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Uttarakhand HC: पिंडर और रिस्पना नदियों के अस्तित्व पर सवाल… ऐसा उत्तराखंड हाईकोर्ट ने क्यू कहां, पढ़ें निर्देश

Uttarakhand HC: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पिंडर और रिस्पना नदियों तथा उनसे जुड़ी मौसमी धाराओं से मलबा हटाने का आदेश देते हुए कहा कि यह भविष्य के अस्तित्व से जुड़ा सवाल है।

मलबा डालने से संबंधित कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई

हाईकोर्ट ने अधिकारियों से इन नदियों और धाराओं से मलबा हटाने की समय-सीमा बताते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा। दो नदियों में मलबा डालने से संबंधित कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने कहा कि अगर यह जारी रहा तो आने वाली पीढ़ियां हमें कोसेंगी। नदियों और उनमें बहने वाली धाराओं में मलबा डालना बंद किया जाना चाहिए क्योंकि यह भविष्य के अस्तित्व का सवाल है।

मलबा जमा होता रहा तो धाराएं अनियंत्रित हो जाएंगी…

अदालत ने कहा, अगर हम ऐसा करते रहे तो आने वाली पीढ़ियां हमें कोसेंगी। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि ये धाराएं भूस्खलन को रोकने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि अगर मलबा जमा होता रहा तो धाराएं अनियंत्रित हो जाएंगी और बाढ़, भूमि कटाव और भूस्खलन का कारण बनेंगी। सुनवाई के दौरान देहरादून नगर आयुक्त नमामि बंसल व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित थीं। प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु, सचिव नगरीय विकास नितेश झा और राजस्व सचिव सुरेंद्र नारायण पांडेय भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हुए।

87 से 88 फीसदी अतिक्रमण हटा दिए गए हैं…

प्रमुख सचिव सुधांशु ने कहा कि 87 से 88 फीसदी अतिक्रमण हटा दिए गए हैं और फ्लड प्लेन जोनिंग का काम चल रहा है, लेकिन यह समय लेने वाली प्रक्रिया है, क्योंकि यह भारत सरकार और वन विभाग की परियोजना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए काफी पूंजी की भी जरूरत है। अदालत ने सभी संबंधित सचिवों और नगर निगमों को हलफनामा दाखिल कर अदालत में यह बताने को कहा कि ऐसी धाराओं और नदियों को साफ करने का काम किस समय सीमा में होगा।

मलबा डालने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें

हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया कि वे सभी संबंधित एसएचओ को निर्देश दें कि वे नदियों और उनकी धाराओं में मलबा डालने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें। अदालत ने संबंधित एसएचओ और नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सार्वजनिक घोषणाएं जारी करें, जिसमें लोगों को बताया जाए कि नदियों में मलबा डालना अपराध है। अदालत ने इन निकायों को जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने को भी कहा। अदालत अब इस मामले की सुनवाई 15 अप्रैल को करेगी।

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