Monday, September 21, 2026
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Judge’s Row 11: अब देश के बार एसोसिएशन भी आंदोलन में कूदे, लिखा पत्र

Judge’s Row 11: गुजरात हाई कोर्ट, केरल हाई कोर्ट, कर्नाटक हाई कोर्ट, लखनऊ बार एसोसिएशन और इलाहाबाद हाई कोर्ट सहित छह बार प्रमुखों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना को पत्र लिखा।

एसोसिएशन की यह है मांग

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के तबादले के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। न्यायमूर्ति वर्मा के निवास पर भारी मात्रा में नकदी मिलने के बाद यह मांग उठाई गई है।

मुख्य न्यायाधीश से की मुलाकात

बाद में, मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने दिल्ली में बार एसोसिएशनों के प्रमुखों से मुलाकात की। पत्र में बार एसोसिएशनों ने न्यायमूर्ति वर्मा के 30, तुगलक क्रेसेंट स्थित निवास से नकदी बरामदगी के मामले में जवाबदेही और उचित जांच की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने आग्रह किया है कि दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए और न्यायाधीशों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

तबादला रद्द करने का अनुरोध

बार एसोसिएशनों ने मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से न्यायमूर्ति वर्मा के तबादले को रद्द करने तथा उनके न्यायिक कार्यों को छोड़कर सभी प्रशासनिक कार्यों को वापस लेने का अनुरोध किया है।संयुक्त बयान में कहा गया, “यदि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के तबादले के आदेश को वापस नहीं लिया गया, तो बार एसोसिएशन के अध्यक्ष इलाहाबाद में बैठक करेंगे और इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के साथ एकजुटता दिखाएंगे।” यह बयान तब आया है जब इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन न्यायमूर्ति वर्मा को उनके मूल कोर्ट में स्थानांतरित करने के खिलाफ है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के निर्देश के बाद उन्हें डीरॉस्टर कर दिया था।

इन हाउस कमेटी जल्द करेगी न्यायमूर्ति से मुलाकात

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तीन-सदस्यीय इन-हाउस कमेटी इस सप्ताह न्यायमूर्ति वर्मा से मुलाकात करने की संभावना है। जांच से पहले, उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल, मनेका गुरुस्वामी, अरुंधति कटजू और अधिवक्ता तारा नरूला से कानूनी सलाह ली है। इस महत्वपूर्ण जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि न्यायमूर्ति वर्मा का भविष्य क्या होगा, क्योंकि उन पर आरोप है कि उनके घर से “चार से पांच आधे जले हुए बोरे भारतीय मुद्रा नोटों” के पाए गए थे।

न्यायमूर्ति वर्मा ने आरोप को किया खारिज

न्यायमूर्ति वर्मा ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया है और कहा है कि उनके या उनके परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा उनके घर के स्टोररूम में कोई नकदी कभी नहीं रखी गई थी।

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