विवाद की पृष्ठभूमि और मुख्य बिंदु
- अकाउंट पर निलंबन:
- 5 जुलाई को इंस्टाग्राम ने SFI दिल्ली के आधिकारिक अकाउंट (जिसके लगभग 13,000 फॉलोअर्स थे) को permanently disable कर दिया।
- इंस्टाग्राम का कहना था कि यह अकाउंट “किसी अन्य नियम-उल्लंघन करने वाले अकाउंट से जुड़ा हो सकता है”। हालांकि, SFI के अनुसार इंस्टाग्राम ने किसी अन्य अकाउंट या उल्लंघन की सटीक जानकारी साझा नहीं की।
- GAC में देरी और कानूनी नियम (IT Rules, 2021):
- SFI ने पहले मेटा के ग्रीवेंस ऑफिसर से संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर 12 अगस्त को सरकारी Grievance Appellate Committee (GAC) में अपील दायर की।
- सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 3A(4) के तहत GAC को किसी भी अपील का निवारण 30 कैलेंडर दिनों के भीतर करना अनिवार्य है।
- 30 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी GAC की वेबसाइट पर स्टेटस “Under Process” दिखाई दे रहा है।
- याचिका में उठाई गई मांगें:
- SFI ने तर्क दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मनमाने ढंग से बंद करने और अपील में देरी से उनके अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), और 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
- याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि वह GAC को इस अपील पर तुरंत और निष्पक्ष फैसला सुनाने का निर्देश दे।
नई दिल्ली: वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (Student’s Federation of India – SFI) की दिल्ली राज्य इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (मेटा) द्वारा अपने आधिकारिक अकाउंट को स्थायी रूप से डिसेबल (Permanent Disabling) किए जाने और इसके खिलाफ केंद्र सरकार की शिकायत अपीलीय समिति (Grievance Appellate Committee – GAC) के समक्ष दायर वैधानिक अपील के निस्तारण में हो रही अनुचित देरी को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ 24 सितंबर 2026 को इस याचिका पर सुनवाई करने वाली है। याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 [IT Rules, 2021] के नियम 3A(4) के तहत निर्धारित अनिवार्य 30-दिवसीय समय सीमा के उल्लंघन और संविधान के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के हनन का मुद्दा उठाया गया है।
याचिका में उठाए गए प्रमुख विधिक आधार एवं आरोप
1. मेटा/इंस्टाग्राम द्वारा एकतरफा व अस्पष्ट आधार पर अकाउंट डिसेबल करना
- सीपीआई(एम) के छात्र संगठन एसएफआई दिल्ली का आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल वर्ष 2018 से सक्रिय था, जिसके लगभग 13,000 फॉलोअर्स थे।
- 5 जुलाई 2026 को मेटा ने बिना कोई स्पष्ट कारण या पूर्व नोटिस दिए अकाउंट को स्थायी रूप से निष्क्रिय (Disabled) कर दिया।
- मेटा द्वारा केवल एक अस्पष्ट पंक्ति लिखी गई कि “यह अकाउंट किसी अन्य ऐसे अकाउंट से संबद्ध हो सकता है जिसने हमारे नियमों का उल्लंघन किया है” और यह ‘अकाउंट इंटीग्रिटी’ पर उनके कम्युनिटी मानकों का अनुपालन नहीं करता।
- याचिकाकर्ता का आरोप है कि इंस्टाग्राम ने न तो उस तथाकथित ‘संबद्ध खाते’ की पहचान उजागर की और न ही यह बताया कि किस पोस्ट या गतिविधि से नियमों का उल्लंघन हुआ था।
2. अपीलीय प्रक्रिया और आईटी नियम, 2021 के नियम 3A(4) का उल्लंघन याचिका में दर्शाया गया है कि संगठन ने उपलब्ध सभी आंतरिक और वैधानिक अपीलीय विकल्पों का इस्तेमाल किया:
- 7 जुलाई 2026: इंस्टाग्राम के इन-ऐप तंत्र के जरिए प्राथमिक अपील दायर की गई।
- 9 जुलाई 2026: मेटा के भारत स्थित शिकायत निवारण अधिकारी (Grievance Officer) से संपर्क किया गया, किंतु कोई जवाब नहीं मिला।
- 12 अगस्त 2026: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा गठित शिकायत अपीलीय समिति (GAC) के समक्ष औपचारिक अपील प्रस्तुत की गई।
- 30 दिन की वैधानिक सीमा का उल्लंघन: आईटी नियम, 2021 के नियम 3A(4) के तहत जीएसी के लिए यह अनिवार्य अधिदेश है कि वह अपीलों का निपटारा त्वरित गति से करे और उन्हें प्राप्त होने के 30 कैलेंडर दिनों (30 Calendar Days) के भीतर अंतिम रूप से हल करने का प्रयास करे।
- 16 सितंबर 2026 तक (30 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी) जीएसी के आधिकारिक पोर्टल पर अपील केवल “प्रक्रियाधीन” (Under Process) दिखाई दे रही है।
3. संवैधानिक अधिकारों और प्राकृतिक न्याय का हनन
- याचिका में तर्क दिया गया है कि सोशल मीडिया आज के दौर में छात्रों, युवाओं और राजनीतिक संगठनों के लिए लोकतांत्रिक असंतोष व्यक्त करने, जनमुद्दों को उठाने और सार्वजनिक संवाद का प्राथमिक साधन बन चुका है।
- किसी अकाउंट को अपारदर्शी तरीके से बंद करना और उस पर वैधानिक अपीलीय फोरम द्वारा समयबद्ध सुनवाई न करना संविधान के:
- अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता),
- अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय/संगठन संचालन की स्वतंत्रता),
- अनुच्छेद 14 (मनमानेपन के विरुद्ध समानता का अधिकार), और
- अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन और निष्पक्ष प्रक्रिया का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता की प्रमुख प्रार्थनाएं
- GAC को निर्देश: केंद्रीय शिकायत अपीलीय समिति (GAC) को निर्देश दिया जाए कि वह एसएफआई दिल्ली की लंबित अपील पर बिना किसी देरी के तत्काल और समयबद्ध निर्णय पारित करे।
- संवैधानिक मानकों का अनुपालन: यह निर्देश दिया जाए कि जीएसी अपनी अपीलीय प्रक्रिया का संचालन संविधान के भाग III के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) के पूर्ण अनुरूप करे।
- अकाउंट बहाली: मेटा/इंस्टाग्राम को एसएफआई दिल्ली के आधिकारिक अकाउंट को बहाल करने का अंतरिम आदेश दिया जाए।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) दिल्ली बनाम भारत संघ (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय), Grievance Appellate Committee (GAC) एवं मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. [W.P.(C) – दिल्ली उच्च न्यायालय]
- याचिकाकर्ता के वकील: अधिवक्ता नमन कुमार
- प्रासंगिक कानून एवं नियम:
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) की धारा 69A एवं धारा 79
- सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (IT Rules, 2021) का नियम 3 (ड्यू डिलिजेंस) एवं नियम 3A(4) (GAC की समयबद्ध अपीलीय शक्तियां)
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(g), 21 एवं अनुच्छेद 226
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (2015, सुप्रीम कोर्ट) — ‘इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत संरक्षित है; ऑनलाइन अभिव्यक्ति को मनमाने ढंग से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।’
- अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020, सुप्रीम कोर्ट) — ‘इंटरनेट के माध्यम से सूचनाओं का प्रसार और संवाद आधुनिक युग में मौलिक अधिकारों के प्रयोग का अभिन्न माध्यम है।’
- पीठ: न्यायमूर्ति अमित महाजन (दिल्ली उच्च न्यायालय)
- सुनवाई तिथि: 24 सितंबर 2026
IT Act: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| पीठ के न्यायाधीश | न्यायमूर्ति अमित महाजन |
| याचिकाकर्ता | स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI – CPI(M) का छात्र संगठन) |
| प्रतिवादी | केंद्र सरकार की GAC, मेटा/इंस्टाग्राम (Meta/Instagram) |
| मुद्दा | इंस्टाग्राम अकाउंट बंद होने और GAC द्वारा 30 दिनों की समय सीमा में अपील न निपटाने के खिलाफ |

