घटनाक्रम और कानूनी प्रक्रिया
- शांति बांड का उल्लंघन और गिरफ्तारी:10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका ने एक साल तक “शांति और सदाचार बनाए रखने” के बांड पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बावजूद, 13 अक्टूबर को दोनों नेताओं ने बैरिकेड्स पार कर जंतर-मंतर परिसर में प्रवेश किया और तिरंगा फहराया। शांति बांड का उल्लंघन करने पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर 14 अक्टूबर को 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया।
- हिरासत में विस्तार और कड़े शब्द:19 अक्टूबर को हिरासत अवधि खत्म होने पर SEM कोर्ट ने उनकी न्यायिक हिरासत 2 दिनों के लिए और बढ़ा दी थी। एसीपी ऋतु राज ने अपने आदेश में कहा था कि दोनों का आचरण कानून के प्रति सम्मान नहीं दिखाता और वे गैर-अधिसूचित क्षेत्रों में बार-बार प्रदर्शन करने के आदती हैं।
- दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका और वापसी:सोमवार के SEM आदेश को दोनों नेताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद द्वारा यह ध्यान दिलाए जाने पर कि मामले की सुनवाई खुद SEM अदालत में चल रही है और शांति बांड का उल्लंघन हुआ है, वकीलों (अभिक चिमनी और प्रांजल अबरोल) ने याचिका वापस ले ली।
नेताओं द्वारा कोर्ट में दिया गया वचनपत्र (Written Undertaking)
1. लिखित मुचलके के मुख्य बिंदु:
नेताओं की ओर से पेश मुचलके में कहा गया: “हम जंतर-मंतर पर तब तक प्रदर्शन का कोई आह्वान नहीं करेंगे जब तक कि इसे कानून के अनुसार पुनः अधिसूचित नहीं कर दिया जाता। हम दोहराते हैं कि हमारा कोई भी भविष्य का प्रदर्शन संविधान के दायरे के भीतर ही होगा। हमारा न्यायपालिका और SEM कोर्ट पर पूरा भरोसा है।”
2. मीडिया बयानों पर मौखिक माफी:
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के वकील ने अदालत का ध्यान आकर्षित किया कि 19 अक्टूबर को मीडिया में SEM अदालत के अधिकार क्षेत्र को कम आंकने वाले बयान दिए गए थे। इस पर दास और रांका के वकीलों ने अदालत से बिना शर्त मौखिक माफी (Verbal and Unconditional Apology) मांगी और भविष्य में ऐसा न करने का आश्वासन दिया।
नई दिल्ली: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS, 2023) की धारा 126, 127 सहपठित धारा 135(3) (शांति व्यवस्था बनाए रखने व लोक प्रशांति भंग होने से रोकने हेतु बंधपत्र / Bonds for Keeping the Peace and Tranquillity), पुलिस आयुक्तालय प्रणाली के तहत सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) द्वारा विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) की न्यायिक शक्तियों का प्रयोग, पूर्व में निष्पादित शांति बंधपत्र का उल्लंघन (Breach of Peace Bond) होने पर न्यायिक हिरासत, तथा संविधान के अनुच्छेद 19(1)(b) (शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार बनाम कानून सम्मत पाबंदियां) पर दिल्ली की कार्यपालक मजिस्ट्रेट अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख कार्यकर्ताओं—आरटीआई कार्यकर्ता व पत्रकार सौरव दास तथा आशुतोष रांका—को तिहाड़ जेल में 7 दिनों की न्यायिक हिरासत बिताने के बाद बुधवार शाम रिहा कर दिया गया।
मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन स्थित विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत की पीठासीन अधिकारी एवं दिल्ली पुलिस की सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) ऋतु राज ने दोनों नेताओं द्वारा अदालत के समक्ष प्रस्तुत बिना शर्त लिखित वचनपत्र (Written Undertaking) और मौखिक माफीनामे को स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया। दोनों नेताओं को जांच पूरी होने तक ₹50,000 के व्यक्तिगत मुचलके (Personal Bond) और इतनी ही राशि के जमानतदार (Surety Bond) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को नियत की गई है।
विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत के मुख्य निष्कर्ष एवं दर्ज वचनपत्र
1. नेताओं द्वारा प्रस्तुत बाध्यकारी लिखित वचनपत्र (Undertaking)
ACP/SEM ऋतु राज द्वारा जारी आदेश में दोनों कार्यकर्ताओं के उस लिखित बयान को दर्ज किया गया जिसके आधार पर हिरासत समाप्त की गई: “हम शांति, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक प्रशांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और वचनपत्र को दोहराते हैं। हम विशेष रूप से यह बयान देते हैं कि हम जंतर-मंतर पर तब तक किसी भी विरोध-प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे जब तक कि उसे कानून के अनुसार पुनः अधिसूचित (De-notified in accordance with Law) न कर दिया जाए। हम पुनः दोहराते हैं कि भविष्य में किया जाने वाला कोई भी विरोध-प्रदर्शन पूरी तरह से भारत के संविधान के दायरे (Four Corners of the Constitution) के भीतर ही किया जाएगा।”
2. धारा 135(3) BNSS के तहत शांति बंधपत्र पर्याप्त:
- आदेश में SEM ने स्पष्ट किया कि लोक शांति बनाए रखने हेतु अब निरंतर जेल में रखना आवश्यक नहीं है:“भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 135(3) के तहत शांति भंग या सार्वजनिक प्रशांति में व्यवधान को रोकने के लिए परिकल्पित तात्कालिक उपायों को आज अदालत में दिए गए लिखित वचनपत्र और शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र के निष्पादन के माध्यम से पर्याप्त रूप से सुरक्षित किया जा सकता है।अतः, विशेष रूप से इस न्यायालय के समक्ष दिए गए लिखित वचनपत्र के पश्चात, इस स्तर पर आगे न्यायिक हिरासत आवश्यक प्रतीत नहीं होती है।”
3. कोर्ट की गरिमा पर मीडिया बयानों के लिए बिना शर्त माफी:
- सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के वकील ने SEM अदालत के संज्ञान में लाया कि 19 अक्टूबर को मीडिया में ऐसे बयान दिए गए थे जो SEM अदालतों की न्यायिक गरिमा और प्राधिकार को कमतर आंकते थे।
- कार्यकर्ताओं के वकीलों (अधिवक्ता अभिक चिमनी व प्रांजल अबरोल) ने अदालत के समक्ष “मौखिक और बिना शर्त माफी” (Verbal and Unconditional Apology) मांगी और आश्वासन दिया कि भविष्य में अदालत की मर्यादा के विपरीत कोई आचरण नहीं दोहराया जाएगा।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (10 से 21 अक्टूबर 2026)
| कालखंड / तिथि | तथ्यात्मक स्थिति एवं अदालती घटनाक्रम |
| 10 अक्टूबर 2026 | सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली हवाई अड्डे पर पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया। उन्हें 1 वर्ष तक शांति और अच्छा आचरण बनाए रखने के लिए शांति बंधपत्र (Good Behaviour Bond) निष्पादित करने के बाद छोड़ा गया था। |
| 13 अक्टूबर 2026 (उल्लंघन) | पूर्व में हस्ताक्षरित शांति बंधपत्र की शर्तों का उल्लंघन करते हुए दोनों नेता जंतर-मंतर पहुंचे, बैरिकेड्स फांदकर गेट पर चढ़े और राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) फहराया। जंतर-मंतर वर्तमान में विरोध-प्रदर्शनों के लिए गैर-अधिसूचित (Denotified Site) क्षेत्र है। पुलिस ने तुरंत हिरासत में लिया। |
| 14 अक्टूबर 2026 | SEM अदालत ने शांति भंग के आरोप में दोनों को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया। |
| 19 अक्टूबर 2026 | 5 दिन की अवधि पूरी होने पर पेशी हुई। SEM ऋतु राज ने पाया कि प्रस्तुत किए गए जमानतदार (Sureties) अयोग्य थे और उनका आचरण “कानून के प्रति सम्मान” नहीं दर्शाता। अदालत ने न्यायिक हिरासत 2 दिन (21 अक्टूबर तक) और बढ़ा दी। |
| 20-21 अक्टूबर: दिल्ली हाईकोर्ट का रुख | दोनों ने 19 अक्टूबर के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद ने स्पष्ट किया कि दोनों ने पहले ही शांति बॉन्ड का उल्लंघन किया है और SEM अदालत में आज सुनवाई लंबित है; उचित कानूनी उपाय सत्र अदालत में पुनरीक्षण (Revision Petition) का है। इसके बाद याचिका वापस ले ली गई। |
| 21 अक्टूबर 2026 (शाम) | मंदिर मार्ग स्थित SEM कोर्ट में लिखित वचनपत्र और ₹50,000 का बॉन्ड प्रस्तुत करने के बाद दोनों नेताओं की तिहाड़ जेल से औपचारिक रिहाई का आदेश जारी हुआ। |
विधिक एवं सांविधिक विश्लेषण: BNSS में SEM की शक्तियां और शांति बंधपत्र
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 व 127 (पुरानी CrPC धारा 107/111):
- यह प्रावधान दंडात्मक नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से निवारक (Preventive) है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को अपराध करने से पहले ही कानून के दायरे में बांधना है।
- यदि कोई व्यक्ति बॉन्ड भरने के बाद दोबारा प्रतिबंधित क्षेत्र में जाकर आंदोलन करता है, तो यह बॉन्ड की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन (Forfeiture of Bond) माना जाता है, जिससे मजिस्ट्रेट को उसे जांच पूरी होने तक हिरासत में भेजने का अधिकार मिल जाता है।
- धारा 135(3) BNSS के तहत तात्कालिक उपाय:
- जब तक मजिस्ट्रेट यह जांच पूरी नहीं कर लेता कि क्या किसी व्यक्ति से दीर्घकालिक शांति बॉन्ड लिया जाना चाहिए, तब तक वह धारा 135(3) के तहत अंतरिम बंधपत्र निष्पादित करा सकता है।
- वर्तमान मामले में अदालत ने माना कि लिखित वचनपत्र और ₹50,000 का जमानत बंधपत्र सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय हैं।
- दिल्ली हाईकोर्ट की प्रक्रियात्मक व्यवस्था (वैकल्पिक उपचार का सिद्धांत):
- न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद ने यह स्पष्ट कर दिया कि SEM के आदेशों के विरुद्ध सीधे उच्च न्यायालय में रिट याचिका (अनुच्छेद 226) पोषणीय नहीं होगी, क्योंकि CrPC/BNSS के तहत सत्र न्यायालय (Sessions Court) के समक्ष आपराधिक पुनरीक्षण (Revision Petition) का सक्षम सांविधिक वैकल्पिक मंच उपलब्ध है।
विधिक विवरण एवं उपस्थित अधिवक्ता
- अदालत संदर्भ: विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत, नई दिल्ली जिला (मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन परिसर)
- पीठासीन अधिकारी: ऋतु राज, सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) सह विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM), दिल्ली पुलिस
- आदेश की तिथि: 21 अक्टूबर 2026
- संबद्ध उच्च न्यायालय कार्यवाही: सौरव दास व अन्य बनाम राज्य [आपराधिक रिट याचिका – दिल्ली उच्च न्यायालय, पीठ: न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद – 21 अक्टूबर 2026 को वापस ली गई]
- अगली सुनवाई तिथि: 23 अक्टूबर 2026 (SEM कोर्ट)
विधिक प्रतिनिधित्व:
- अभियुक्त नेताओं (सौरव दास व आशुतोष रांका) की ओर से: अधिवक्ता अभिक चिमनी (Advocate Abhik Chimni) एवं अधिवक्ता प्रांजल अबरोल (Advocate Pranjal Abrol)
- अभियोजन / राज्य की ओर से: दिल्ली पुलिस अभियोजन विंग
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) — धारा 126 (शांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति), धारा 127 (प्रक्रियात्मक आदेश), धारा 130 (जांच) एवं धारा 135(3) (शांति बनाए रखने हेतु अंतरिम आदेश/बंधपत्र)
- दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 — धारा 70 (कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियों का पुलिस अधिकारियों में निहित होना)
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 19(1)(b) (शांतिपूर्वक और निरायुध सम्मेलन की स्वतंत्रता) एवं अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- निवारक न्यायशास्त्र और शांति वचनपत्र का महत्व: ‘शांति बंधपत्र का उल्लंघन करने पर न्यायिक हिरासत में भेजे गए व्यक्तियों को यदि अदालत के समक्ष लिखित हलफनामा देकर प्रतिबंधित क्षेत्र में न जाने और संवैधानिक सीमाओं में रहने का ठोस आश्वासन प्राप्त होता है, तो आगे की हिरासत अनावश्यक हो जाती है; ₹50,000 का बंधपत्र और वचनपत्र शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त विधिक सुरक्षा है।’
- अंतिम परिणाम: 7 दिन बाद तिहाड़ जेल से दोनों नेताओं की रिहाई मंजूर; ₹50,000 के व्यक्तिगत और जमानती मुचलके पर रिहाई का औपचारिक आदेश जारी; जंतर-मंतर पर प्रदर्शन न करने का लिखित वचनपत्र अदालत के रिकॉर्ड पर दर्ज।
CJP Row:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत, मंदिर मार्ग थाना, नई दिल्ली |
| पीठासीन अधिकारी | एसीपी ऋतु राज (विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट) |
| हिरासत में लिए गए नेता | सौरव दास और आशुतोष रांका (कॉकरोच जनता पार्टी – CJP) |
| विवाद का कारण | डी-नोटिफाइड स्थल (जंतर-मंतर) पर अवैध रूप से घुसकर तिरंगा फहराना व प्रदर्शन करना और शांति बांड (Peace Bond) का उल्लंघन। |
| संबंधित धाराएं | भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 135(3) (शांति भंग व सार्वजनिक शांति बनाए रखने के उपाय)। |
| अदालत का अंतिम आदेश | शर्तों के साथ रिहाई; ₹50,000 का बांड और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन न करने का लिखित मुचलका। अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी। |

