मुख्य संकेतक (Key Indicators)
- उम्र और योग्यता में असंगति: कांग्रेस ने तर्क दिया कि अगर हासीरानी रथ की उम्र 60 से अधिक है, तो 1965 में 10वीं पास करने का दावा विरोधाभासी है (जिसका अर्थ यह होगा कि उन्होंने बहुत कम उम्र में पढ़ाई पूरी की या शपथ पत्र में गलत जानकारी दी गई है)। इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 36 के तहत गंभीर त्रुटि बताया गया।
- भाजपा और चुनाव आयोग का पक्ष:
- भाजपा: पार्टी ने कोर्ट को बताया कि प्रत्याशी ने वास्तव में 1980 में 10वीं पास की थी और शपथ पत्र में 1965 दर्ज होना एक टाइपोग्राफिकल (टाइपिंग) भूल थी।
- चुनाव आयोग (ECI): ECI ने कहा कि 17 सितंबर को नामांकन की जांच (Scrutiny) पूरी हो चुकी थी और उस समय कोई शिकायत नहीं मिली। याचिकाकर्ता ने 21 सितंबर को शिकायत दर्ज कराई, जब नामांकन स्वीकार हो चुका था।
- सुप्रीम कोर्ट के नज़ीर का हवाला: हाईकोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग बनाम अशोक कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया, जिसके अनुसार यदि अदालत के हस्तक्षेप से चल रहे चुनाव में बाधा, रुकावट या देरी होती है, तो न्यायिक हस्तक्षेप से बचना चाहिए।
- सबूतों की आवश्यकता: कोर्ट ने माना कि यह त्रुटि वास्तविक है या जानबूझकर दी गई गलत जानकारी, इसका फैसला बिना विस्तृत सबूतों (Evidence) के चुनाव के इस चरण पर नहीं किया जा सकता।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे (फॉर्म 26) में दर्ज आयु और शैक्षणिक वर्ष की विसंगतियों को लेकर दायर याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ ने व्यवस्था दी कि यदि अदालत इस स्तर पर नामांकन पत्रों की जांच या विसंगतियों के गुण-दोष पर फैसला सुनाती है, तो इसका सीधा प्रभाव 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले मतदान पर पड़ेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 329(b) और स्थापित चुनावी न्यायशास्त्र के अनुसार, ऐसे विवादों को चुनाव संपन्न होने के बाद केवल एक औपचारिक चुनाव याचिका (Election Petition) के माध्यम से ही उठाया जा सकता है। उच्च न्यायालय ने कांग्रेस पार्टी द्वारा नामांकन पत्र की वैधता को चुनौती देने वाली रिट याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि मतदान की प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद न्यायिक हस्तक्षेप चुनाव को बाधित या विलंबित करेगा।
उच्च न्यायालय के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां
1. ‘इस स्तर पर हस्तक्षेप चुनाव प्रक्रिया को सीधे प्रभावित करेगा’ न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने चुनावी समय-सारणी का संज्ञान लेते हुए कहा:
“यदि इस स्तर पर यह न्यायालय प्रतिवादी संख्या 5 (हसीरानी रथ) के नामांकन पत्रों के संबंध में याचिकाकर्ता संख्या 2 (कांग्रेस नेत्री मीता चक्रवर्ती) द्वारा उठाए गए मुद्दे का निपटारा करता है, तो यह सीधे तौर पर वर्तमान चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित (Directly affects) करेगा।”
अदालत ने रेखांकित किया कि 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है और 9 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित है। ऐसे में अंतिम क्षणों में नामांकन की वैधता पर न्यायिक फैसला देना चुनावी कैलेंडर को पटरी से उतार देगा।
2. सारवान त्रुटि (Substantial Defect) का निर्धारण साक्ष्य का विषय
- अदालत ने माना कि यह तय करना कि क्या हलफनामे में दर्ज विसंगति लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 36(4) के तहत एक “सारवान प्रकृति की त्रुटि” (Defect of a substantial character) है या केवल एक लिपिकीय/टाइपिंग त्रुटि (Typographical Error), बिना विस्तृत गवाही और दस्तावेजी साक्ष्य के रिट क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 226) में तय नहीं किया जा सकता।
- पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत सक्षम चुनाव याचिका दायर कर इस मुद्दे को उठाने के लिए स्वतंत्र हैं।
3. सुप्रीम कोर्ट की ‘अशोक कुमार’ नजीर का संदर्भ
- अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय—भारत निर्वाचन आयोग बनाम अशोक कुमार (2000)—का हवाला दिया।
- शीर्ष अदालत ने व्यवस्था दी थी कि चुनावी प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद न्यायिक हस्तक्षेप को सामान्यतः तब तक स्थगित रखा जाना चाहिए जब तक कि चुनाव संपन्न न हो जाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया में कोई बाधा, रुकावट या अनावश्यक देरी न हो।
विवाद का तथ्यात्मक आधार: हलफनामे (फॉर्म 26) में क्या था विरोधाभास?
कांग्रेस पार्टी ने भाजपा उम्मीदवार के नामांकन फॉर्म 26 में निम्नलिखित तथ्यों के टकराव को आधार बनाया था:
- घोषित आयु: हसीरानी रथ ने अपनी आयु “60+ वर्ष” घोषित की थी।
- 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने का वर्ष: उसी हलफनामे में उन्होंने उल्लेख किया कि उन्होंने वर्ष 1965 में चौखाली गंगा पद्मा मिलन कन्या विद्यापीठ (हाई स्कूल) से 10वीं कक्षा उत्तीर्ण की थी।
- कांग्रेस का गणितीय तर्क: यदि कोई व्यक्ति 1965 में 10वीं पास करता है, तो 2026 में उसकी आयु लगभग 75 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए, न कि मात्र “60+ वर्ष”।
- कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता ऋत्जु घोषाल ने दलील दी कि दोनों में से कोई एक घोषणा पूरी तरह झूठी है। रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत संवीक्षा (Scrutiny) के दौरान इस गंभीर विसंगति की जांच करनी चाहिए थी और नामांकन पत्र को खारिज किया जाना चाहिए था।
निर्वाचन आयोग और भाजपा का प्रतिवाद
1. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO):
- वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्री नायडू (ECI हेतु) और वरिष्ठ अधिवक्ता जिष्णु चौधरी (CEO हेतु) ने याचिका का विरोध किया:
- नामांकन पत्रों की संवीक्षा 17 सितंबर 2026 को पूरी हो चुकी थी और उस समय किसी भी पक्षकार ने कोई आपत्ति (Objection) दर्ज नहीं कराई थी।
- कांग्रेस ने यह शिकायत काफी देर से, 21 सितंबर 2026 को दर्ज कराई, जब नाम वापसी की अवधि भी समाप्त हो चुकी थी।
- वैधानिक रूप से विहित प्रारूप (Form 26) में हलफनामा दाखिल किया गया था। केवल गलत जानकारी के आरोप के आधार पर संवीक्षा के बाद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता।
2. भाजपा प्रत्याशी (हसीरानी रथ) का पक्ष:
- रथ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप कर ने प्रस्तुत किया कि प्रत्याशी ने वास्तव में वर्ष 1980 में 10वीं कक्षा की पढ़ाई की थी।
- हलफनामे में वर्ष ‘1965’ दर्ज होना केवल एक टाइपोग्राफिकल त्रुटि (Typographical Error) थी, न कि जानबूझकर किया गया कोई कपट या दुर्भावनापूर्ण कृत्य।
नंदीग्राम उपचुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि
- सीट रिक्त होने का कारण: पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के आम विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखते हुए नंदीग्राम सीट से इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते यह उपचुनाव आवश्यक हुआ।
- भाजपा प्रत्याशी: भाजपा ने 15 सितंबर को हसीरानी रथ को अपना उम्मीदवार घोषित किया। वे शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी रहे स्वर्गीय चंद्रनाथ रथ की माता हैं, जिनकी मई 2026 में हत्या कर दी गई थी।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी व अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग व अन्य [WPA संख्या…/2026 – कलकत्ता उच्च न्यायालय]
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ताओं (WBPCC व मीता चक्रवर्ती) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता ऋत्जु घोषाल (साथ में अधिवक्ता संजय बनर्जी, शोएब रऊफ, अजितेश पांडे व अन्य)
- भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्री नायडू (साथ में अधिवक्ता प्रतीक कुमार एवं दीपक शर्मा)
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता जिष्णु चौधरी (साथ में अधिवक्ता संस्कृति अग्रवाल व अन्य)
- प्रतिवादी संख्या 5 (हसीरानी रथ) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप कर (साथ में अधिवक्ता पीयूष बिस्वास एवं तमोध्न प्रमाणिक)
- प्रासंगिक कानून एवं संवैधानिक प्रावधान:
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RP Act, 1951):
- धारा 36 (नामांकन पत्रों की संवीक्षा और अस्वीकृति के आधार – Substantial Defect)
- धारा 80 एवं 100 (चुनाव याचिका के माध्यम से चुनाव को चुनौती देने के आधार)
- धारा 125A (चुनावी हलफनामे में असत्य जानकारी देने या जानकारी छिपाने पर दंडात्मक प्रावधान)
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 329(b) (चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक, चुनाव याचिका की अनिवार्यता)
- भारत का संविधान – अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का असाधारण रिट क्षेत्राधिकार)
- निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 (Conduct of Elections Rules, 1961) – प्रारूप 26 (Form 26 Affidavit)
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RP Act, 1951):
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- भारत निर्वाचन आयोग बनाम अशोक कुमार (2000, सुप्रीम कोर्ट) — ‘अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय चुनाव प्रक्रिया में तब तक हस्तक्षेप नहीं करेंगे जब तक कि यह चुनाव को आगे बढ़ाने में सहायक न हो; चुनाव को बाधित या रोकने वाला कोई भी आदेश नहीं दिया जाना चाहिए।’
- एन.पी. पोन्नुस्वामी बनाम रिटर्निंग ऑफिसर (1952, सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ) — ‘नामांकन पत्र की अस्वीकृति या स्वीकृति की वैधता का परीक्षण केवल चुनाव के बाद दायर चुनाव याचिका (Election Petition) द्वारा ही किया जा सकता है, रिट याचिका द्वारा नहीं।’
- किसान शंकर कथोरे बनाम अरुण दत्तात्रेय सावंत (2014, सुप्रीम कोर्ट) — ‘हलफनामे में गैर-प्रकटीकरण या गलत बयानी की गंभीरता का निर्धारण साक्ष्यों के आधार पर चुनाव याचिका में ही संभव है।’
- पीठ: न्यायमूर्ति कृष्णा राव (कलकत्ता उच्च न्यायालय)
- अंतिम आदेश: रिट याचिका पूरी तरह खारिज; 6 अक्टूबर को नंदीग्राम उपचुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार कराने का मार्ग प्रशस्त; याचिकाकर्ताओं को चुनाव बाद इलेक्शन पिटीशन दायर करने की छूट।
Nandigram By-Election: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) |
| पीठ | न्यायमूर्ति कृष्णा राव |
| याचिकाकर्ता | पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (नेता मीता चक्रवर्ती द्वारा) |
| प्रतिवादी उम्मीदवार | हासीरानी रथ (भाजपा प्रत्याशी, नंदीग्राम उपचुनाव) |
| मुख्य विवाद | फॉर्म 26 शपथ पत्र में उम्र “60+ वर्ष” दर्शाना और 10वीं पास करने का वर्ष 1965 बताना (जो एक-दूसरे से मेल नहीं खाते)। |
| अदालत का फैसला | याचिका खारिज; चुनाव प्रक्रिया जारी रहेगी। परिणाम के बाद ‘इलेक्शन पिटीशन’ दायर करने की छूट। |

