Sunday, September 27, 2026
HomeHigh CourtNoise Pollution: कोर्ट से घर लौटते समय हमने खुद देखा कि लाउडस्पीकर...

Noise Pollution: कोर्ट से घर लौटते समय हमने खुद देखा कि लाउडस्पीकर ध्वनि सीमा की धज्जियां उड़ा रहे थे; उधर जुलूस के डीजे शोर से 7 साल के मासूम की मौत हो गई

हाईकोर्ट द्वारा जारी मुख्य निर्देश

हाईकोर्ट ने मामले को केवल बयानों तक सीमित न रखकर इसे लगातार मॉनिटर करने का फैसला किया और प्रशासन को निम्नलिखित निर्देश दिए:

  • सख्त कानूनी कार्रवाई: ध्वनि प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 और मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत आपराधिक कार्रवाई की जाए।
  • साइलेंस जोन (Silence Zones) का प्रकाशन: अस्पताल, स्कूल, कोर्ट आदि के आसपास के साइलेंस जोन की सूची प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित की जाए और जनता से नए साइलेंस जोन घोषित करने के सुझाव मांगे जाएं।
  • समर्पित हेल्पलाइन नंबर: आम नागरिकों की शिकायतों के लिए पुलिस और प्रशासनिक हेल्पलाइन नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि लोग तुरंत शिकायत दर्ज करा सकें।
  • अनुपालन रिपोर्ट: राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर नई एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया गया है।

इंदौर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने धार्मिक आयोजनों, जुलूसों, शादियों और सार्वजनिक सभाओं में डीजे (DJ) और लाउडस्पीकरों के अनियंत्रित और अत्यधिक शोर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर अत्यंत सख्त रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने वर्ष 2023 से लंबित एक जनहित याचिका (PIL) पर 24 सितंबर 2026 को विस्तृत आदेश पारित करते हुए प्रशासन को ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानूनों को कड़ाई से लागू करने, साइलेंस जोन (Silence Zones) की सूची प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित करने और आम नागरिकों की शिकायतों के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक स्कूल के पास से गुजर रहे जुलूस के लाउडस्पीकरों के कानफोड़ू शोर के कारण सात वर्षीय मासूम बच्चे की मौत की हृदयविदारक घटना और स्वयं न्यायाधीशों द्वारा कोर्ट से घर लौटते वक्त सड़कों पर अनुभव किए गए अनियंत्रित शोर का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के दावों की पोल खोल दी। अदालत ने कहा कि प्रशासन द्वारा कागजों पर सब कुछ नियंत्रित होने का हलफनामा दिया गया था, परंतु वास्तविक जमीनी हकीकत अत्यंत भयावह और चिंताजनक है।

सुनवाई के दौरान खंडपीठ के कड़े अवलोकन और व्यक्तिगत अनुभव

1. ‘जज जब घर लौट रहे थे, तो लाउडस्पीकर सभी सीमाएं तोड़ रहे थे’ न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने आदेश में दर्ज किया कि अदालत से अपने आवास जाते समय उन्होंने स्वयं सड़क पर बेकाबू ध्वनि प्रदूषण देखा: “लगभग सभी दिशाओं से अत्यधिक तेज आवाजें आ रही थीं। कोर्ट से अपने घरों की ओर यात्रा करते समय हमने पाया कि कई स्थानों पर लाउडस्पीकर ध्वनि सीमाओं के सभी मानकों को तार-तार कर रहे थे। इसके अलावा, कल सुबह के समाचार पत्र में हमने पढ़ा कि पास से गुजर रहे एक जुलूस के लाउडस्पीकरों से निकलने वाले अत्यधिक तीव्र आवाज (High Pitch Volume) के कारण स्कूल में 7 वर्ष के एक बच्चे की दुखद मौत हो गई।”

2. ‘जिम्मेदार अधिकारियों को वातावरण का यह प्रदूषण क्यों सुनाई नहीं देता?’: हाईकोर्ट का तंज

  • अदालत ने प्रशासन के उस हलफनामे पर कड़ा ऐतराज जताया जिसमें कहा गया था कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं। अदालत पहले इस जवाब के आधार पर याचिका को बंद करने का विचार कर रही थी, परंतु वास्तविक हालात ने दृष्टिकोण पूरी तरह बदल दिया।
  • खंडपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा:“ऐसा प्रतीत होता है कि वातावरण को प्रदूषित करने वाला यह असहनीय शोर प्रशासन के उन संबंधित अधिकारियों को सुनाई नहीं देता, जो इसे रोकने के लिए वैधानिक रूप से जिम्मेदार हैं। हालांकि प्रतिवादियों ने यह समझाने के लिए विस्तृत जवाब दाखिल किया है कि ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविक जमीनी हकीकत (Ground Reality) बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है।”

3. अनुच्छेद 21 के तहत शांतिपूर्ण नींद और जीवन का अधिकार याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि देर रात तक बजने वाले डीजे, लाउडस्पीकर और धार्मिक/सार्वजनिक कार्यक्रमों का अनियंत्रित शोर नागरिकों के भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त गरिमापूर्ण जीवन, स्वास्थ्य और शांतिपूर्ण नींद के मौलिक अधिकार का सीधा हनन करता है। अदालत ने माना कि यह स्थिति केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि जनस्वास्थ्य और विशेष रूप से बच्चों व बुजुर्गों के जीवन के लिए सीधा खतरा बन चुकी है।

Also Read; Santa Claus Dress: ‘वी-बाज़ार’ ने कर्मचारियों को सांता क्लॉज़ की लाल टोपी पहनने के लिए किया विवश; जानिए प्रबंधन को हाईकोर्ट की चेतावनी

उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए मुख्य निर्देश

  1. कानूनों का सख्त प्रवर्तन:
    • मध्य प्रदेश पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को निर्देश दिया गया कि वे ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 तथा मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 (MP Kolahal Niyantran Adhiniyam, 1985) के वैधानिक प्रावधानों और तय डेसिबल (Decibel) सीमाओं का अक्षरशः पालन कराएं।
  2. उल्लंघनकर्ताओं पर दंडात्मक कार्रवाई:
    • अनुमति से अधिक डेसिबल पर साउंड सिस्टम बजाने, निर्धारित समय (रात 10 बजे के बाद) सीमा का उल्लंघन करने वाले डीजे संचालकों, आयोजकों और वाहनों के खिलाफ उपकरण जब्ती और आपराधिक अभियोजन सहित सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
  3. साइलेंस जोन की सूची का प्रकाशन:
    • प्रशासन को निर्देश दिया गया कि वह अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, अदालतों आदि के 100 मीटर के दायरे में आने वाले ‘साइलेंस जोन’ (Silence Zones) की पूरी सूची व्यापक प्रसार वाले प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित करे।
    • इसके साथ ही, जनता से आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए जाएं ताकि अन्य महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों को भी साइलेंस जोन घोषित किया जा सके।
  4. शिकायत हेल्पलाइन नंबर सार्वजनिक करना:
    • नागरिकों की सुविधा के लिए समर्पित टेलीफोन और हेल्पलाइन नंबर सार्वजनिक किए जाएं, ताकि ध्वनि प्रदूषण से पीड़ित कोई भी व्यक्ति तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा सके और पुलिस तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करे।
  5. एक सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट:
    • राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को आदेश दिया गया कि वे इन निर्देशों के क्रियान्वयन पर एक सप्ताह के भीतर नई अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) अदालत में प्रस्तुत करें।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: अमिताभ उपाध्याय व अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य [रिट याचिका (PIL) – मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर पीठ)]
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • याचिकाकर्ताओं की ओर से: अधिवक्ता अभिनव धनोदकर
    • मध्य प्रदेश राज्य की ओर से: शासकीय अधिवक्ता (Government Advocate) प्रद्युम्न किबे
    • अन्य प्रतिवादियों/प्राधिकरणों की ओर से: अधिवक्ता ऋषभ सिंह चौहान आदि
  • प्रासंगिक कानून एवं वैधानिक नियम:
    • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 (दिन और रात के लिए औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय और साइलेंस जोन में ध्वनि तीव्रता की सांविधिक सीमाएं)
    • मध्य प्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 (MP Kolahal Niyantran Adhiniyam, 1985)
    • भारत का संविधान – अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार – प्रदूषण मुक्त वातावरण और शांति से सोने का अधिकार)
    • भारत का संविधान – अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का जनहित याचिका क्षेत्राधिकार)
  • संबद्ध ऐतिहासिक न्यायिक नजीरें:
    • In Re: Noise Pollution (2005, सुप्रीम कोर्ट 2-जज पीठ) — ‘ध्वनि प्रदूषण जीवन के अधिकार में गंभीर हस्तक्षेप है; किसी भी धर्म या उत्सव के नाम पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच बिना विशेष अनुमति लाउडस्पीकर बजाने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है; शांति का अधिकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से सर्वोपरि है।’
    • फोरम, प्रिवेंशन ऑफ एन्वायर्नमेंटल एंड साउंड पॉल्यूशन बनाम भारत संघ (सुप्रीम कोर्ट) — ‘ध्वनि प्रदूषण स्वास्थ्य को अपरिवर्तनीय क्षति पहुंचाता है; राज्य अधिकारियों की यह वैधानिक बाध्यता है कि वे ध्वनि नियंत्रण नियमों का स्वतः संज्ञान लेकर पालन कराएं।’
    • डॉ. अशोक बनाम कर्नाटक राज्य (सुप्रीम कोर्ट) — ‘अस्पतालों और स्कूलों के आसपास साइलेंस जोन के नियमों का उल्लंघन संज्ञेय अपराध के समान देखा जाना चाहिए।’
  • पीठ: न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई (मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर पीठ)
  • अगली सुनवाई: मामले की अगली प्रगति और अनुपालन रिपोर्ट की समीक्षा के लिए अदालत ने इसे 5 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया है।

Noise Pollution: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतमध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर पीठ)
न्यायाधीशन्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर एवं न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई
मामला प्रकारजनहित याचिका (PIL – अमिताभ उपाध्याय व अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य)
मुख्य घटनाजुलूस के लाउडस्पीकर के कारण 7 वर्षीय बच्चे की दुखद मृत्यु
संबंधित कानूनध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 और एमपी कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985
अगली सुनवाई5 अक्टूबर, 2026
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
scattered clouds
24.5 ° C
24.5 °
24.5 °
97 %
1kmh
37 %
Sun
32 °
Mon
31 °
Tue
33 °
Wed
32 °
Thu
34 °

Recent Comments