवाई के दौरान जिस आईपी एड्रेस (IP Address) से सिंघल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जुड़ा था, उसका लोकेशन कैलिफ़ोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में ट्रेस हुआ है।
  • विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश: अदालत ने केंद्रीय विदेश मंत्रालय को आदेश दिया कि वह अमेरिकी अधिकारियों को सिंघल के खिलाफ जारी एनबीडब्ल्यू (NBW), उसके पासपोर्ट की समाप्ति और ट्रेस किए गए आईपी एड्रेस के विवरण से तुरंत अवगत कराए ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस पर शिकंजा कसा जा सके।
  • दिल्ली पुलिस साइबर सेल को पड़ताल के आदेश: दिल्ली पुलिस की साइबर सेल और हाईकोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि वे उस हालिया आईपी एड्रेस का तकनीकी विवरण एकत्र कर विस्तृत जांच करें जिससे वह अदालत की कार्यवाही में दखल दे रहा था।

अदालत का अंतिम निर्देश

  1. इंटरपोल रेड नोटिस: भारत में इंटरपोल की नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (NCB) के रूप में कार्य कर रही सीबीआई को अविलंब रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया।
  2. व्यक्तिगत पेशी का आदेश: अदालत ने अदीश्वर सिंघल को आगामी सुनवाई की तारीख पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का अंतिम निर्देश दिया है।
  3. अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को नियत की गई है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: कोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन बनाम अदीश्वर सिंघल [स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना याचिका – दिल्ली उच्च न्यायालय]
  • प्रासंगिक कानून: न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 14 एवं 15 (आपराधिक अवमानना की प्रक्रिया); प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 (Extradition Act); भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 72-89 (वारंट एवं उद्घोषणा से जुड़े प्रावधान); भारत का संविधान – अनुच्छेद 215 (अभिलेख न्यायालय के रूप में अवमानना पर दंड देने की अंतर्निहित शक्ति)
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • न्यायालय की सहायता हेतु (एमिकस क्यूरी): अधिवक्ता अमित जॉर्ज, साथ में अधिवक्ता अमल एवं मुस्कान शल्य
    • भारत संघ (Union of India) की ओर से: केंद्र सरकार के स्थायी वकील (CGSC) अमित तिवारी, साथ में आयुषी श्रीवास्तव, अर्पण नरवाल, कुशाग्र मलिक एवं उज्ज्वल त्यागी
    • दिल्ली पुलिस की ओर से: अतिरिक्त लोक अभियोजक (APP) अमन उस्मान एवं अधिवक्ता मानवेंद्र यादव
  • पीठ: न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा (दिल्ली उच्च न्यायालय)

मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
पीठजस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र दुदेजा
मुख्य आरोपीअदीश्वर सिंघल (Adeeshwar Singhal)
मामलाअदालती कार्यवाही में बाधा डालना और जजों/न्यायपालिका पर अनर्गल आरोप लगाना
जारी निर्देशCBI द्वारा इंटरपोल Red Corner Notice; US अधिकारियों को सूचित करने का निर्देश
अगली सुनवाई9 दिसंबर 2026
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
broken clouds
22.9 ° C
22.9 °
22.9 °
85 %
3kmh
80 %
Tue
22 °
Wed
30 °
Thu
29 °
Fri
29 °
Sat
29 °

Recent Comments