Tuesday, October 27, 2026
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CJP Protest: सुप्रीम कोर्ट में कोई याचिका दाखिल ही नहीं हुई थी…मीडिया ने की गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग, CJI सूर्यकांत का बड़ा स्पष्टीकरण

CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता के मामले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मीडिया रिपोर्टिंग पर कड़ी नाराजगी जताते हुए खुला स्पष्टीकरण दिया है।

मीडिया में सुप्रीम कोर्ट के रुख को पूरी तरह से गलत तरीके से पेश किया

24 जुलाई 2026 को खुली अदालत के दौरान चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि मीडिया में सुप्रीम कोर्ट के रुख को पूरी तरह से गलत तरीके से पेश किया गया था। अदालत में कोई याचिका (Writ Petition) तक दाखिल नहीं की गई थी, केवल एक पत्र-प्रतिनिधित्व (Letter Representation) भेजा गया था। इसके बावजूद मीडिया में यह गलत और गैर-जिम्मेदाराना खबरें चलाई गईं कि मुख्य न्यायाधीश ने याचिका सूचीबद्ध (List) करने से इनकार कर दिया। आज सुबह 10 बजे तक रजिस्ट्री में एक पन्ना भी दाखिल नहीं हुआ था।

मामला क्या है?: ‘मेंटेनिंग ऑवर’ में हुई मौखिक टिप्पणियों की गलत रिपोर्टिंग

22 जुलाई को अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने सीजेपी (CJP) प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा अदालत के समक्ष मौखिक रूप से (Oral Mentioning) उठाया था। उस समय पीठ ने मामला सुनने से इनकार करते हुए कहा था कि अदालत के पास वीडियो फुटेज देखने का समय नहीं है और समय नष्ट न किया जाए।

इसके बाद कई मीडिया संस्थानों ने यह रिपोर्ट छाप दी कि शीर्ष अदालत ने पुलिस बर्बरता के खिलाफ दायर ‘याचिका की तत्काल सुनवाई से इनकार’ कर दिया है।

चीफ जस्टिस का कड़ा रुख: “बिना पेपर दाखिल हुए याचिका कैसे मानी जाए?”

शुक्रवार को जब वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने एक अन्य मामला मेंशन किया, तो CJI सूर्यकांत ने इस रिपोर्टिंग का स्वतः उल्लेख किया।

रजिस्ट्री में शून्य दस्तावेज़: CJI ने बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से जांच कराई। शुक्रवार सुबह तक इस मामले से जुड़ा एक भी दस्तावेज़ या औपचारिक याचिका पंजीकृत नहीं हुई थी।

प्रतिनिधित्व बनाम याचिका: “अधिवक्ता मिश्रा या किसी अन्य द्वारा केवल एक पत्र/प्रतिनिधित्व भेजा गया था। बिना औपचारिक रूप से केस दर्ज किए किसी वकील के एक पत्र को रिट याचिका कैसे मान लिया जाए?” CJI ने सवाल उठाया।

मीडिया की जवाबदेही पर सवाल: मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि मीडिया सभी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर बिना तथ्यों की पुष्टि किए रिपोर्टिंग कर रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

विवाद का पृष्ठभूमि (Background): 20 जुलाई का ‘चलो संसद’ मार्च

छात्रों का प्रदर्शन: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जुलाई को CJP के बैनर तले हजारों युवाओं ने ‘चलो संसद’ मार्च निकाला था।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प: लुटियंस दिल्ली में हुए इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन (Pellet Guns) के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगे, जिसमें दर्जनों छात्र घायल हुए।

दिल्ली हाई कोर्ट का रुख: जहां सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक केस दाखिल न होने के कारण सुनवाई नहीं हुई, वहीं दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

विधिक फैक्ट शीट: CJP प्रदर्शन सुनवाई विवाद (24 जुलाई 2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्चतम न्यायालय की विधिक स्थिति और विवरण
संबंधित अदालतभारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India), नई दिल्ली
माननीय मुख्य न्यायाधीशCJI सूर्यकांत
मूल विवाद20 जुलाई 2026 को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई
अदालत का स्पष्टीकरणसुप्रीम कोर्ट में कोई रिट याचिका दाखिल नहीं हुई थी; केवल एक पत्र-प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ था।
विधिक स्थितिऔपचारिक याचिका दर्ज न होने के कारण सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामला लंबित नहीं था।
हाई कोर्ट स्थितिदिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस व केंद्र को नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक नियमों के तहत कोई औपचारिक रिट याचिका दाखिल नहीं होती, तब तक अदालत किसी प्रशासनिक पत्र या मौखिक उल्लेख पर न्यायिक आदेश पारित नहीं कर सकती।

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