विवाद की वजह और कर्मचारियों का प्रदर्शन
- वकालतनामा न होने पर बहस: कर्मचारियों के अनुसार, एक महिला अधिवक्ता एक मामले की फाइल देखने आई थीं। फाइल में उनका वकालतनामा (Vakalatnama) मौजूद नहीं था, जिसके कारण अहलमद ने फाइल दिखाने से इनकार कर दिया। इस बात पर कहासुनी बढ़ी और अधिवक्ता ने कर्मचारी को थप्पड़ जड़ दिया।
- अदालत परिसर में धरना: इस दुर्व्यवहार के विरोध में डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (DSCEWA) के नेतृत्व में दर्जनों कर्मचारी रोहिणी कोर्ट के मध्य परिसर में धरने पर बैठ गए। ऊपरी मंजिलों की बालकनियों से कर्मचारियों ने ‘स्टाफ एकता जिंदाबाद’ के नारे लगाए और कोर्ट की सभी अदालतों का काम रोक दिया।
- सुरक्षा की मांग: एसोसिएशन के महासचिव अरुण यादव ने कहा कि अदालती कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट को एक नीति बनानी चाहिए, जिसमें कर्मचारियों की सीटों पर पैनिक बटन (Panic Buttons) और पर्याप्त संख्या में CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया जाए।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी की सबसे व्यस्त जिला अदालतों में शुमार रोहिणी कोर्ट कॉम्प्लेक्स में एक महिला वकील द्वारा अदालती रिकॉर्ड कीपर (अहलमद/Ahlmad) को कथित रूप से थप्पड़ मारे जाने की घटना ने 23 सितंबर 2026 को पूरे न्यायिक कामकाज को पूरी तरह ठप कर दिया।
23 सितंबर 2026 को हुई हडताल की कहानी
कोर्ट परिसर के केंद्रीय प्रांगण में दर्जनों कर्मचारी जमीन पर धरने पर बैठ गए, जबकि सैकड़ों अन्य कर्मियों ने ऊपरी मंजिलों की बालकनियों से “स्टाफ एकता जिंदाबाद” के नारे लगाकर विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने बार (Bar) और बेंच के प्रशासनिक तंत्र के बीच परस्पर सम्मान और कोर्ट स्टाफ की सुरक्षा के लिए ठोस नीतिगत सुरक्षा उपायों की मांग उठाई। सामान्य दिनों में 70 से अधिक न्यायिक अधिकारियों (Judges) की अदालतों में लगभग 3,600 मुकदमों की सुनवाई करने वाले इस परिसर में कोर्ट कर्मचारियों के धरने और काम बंद हड़ताल (Pen-down/Sit-in Strike) के चलते वकीलों और वादकारियों को बैरंग लौटना पड़ा।
विवाद का मूल कारण: वकालतनामा बनाम केस फाइल का निरीक्षण
अदालती सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद की शुरुआत अहलमद कक्ष में हुई:
- वकालतनामा का अभाव: संबंधित अदालत की केस फाइल का निरीक्षण करने पहुंची एक महिला अधिवक्ता की ओर से वकालतनामा (Vakalatnama/Memo of Appearance) रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं था।
- फाइल दिखाने से इनकार: न्यायिक नियमों और प्रक्रिया संहिता के अनुसार, अहलमद (कोर्ट रिकॉर्ड कीपर) ने बिना वैध वकालतनामे के अधिवक्ता को केस डायरी और न्यायिक पत्रावली दिखाने से मना कर दिया।
- बहस और कथित थप्पड़: इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। आरोप है कि बहस के दौरान महिला अधिवक्ता ने अपना आपा खो दिया और ड्यूटी पर तैनात अहलमद को कथित रूप से थप्पड़ जड़ दिया।
- घटना की खबर फैलते ही कोर्ट स्टाफ आक्रोशित हो गया और उन्होंने काम पूरी तरह बंद कर परिसर के मुख्य हॉल में धरना शुरू कर दिया।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें: सुरक्षा उपाय, सीसीटीवी और पैनिक बटन
डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (DSCEWA) के महासचिव अरुण यादव ने आंदोलन का नेतृत्व करते हुए अदालत परिसरों में कर्मचारियों के साथ होने वाले कथित दुर्व्यवहार के खिलाफ सुरक्षात्मक ढांचे (Institutional Safeguards) की मांग की।
एसोसिएशन ने निम्नलिखित मुख्य मांगें उठाईं:
- सीसीटीवी कैमरों की व्यापक निगरानी: अदालत परिसर के प्रत्येक अहलमद रूम, रीडर डेस्क और रिकॉर्ड रूम में पर्याप्त हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि घटनाओं की वस्तुनिष्ठ रिकॉर्डिंग हो सके।
- पैनिक बटन (Panic Buttons) की स्थापना: दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा एक आधिकारिक सुरक्षा नीति बनाई जाए, जिसके तहत कोर्ट स्टाफ की सीटों पर आपातकालीन पैनिक बटन लगाए जाएं, जिससे किसी भी टकराव या हमले की स्थिति में तुरंत सुरक्षा कर्मियों को अलर्ट भेजा जा सके।
- पारस्परिक सम्मान और प्रोटोकॉल: बार काउंसिल और न्यायिक प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि अदालती पत्रावलियों के निरीक्षण के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के नियमों (Inspection of Records Rules) का वकीलों द्वारा कड़ाई से पालन किया जाए।
प्रधान जिला जज की मध्यस्थता और सुलह-समझौता
हड़ताल के चलते न्यायिक व्यवस्था चरमराने के बाद स्थिति को संभालने के लिए उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई:
- त्रिपक्षीय बैठक: प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (रोहिणी उत्तर), रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व सचिव, और कोर्ट एम्प्लॉइज एसोसिएशन के महासचिव अरुण यादव के बीच लगभग एक घंटे तक मैराथन बैठक चली।
- माफी और खेद प्रकट: बैठक के दौरान संबंधित अधिवक्ता ने पीड़ित अहलमद और अन्य कर्मचारियों से घटना पर औपचारिक रूप से माफी मांगी। इसके साथ ही बार एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी घटना पर गहरा खेद व्यक्त किया।
- कामकाज की बहाली: रोहिणी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता राजीव तेहलान ने मामले के शांतिपूर्ण समाधान की पुष्टि करते हुए बताया:“कामकाज अब सामान्य रूप से फिर शुरू हो गया है। माहौल अब पूरी तरह सौहार्दपूर्ण है। यह एक गलतफहमी (Misunderstanding) थी। दोनों पक्षों ने एक साथ बैठकर बातचीत की और आपसी सहमति से इस मसले को सुलझा लिया।”
समझौते के बाद गुरुवार सुबह से रोहिणी कोर्ट परिसर में सामान्य न्यायिक कामकाज, मुकदमों की पेशी और अदालती सुनवाई पूरी तरह बहाल हो गई।
Rohini Court:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | रोहिणी जिला अदालत परिसर, दिल्ली |
| विवाद का कारण | अहलमद द्वारा वकालतनामा न होने पर फाइल दिखाने से मना करने पर वकील द्वारा कथित थप्पड़ मारना |
| स्टाफ का विरोध | ‘स्टाफ एकता जिंदाबाद’ के नारों के साथ अदालती काम-काज का पूर्ण बहिष्कार |
| स्टाफ की प्रमुख मांग | स्टाफ की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी (CCTV) और पैनिक बटन (Panic Buttons) की नीति |
| समाधान | बार एसोसिएशन और जिला न्यायाधीश की मौजूदगी में वकील की माफी के बाद गुरुवार से काम फिर बहाल |

