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At A Glance | एक नज़र में बड़ी ख़बर
- उच्चस्तरीय समिति का गठन: केंद्र सरकार ने डॉक्टरों को मिलने वाले मुफ़्त उपहारों (Gifts), स्पांसर्ड विदेशी यात्राओं और अन्य प्रलोभनों पर रोक लगाने तथा दवा विपणन (Pharma Marketing) नियमों की समीक्षा के लिए 3-सदस्यीय पैनल बनाया है।
- पैनल के प्रमुख और सदस्य: नीति आयोग के सदस्य एम. श्रीनिवास की अध्यक्षता वाली इस समिति में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन और मेदांता अस्पताल के सीएमडी डॉ. नरेश त्रेहन शामिल हैं।
- समीक्षा का मुख्य दायरा: समिति दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों की प्रिस्क्रिप्शन (दवा लिखने के फैसले) को प्रभावित करने वाले अनैतिक तरीकों, उपहारों, आतिथ्य (Hospitality) और अन्य प्रलोभनों की जांच करेगी।
- समयसीमा (Timeline): समिति अपनी पहली बैठक के 2 महीने के भीतर हितधारकों (Stakeholders) से परामर्श कर अपनी सिफारिशें फार्मास्युटिकल विभाग (DoP) को सौंपेगी।
- कानूनी रूप देने पर विचार: पैनल इस बात का आकलन करेगा कि क्या वर्तमान UCPMP 2024 (स्वैच्छिक कोड) के स्थान पर सख्त वैधानिक (Statutory) या कानूनी तंत्र लागू करने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली: क्या डॉक्टरों को दवा कंपनियों की तरफ से मिलने वाले महंगे तोहफ़े, मुफ़्त विदेशी दौरे, लक्जरी होटल प्रवास और प्रायोजित सम्मेलनों के दिन अब लदने वाले हैं? केंद्र सरकार ने दवा कंपनियों (Pharma Companies) और डॉक्टरों के बीच के अनैतिक रिश्तों तथा दवा प्रचार के नियमों की व्यापक समीक्षा करने के लिए एक 3-सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।
इस उच्चस्तरीय समिति की कमान नीति आयोग के सदस्य एम. श्रीनिवास को सौंपी गई है। समिति का मुख्य उद्देश्य दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन व्यवहार को प्रभावित करने वाले अनैतिक साधनों पर नकेल कसना और देश में दवा विपणन प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुपालन सुनिश्चित करना है।
समिति की संरचना और प्रमुख सदस्य
केंद्र सरकार द्वारा गठित इस 3-सदस्यीय समिति में स्वास्थ्य और प्रशासनिक क्षेत्र की नामचीन हस्तियों को शामिल किया गया है:
- एम. श्रीनिवास (अध्यक्ष): सदस्य, नीति आयोग।
- प्रीति सूदन (सदस्य): पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव।
- डॉ. नरेश त्रेहन (सदस्य): प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ एवं अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक (CMD), मेदांता अस्पताल।
फार्मास्युटिकल विभाग (DoP) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह समिति अनैतिक दवा विपणन प्रथाओं से जुड़े सभी मुद्दों का व्यापक अध्ययन करेगी और इन्हें रोकने के लिए आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगी।
जांच के दायरे में क्या-क्या होगा? (Focus Areas)
यह समिति मुख्य रूप से उन तरीकों पर ध्यान केंद्रित करेगी जिनका उपयोग दवा कंपनियां अपनी दवाओं की बिक्री बढ़ाने और डॉक्टरों को आकर्षित करने के लिए करती हैं:
- उपहार और नकद/गैर-नकद प्रलोभन (Gifts & Incentives): डॉक्टरों और उनके परिवारों को दिए जाने वाले महंगे उपहार, उपकरण या प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष वित्तीय लाभ।
- प्रायोजित यात्राएं और आतिथ्य (Sponsored Travel & Hospitality): देश-विदेश में होने वाली सम्मेलनों (Conferences) के नाम पर डॉक्टरों के हवाई टिकट, 5-स्टार होटलों में ठहराव और मनोरंजन का खर्च उठाना।
- स्वतंत्र चिकित्सीय निर्णय में बाधा: यह जांचना कि क्या इन प्रलोभनों के कारण डॉक्टर मरीजों के लिए सही दवा के बजाय उन कंपनियों की महंगी या अनावश्यक दवाएं लिख रहे हैं जो उन्हें अधिक लाभ पहुंचाती हैं।
- निगरानी और प्रवर्तन प्रणाली (Enforcement Mechanism): वर्तमान अनुपालन तंत्र कितना प्रभावी है और इसमें क्या कमियां हैं, इसकी गहन जांच।
वर्तमान नियम UCPMP 2024 और इसकी सीमाएं
वर्तमान में देश में दवा कंपनियों के विपणन और प्रचार गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए Uniform Code for Pharmaceutical Marketing Practices (UCPMP) 2024 लागू है। इसने 2015 के पुराने कोड का स्थान लिया था।
UCPMP 2024 की सबसे बड़ी कमी:
- स्वैच्छिक प्रकृति (Voluntary Code): यह कोड उद्योग-संचालित और मुख्य रूप से स्वैच्छिक है।
- कानूनी दंड का अभाव: इस कोड में नियम उल्लंघन करने वाली दवा कंपनियों पर दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई (Penalties) करने का कोई विशिष्ट वैधानिक अधिकार नहीं है।
इसी वजह से लंबे समय से यह बहस चल रही है कि क्या केवल स्वैच्छिक दिशा-निर्देश अनैतिक अभ्यासों को रोकने के लिए पर्याप्त हैं या इनके लिए एक कड़ा कानून (Statutory Law) लाया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में जारी कानूनी लड़ाई
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दवा विपणन प्रथाओं को कानूनी दायरे में लाने का मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के समक्ष भी विचाराधीन है।
- FMRAI की याचिका: ‘फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया’ (FMRAI) ने 2021 में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी।
- वैधानिक ढांचे की मांग: FMRAI के प्रतिनिधि शांतनु मित्रा के अनुसार, एसोसिएशन की मांग है कि दवा कंपनियों के अनैतिक प्रचार को रोकने के लिए एक कानूनी रूप से लागू होने वाला वैधानिक ढांचा (Statutory Framework) बनाया जाए, क्योंकि स्वैच्छिक कोड निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं।
- केंद्र सरकार का रुख: अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि एक अलग वैधानिक ढांचा लागू करने के बजाय, वर्तमान व्यवस्था को ही बेहतर प्रकटीकरण (Disclosures), अधिक पारदर्शिता और शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करके प्रभावी बनाया जा सकता है।
आगे का रास्ता और समयसीमा (Timeline & Recommendations)
फार्मास्युटिकल विभाग (DoP) के अनुसार:
- 2 महीने में रिपोर्ट: समिति अपनी पहली आधिकारिक बैठक की तारीख से दो महीने के भीतर उद्योग विशेषज्ञों, उपभोक्ता संगठनों और चिकित्सा निकायों सहित सभी हितधारकों से सलाह-मशविरा करके अपनी सिफारिशें सौंपेगी।
- सख्त कानूनों की संभावना: समिति इस बात की विशेष जांच करेगी कि क्या UCPMP 2024 को नए नियामक (Regulatory) या वैधानिक (Statutory) उपायों के जरिए कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया जाना चाहिए।
यदि समिति सख्त कानूनों की सिफारिश करती है, तो आने वाले समय में दवा कंपनियों और डॉक्टरों के बीच अनैतिक लेन-देन पर पूरी तरह विराम लग सकता है, जिसका सीधा फायदा आम मरीजों को सस्ती और सही दवाओं के रूप में मिलेगा।
Pharma Freebies: Key Indicators | मुख्य बिंदु और विवरण
| मुख्य बिंदु (Key Indicator) | विवरण एवं तथ्य (Details & Facts) |
| समिति का नाम/लक्ष्य | अनैतिक दवा विपणन प्रथाओं की समीक्षा समिति (Pharma Marketing Review Panel) |
| समिति के अध्यक्ष | एम. श्रीनिवास (सदस्य, नीति आयोग) |
| अन्य प्रमुख सदस्य | प्रीति सूदन (पूर्व स्वास्थ्य सचिव) और डॉ. नरेश त्रेहन (CMD, मेदांता) |
| संबंधित सरकारी विभाग | फार्मास्युटिकल विभाग (Department of Pharmaceuticals – DoP) |
| समीक्षा की समयसीमा | पहली बैठक से 2 महीने (Within Two Months) |
| वर्तमान लागू नियम | UCPMP 2024 (Uniform Code for Pharmaceutical Marketing Practices) |
| सर्वोच्च न्यायालय का मामला | FMRAI (मेडिकल एवं सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन) की 2021 की याचिका |

