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मामले की पृष्ठभूमि: क्या था पूरा घटनाक्रम?
- स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ पोर्टल और ब्लॉकिंग (सितंबर 2026):नवंबर 2023 में स्थापित स्वतंत्र डिजिटल मीडिया ‘NoCap’ के फेसबुक पर लगभग 1.62 लाख फॉलोअर्स थे। 28 सितंबर 2026 को पोर्टल को फेसबुक से एक नोटिफिकेशन मिला कि उसकी सामग्री को भारत में प्रतिबंधित (Restricted) कर दिया गया है।
- अस्पष्ट सूचना और प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन:फेसबुक द्वारा भेजी गई सूचना में केवल सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) की धारा 79(3)(b) के तहत जारी एक नोटिस का हवाला दिया गया था। हालांकि, इसमें यह नहीं बताया गया कि नोटिस किस कानूनी प्राधिकरण ने जारी किया था, कौन सा कंटेंट आपत्तिजनक पाया गया था, या ब्लॉकिंग का आधार क्या था। NoCap को अपना पक्ष रखने का कोई अवसर (Opportunity of Hearing) भी नहीं दिया गया।
- मौलिक अधिकारों और व्यवसाय को नुकसान:याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि पूरे पेज को ब्लॉक करना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार व आजीविका की स्वतंत्रता) का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। ब्लॉकिंग के कारण पोर्टल की रीच और राजस्व (Revenue) में भारी गिरावट आई है।
अदालत में उठाए गए मुख्य कानूनी बिंदु
1. “फैक्ट्स उजागर किए बिना ब्लॉकिंग पर समीक्षा संभव नहीं”:
याचिका में कहा गया कि सरकार और मेटा द्वारा आदेश और आपत्तिजनक सामग्री का ब्योरा न दिए जाने के कारण याचिकाकर्ता कानूनी उपचार का सही उपयोग नहीं कर पा रहा है। इसलिए, सरकार को मूल ब्लॉकिंग आदेश अदालत के समक्ष पेश करना चाहिए।
2. हाईकोर्ट का रुख:
- जस्टिस ज़ियाद रहमान ने केंद्र सरकार के वकील (CGC) और राज्य सरकार के वकील (GP) को यह स्पष्ट निर्देश प्राप्त करने को कहा कि क्या प्रतिवादी संख्या 5 (मेटा/फेसबुक) को NoCap का अकाउंट ब्लॉक करने के संबंध में कोई औपचारिक आदेश जारी किया गया था या नहीं।
कोच्चि (केरल): सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) की धारा 69A (सामग्री को ब्लॉक करने की प्रक्रियात्मक शर्तें), धारा 79(3)(b) (मध्यवर्ती संस्थाओं / Intermediaries की विधिक देयता व सरकारी नोटिस), सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021, भारत का संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) व अनुच्छेद 19(1)(g) (प्रेस/व्यापार की स्वतंत्रता), तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Audi Alteram Partem) के तहत डिजिटल समाचार पोर्टल्स के विधिक संरक्षण पर केरल हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है।
केरल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ज़ियाद रहमान ए.ए. (Justice Ziyad Rahman AA) की एकल पीठ ने मलयालम स्वतंत्र डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म ‘NoCap’ के मुख्य संपादक हैदर अली के. द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार (Union Government), केरल राज्य सरकार और मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. (Meta Platforms Inc.) को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
अदालत ने केंद्र सरकार के वकील (CGC) और राज्य सरकार के वकील (GP) को निर्देश दिया कि वे संबंधित विभागों से तत्काल निर्देश प्राप्त कर अदालत को अवगत कराएं कि क्या प्रतिवादी संख्या 5 (मेटा/फेसबुक) को भारत में NoCap के आधिकारिक फेसबुक पेज को ब्लॉक या प्रतिबंधित करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया था। मामले को अगली सुनवाई के लिए 5 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।
उच्च न्यायालय के समक्ष उठाए गए मुख्य कानूनी बिंदु एवं दलीलें
1. ‘बिना आदेश की प्रति या कारण बताए ब्लॉक करना प्राकृतिक न्याय का हनन’
याचिकाकर्ता हैदर अली के. की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने तर्क दिया:
- 28 सितंबर 2026 को फेसबुक से एक संक्षिप्त सूचना प्राप्त हुई जिसमें कहा गया कि भारत सरकार द्वारा जारी एक कानूनी नोटिस के आधार पर पोर्टल की सामग्री को भारत में प्रतिबंधित (Restricted) कर दिया गया है।
- फेसबुक की इस सूचना में केवल आईटी अधिनियम की धारा 79(3)(b) का सामान्य संदर्भ दिया गया था, किंतु:
- यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस सक्षम प्राधिकारी या सरकारी विभाग ने यह आदेश जारी किया।
- पोर्टल के किस विशिष्ट वीडियो, पोस्ट या सामग्री को आपत्तिजनक (Objectionable/Unlawful Content) माना गया।
- पूरे फेसबुक पेज को भारत में ब्लॉक करने का विधिक आधार या कारण क्या है।
- याचिका में कहा गया कि आदेश की प्रति और आधार छिपाए जाने के कारण याचिकाकर्ता यह समझने में असमर्थ है कि यह कार्रवाई किसी ठोस सामग्री पर आधारित है या पूरी तरह मनमानी है।
2. ‘विशिष्ट आपत्तिजनक सामग्री के बजाय पूरे पेज को ब्लॉक करना असंगत’
- याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यदि किसी विशेष सामग्री या रिपोर्ट पर सरकार को कानूनी आपत्ति थी, तो केवल उस विशिष्ट URL या पोस्ट को हटाने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।
- किसी स्थापित समाचार संगठन के पूरे सोशल मीडिया पेज को ब्लॉक कर देना ‘आनुपातिकता के सिद्धांत’ (Doctrine of Proportionality) और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (प्रेस की स्वतंत्रता) तथा अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार/व्यवसाय की स्वतंत्रता) का सीधा उल्लंघन है।
3. आर्थिक क्षति और दर्शकों की पहुंच में भारी गिरावट:
- याचिका में बताया गया कि नवंबर 2023 में स्थापित इस स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म के फेसबुक पर लगभग 1.62 लाख (162,000) फॉलोअर्स थे।
- बिना कोई पूर्व कारण बताओ नोटिस दिए या सुनवाई का अवसर प्रदान किए अचानक लगाए गए इस भू-प्रतिबंध (Geo-blocking) के कारण पोर्टल की डिजिटल पहुंच और विज्ञापनों से होने वाले राजस्व में भारी गिरावट आई है, जिससे इसके संचालन पर अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।
4. ‘श्रेया सिंघल’ नजीर और धारा 69A की गोपनीयता का दुरुपयोग:
- याचिकाकर्ता के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ [(2015) 5 SCC 1] में व्यवस्था दी थी कि किसी भी सामग्री को ब्लॉक करने के आदेश में उचित कारण दर्ज होने चाहिए और प्रभावित पक्ष को सुनवाई का अवसर मिलना अनिवार्य है।
- धारा 69A के तहत गोपनीयता के प्रावधानों की आड़ में पूरे समाचार मंच को बिना आदेश दिए ब्लॉक करना डिजिटल मीडिया को चुप कराने का असंवैधानिक तरीका है।
प्रक्रियात्मक कालक्रम एवं तथ्यात्मक विवरण (2023–2026)
| चरण / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
| याचिकाकर्ता | हैदर अली के. — मुख्य संपादक, ‘NoCap’ (डिजिटल समाचार मंच)। |
| प्रतिवादी पक्ष | 1. भारत संघ (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय – MeitY / गृह मंत्रालय) 2. केरल राज्य सरकार 3. मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. (प्रतिवादी संख्या 5 – फेसबुक संचालक) व अन्य। |
| प्लेटफॉर्म की प्रकृति | नवंबर 2023 में स्थापित स्वतंत्र मलयालम डिजिटल समाचार आउटलेट; फेसबुक पर 1.62 लाख से अधिक पाठक/दर्शक। |
| विवादित कार्रवाई | 28 सितंबर 2026 को फेसबुक द्वारा भारत में NoCap के पूरे आधिकारिक पेज की पहुंच पर रोक (Access Restricted) लगाई गई। |
| याचिकाकर्ता की मुख्य प्रार्थना | 1. प्रतिवादियों को विवादित ब्लॉकिंग आदेश और संबंधित सामग्री अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया जाए। 2. NoCap के फेसबुक पेज पर लगाए गए प्रतिबंध को तुरंत हटाकर भारत में पूर्ण पहुंच बहाल की जाए। |
| हाईकोर्ट का अंतरिम निर्देश | केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों को निर्देश दिया गया कि वे संबंधित अधिकारियों से यह सत्यापित करके बताएं कि क्या मेटा को कोई औपचारिक ब्लॉकिंग आदेश जारी किया गया था; अगली सुनवाई 5 नवंबर को तय। |
विधिक एवं संवैधानिक विश्लेषण: ‘आईटी कानून की धारा 79(3)(b) बनाम धारा 69A’
- धारा 69A बनाम धारा 79(3)(b) का टकराव:
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत सामग्री को ब्लॉक करने की विशेष शक्ति धारा 69A में निहित है, जिसके तहत 2009 के नियम बने हैं (जिसमें समिति द्वारा समीक्षा और प्रकाशक को नोटिस देना अनिवार्य है)।
- दूसरी ओर, धारा 79(3)(b) मध्यवर्ती संस्थाओं (जैसे फेसबुक) को तीसरे पक्ष की सामग्री के दायित्व से मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour Protection) की शर्त है, जिसमें सक्षम सरकार द्वारा गैर-कानूनी सामग्री की सूचना मिलने पर उसे हटाने का प्रावधान है।
- यदि सरकार धारा 79(3)(b) के नोटिस की आड़ में बिना धारा 69A की प्रक्रिया अपनाए सीधे पूरे समाचार पोर्टल को ब्लॉक करवाती है, तो यह वैधानिक प्रक्रिया को बायपास करने का गंभीर प्रशासनिक प्रश्न खड़ा करता है।
- कर्नाटक हाईकोर्ट का ट्विटर (X Corp) बनाम भारत संघ निर्णय:
- उच्च न्यायालयों ने पूर्व में भी स्पष्ट किया है कि भले ही आईटी नियमों में गोपनीयता का खंड हो, किंतु जब किसी नागरिक या प्रेस संस्थान के मौलिक अधिकारों का हनन होता है, तो न्यायालयीन समीक्षा (Judicial Review) के लिए आदेश के कारणों का प्रकटीकरण आवश्यक है।
विधिक विवरण एवं उपस्थित अधिवक्ता
- न्यायालय: केरल उच्च न्यायालय (मूल रिट क्षेत्राधिकार)
- केस संदर्भ: हैदर अली के. बनाम भारत संघ एवं अन्य [WP(C) – केरल हाईकोर्ट]
- पीठ: न्यायमूर्ति ज़ियाद रहमान ए.ए. (एकल पीठ)
- आदेश की तिथि: 26 अक्टूबर 2026
- आगामी सुनवाई की तिथि: 5 नवंबर 2026
विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता (NoCap मुख्य संपादक) की ओर से: अधिवक्ता प्रशांत सुगाथन, अधिवक्ता वर्षा भास्कर, एवं अधिवक्ता मालविका के.
- केंद्र सरकार की ओर से: केंद्रीय सरकारी वकील (CGC)
- केरल राज्य की ओर से: सरकारी वकील (GP)
- फेसबुक/मेटा की ओर से: मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. के पैनल अधिवक्ता
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) — धारा 69A (सामग्री ब्लॉक करने की शक्ति), धारा 79(3)(b) (मध्यवर्ती संस्थाओं की देयता), एवं सूचना प्रौद्योगिकी (ब्लॉकिंग नियम), 2009
- सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार/पेशा करने की स्वतंत्रता), एवं अनुच्छेद 226
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म्स और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का विधिक मानक: ‘किसी समाचार संगठन के पूरे सोशल मीडिया पेज को बिना कारण बताए, बिना विशिष्ट गैर-कानूनी सामग्री को रेखांकित किए और बिना आदेश की प्रति दिए ब्लॉक करना प्राकृतिक न्याय और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) का उल्लंघन है; सरकार को यह स्पष्ट करना अनिवार्य है कि क्या ऐसा कोई ब्लॉकिंग आदेश जारी किया गया था और उसका कानूनी आधार क्या था।’
- वर्तमान स्थिति: केरल उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार को 5 नवंबर 2026 तक निर्देश प्राप्त कर यह स्पष्ट करने का आदेश दिया है कि क्या मेटा को NoCap के पेज को ब्लॉक करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया था।
News Portal: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति ज़ियाद रहमान ए. ए. (Justice Ziyad Rahman AA) |
| मामला/साइटेशन | हैदर अली के. बनाम भारत संघ व अन्य (Hyder Ali K v. Union of India & Ors.) |
| याचिकाकर्ता | हैदर अली के. (मुख्य संपादक, NoCap) | अधिवक्ता प्रशांत सुगाथन, वर्षा भास्कर और मालविका के. द्वारा प्रतिनिधित्व। |
| प्रतिवादी | 1. केंद्र सरकार (इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय) 2. केरल राज्य सरकार 3. मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta/Facebook) |
| मूल विवाद | 28 सितंबर 2026 को IT एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत बिना कारण या सुनवाई का अवसर दिए NoCap का फेसबुक पेज (1.62 लाख फॉलोअर्स) ब्लॉक करना। |
| अदालत का आदेश | निर्देश जारी; केंद्र और राज्य सरकार से 5 नवंबर 2026 तक पूछा कि क्या ब्लॉक करने का कोई आदेश जारी हुआ था। |

