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मामले की पृष्ठभूमि: क्या था पूरा विवाद?
- पारदर्शिता हेतु राज्य की नई नीति:महाराष्ट्र सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और मनमानी रोकने के लिए संस्थागत स्तर (Institutional Level) पर होने वाले काउंसलिंग राउंड्स को समाप्त कर दिया था। इसके तहत अब सभी 100% सीटों का आवंटन केवल राज्य CET सेल की केंद्रीकृत प्रक्रिया से ही किया जाएगा।
- निजी कॉलेजों की चिंता और 26 अक्टूबर की कट-ऑफ:परभणी मेडिकल कॉलेज (जहाँ 2 सीटें खाली हैं) और अन्य कॉलेजों—जैसे पालघर के वेदांता इंस्टीट्यूट (45 खाली सीटें) व कर्जत के तासगांवकर मेडिकल इंस्टीट्यूट (15 खाली सीटें)—ने तर्क दिया कि यदि 26 अक्टूबर की कट-ऑफ तारीख तक सीटें खाली रह गईं, तो उन्हें भारी वित्तीय नुकसान होगा। इसलिए उन्हें 26 अक्टूबर की आधी रात तक संस्थागत स्तर पर सीटें भरने की अनुमति दी जाए।
- राज्य का विरोध:प्रवेश नियामक प्राधिकरण ने तर्क दिया कि यदि प्रत्येक कॉलेज को अपनी अलग प्रतीक्षा सूची (Waitlist) बनाने की अनुमति दी गई, तो इससे गंभीर प्रशासनिक और व्यावहारिक चुनौतियाँ खड़ी होंगी और राज्य की पारदर्शी नीति प्रभावित होगी।
हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी तर्क
1. “राहत की मांग समय से पहले है”:
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि चूंकि राज्य की आधिकारिक काउंसलिंग प्रक्रिया अभी सक्रिय है और चल रही है, इसलिए यह मान लेना कि सीटें स्थायी रूप से खाली रह जाएंगी, इस चरण पर केवल एक अनुमान (Speculative) है।
2. सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेने के निर्देश:
- पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य के अंतिम दौर के बाद भी सीटें unfilled (खाली) रह जाती हैं और प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ाने या स्वतंत्र प्रवेश प्रक्रिया चलाने की आवश्यकता पड़ती है, तो याचिकाकर्ताओं को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) का रुख करना होगा, क्योंकि प्रवेश की समय-सीमा में विस्तार का अधिकार केवल शीर्ष अदालत के पास है।
3. प्रशासनिक चुनौतियों पर ध्यान:
- हाईकोर्ट ने माना कि यद्यपि तकनीकी रूप से मैनुअल काउंसलिंग संभव हो सकती है, लेकिन वर्तमान में राज्य-स्तरीय काउंसलिंग के बीच में अलग-अलग कॉलेजों को अपनी प्रवेश प्रक्रिया चलाने की अनुमति देने से अव्यवस्था पैदा होगी।
औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर): राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 (NMC Act, 2019) के तहत मेडिकल प्रवेशों में पारदर्शिता, महाराष्ट्र गैर-सहायता प्राप्त निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थान (प्रवेश एवं शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2015, NEET UG 2026 की केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया (Centralised Admission Process – CAP), राज्य कॉमन एंट्रेंस टेस्ट सेल (Maharashtra CET Cell) द्वारा संस्थागत स्तर के राउंड समाप्त करने की नीतिगत वैधता, तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 26 अक्टूबर की कट-ऑफ समय-सीमा से पूर्व निजी कॉलेजों द्वारा प्रत्यक्ष मैनुअल काउंसलिंग की मांग पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने परभणी मेडिकल कॉलेज (Parbhani Medical College) द्वारा दायर याचिका को अपरिपक्व (Premature) करार देते हुए खारिज कर दिया है। कॉलेज ने राज्य-स्तरीय केंद्रीकृत काउंसलिंग के बाद रिक्त रह जाने वाली एमबीबीएस (MBBS) सीटों को भरने के लिए 26 अक्टूबर की मध्यरात्रि तक अपने स्तर पर स्वतंत्र संस्थागत प्रवेश राउंड आयोजित करने की अनुमति मांगी थी।
अदालत ने स्पष्ट व्यवस्था दी कि जब राज्य सरकार और सीईटी सेल की आधिकारिक काउंसलिंग प्रक्रिया अभी भी सक्रिय है और स्ट्रे वैकेंसी राउंड (Stray Vacancy Rounds) शेष हैं, तब निजी कॉलेजों की यह आशंका पूरी तरह काल्पनिक (Speculative) है कि सीटें स्थायी रूप से खाली रह जाएंगी। यदि राज्य-स्तरीय अंतिम राउंड समाप्त होने के बाद भी सीटें रिक्त रहती हैं, तो कट-ऑफ तारीख को आगे बढ़ाने और स्वतंत्र प्रवेश की अनुमति प्राप्त करने के लिए कॉलेजों को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष जाना होगा।
उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं विधिक व्यवस्था
1. ‘प्रवेश प्रक्रिया सक्रिय रहते स्वतंत्र संस्थागत राउंड की मांग अपरिपक्व’
औरंगाबाद पीठ ने याचिका की ग्राह्यता पर विचार करते हुए दर्ज किया:
- राज्य भर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों के आवंटन हेतु सीईटी सेल की काउंसलिंग प्रक्रिया अभी भी चल रही है और आगे के राउंड प्रस्तावित हैं।
- अदालत ने कहा:“चूंकि प्रवेश के राउंड अभी बाकी हैं, इसलिए याचिकाकर्ताओं की यह आशंका कि सीटें रिक्त रह जाएंगी, वर्तमान चरण में सुस्थापित नहीं (Not well-founded) है और पूरी तरह अपरिपक्व है।”
- राज्यव्यापी केंद्रीकृत प्रवेश कार्यक्रम के बीच में किसी भी निजी कॉलेज को अपनी समानांतर व्यवस्था चलाने की अनुमति देना पूरी चयन प्रणाली और योग्यता-आधारित पारदर्शिता को बाधित करेगा।
2. विधिक स्थिति: ‘मैनुअल काउंसलिंग संभव, किंतु अंतिम चरण के बाद और सुप्रीम कोर्ट के अधीन’:
- यद्यपि अदालत ने निजी कॉलेज के इस विधिक तर्क को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया कि केंद्रीकृत आवंटन समाप्त होने के बाद असाधारण परिस्थितियों में मैनुअल/संस्थागत काउंसलिंग तकनीकी रूप से संभव होती है, किंतु यह वर्तमान समय के अनुकूल नहीं है।
- पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया:“अंतिम राज्य-स्तरीय राउंड समाप्त होने के बाद, यदि सीटें वास्तव में रिक्त रह जाती हैं, तो याचिकाकर्ताओं को प्रवेश की अंतिम कट-ऑफ तारीख (Cut-off Date) के विस्तार और रिक्त सीटों को भरने की अनुमति मांगने के लिए शीर्ष अदालत (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाना होगा।”
3. वित्तीय नुकसान बनाम प्रशासनिक जटिलता व पारदर्शिता:
- कॉलेज ने तर्क दिया था कि अंतिम कट-ऑफ तिथि (26 अक्टूबर) को शाम 5 बजे से मध्यरात्रि तक उसे संस्थागत स्तर पर प्रवेश लेने की अनुमति दी जाए, ताकि सीटें खाली रहने पर उसे भारी वित्तीय नुकसान न उठाना पड़े।
- इसके विरोध में राज्य के प्रवेश नियामक प्राधिकरण (ARA / CET Cell) ने दलील दी कि यदि प्रत्येक निजी मेडिकल कॉलेज को अपनी अलग प्रतीक्षा सूची (Waitlist) बनाने और सीधे दाखिले की छूट दे दी गई, तो इससे भारी प्रशासनिक अराजकता पैदा होगी और केंद्रीकृत मेरिट प्रणाली का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। अदालत ने नियामक निकाय की दलील को स्वीकार किया।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं नीतिगत बदलाव (2026)
| चरण / विवरण | तथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे |
| याचिकाकर्ता | परभणी मेडिकल कॉलेज (PMC), परभणी, महाराष्ट्र। |
| प्रतिवादी पक्ष | महाराष्ट्र राज्य (चिकित्सा शिक्षा विभाग), एडमिशन रेगुलेटिंग अथॉरिटी (ARA) एवं राज्य CET Cell। |
| याचिकाकर्ता की मुख्य मांग | एमबीबीएस पाठ्यक्रम में रिक्त सीटों को भरने के लिए 26 अक्टूबर की शाम 5 बजे से रात 12 बजे तक कॉलेज स्तर पर स्वतंत्र काउंसलिंग राउंड आयोजित करने की अनुमति। |
| कॉलेज का आधार | सीटें खाली रहने पर संस्थान को आगामी वर्षों तक गंभीर वित्तीय नुकसान (Financial Loss) उठाना पड़ेगा; मैनुअल काउंसलिंग पूर्व में भी मान्य रही है। |
| राज्य का नीतिगत रुख (जुलाई 2026 सुधार) | विगत वर्षों में संस्थागत राउंड के दौरान निजी कॉलेजों द्वारा छात्रों से अत्यधिक डोनेशन मांगने, मेरिट की उपेक्षा करने और प्रवेश से वंचित करने की अनगिनत शिकायतों के बाद राज्य ने संस्थागत राउंड को पूरी तरह समाप्त कर 100% सीटें केंद्रीकृत कैप (CAP) के अधीन कर दी थीं। |
| अन्य कॉलेजों पर प्रभाव | परभणी कॉलेज में जहां केवल 2 सीटें रिक्त थीं, वहीं पालघर स्थित वेदांता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (45 रिक्त सीटें) और कर्जत स्थित तासगांवकर मेडिकल इंस्टीट्यूट (15 रिक्त सीटें) भी इस नीति से प्रभावित हैं और सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। |
| हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय | याचिका खारिज; चालू काउंसलिंग प्रक्रिया में कोई अंतरिम हस्तक्षेप नहीं; सुप्रीम कोर्ट ही समय-सीमा बढ़ाने के लिए सक्षम मंच। |
विधिक एवं शैक्षणिक विश्लेषण: ‘मेरिट बनाम संस्थागत मनमानी’
- संस्थागत राउंड को समाप्त करने की पृष्ठभूमि:
- पूर्ववर्ती वर्षों में स्ट्रे वैकेंसी राउंड के दौरान निजी मेडिकल कॉलेजों को सीटें सौंप दी जाती थीं, जहां अंतिम कुछ घंटों में कॉलेज बैकडोर से कम मेरिट वाले धनी अभ्यर्थियों को भारी डोनेशन लेकर सीटें आवंटित कर देते थे।
- महाराष्ट्र सरकार द्वारा जुलाई 2026 में 100% सीटों (मैनेजमेंट और एनआरआई कोटा सहित) को राज्य कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) सेल की ऑनलाइन केंद्रीकृत निगरानी में लाना इसी कदाचार को रोकने का एक बड़ा सुधारात्मक कदम था।
- कट-ऑफ तिथि और सुप्रीम कोर्ट का अनन्य क्षेत्राधिकार:
- सर्वोच्च न्यायालय ने प्रिया गुप्ता बनाम छत्तीसगढ़ राज्य [(2012) 7 SCC 433] में स्पष्ट कर दिया था कि देश भर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की अंतिम समय-सीमा का कड़ाई से पालन होना अनिवार्य है।
- उच्च न्यायालयों के पास मेडिकल प्रवेशों के लिए निर्धारित अखिल भारतीय कट-ऑफ तिथि को आगे बढ़ाने (Extension of Cut-off Date) की शक्ति नहीं है। यही कारण है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने निजी कॉलेजों को स्पष्ट किया कि वे उच्च न्यायालय में समय बर्बाद करने के बजाय सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) के माध्यम से गुहार लगाएं।
विधिक विवरण एवं वर्तमान स्थिति
- न्यायालय: बॉम्बे उच्च न्यायालय (औरंगाबाद पीठ / छत्रपति संभाजीनगर)
- केस संदर्भ: परभणी मेडिकल कॉलेज बनाम महाराष्ट्र राज्य, सीईटी सेल व अन्य [रिट याचिका – बॉम्बे उच्च न्यायालय]
- निर्णय की तिथि: 23 अक्टूबर 2026
- संबद्ध विषय: NEET UG 2026 काउंसलिंग, संस्थागत राउंड (Institute-level Round) की समाप्ति, 100% केंद्रीकृत ऑनलाइन प्रवेश (CAP), एवं 26 अक्टूबर कट-ऑफ समय-सीमा
प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 (NMC Act) — स्नातक चिकित्सा शिक्षा विनियम (GMER)
- महाराष्ट्र गैर-सहायता प्राप्त निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थान (प्रवेश एवं शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2015
- महाराष्ट्र सीईटी सेल नियम-2026 — 100% सीटों पर केंद्रीकृत ऑनलाइन आवंटन नियम
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार) एवं अनुच्छेद 142/136 (सुप्रीम कोर्ट की विशेष शक्तियां)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया में गैर-हस्तक्षेप का सिद्धांत: ‘जब तक राज्य की अधिकृत केंद्रीकृत काउंसलिंग प्रक्रिया चल रही है, तब तक किसी निजी संस्थान को वित्तीय नुकसान की आशंका के आधार पर अलग से संस्थागत प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती; ऐसी मांगें समय-पूर्व हैं; प्रवेश कट-ऑफ तिथि के विस्तार का अधिकार केवल सर्वोच्च न्यायालय में निहित है।’
- वर्तमान स्थिति व भावी कदम: बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद परभणी मेडिकल कॉलेज सहित प्रभावित निजी कॉलेज (वेदांता पालघर, तासगांवकर कर्जत आदि) 26 अक्टूबर की समय-सीमा को बढ़ाने और स्ट्रे सीटों को भरने के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की प्रक्रिया में हैं।
Medical Admission:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | बॉम्बे उच्च न्यायालय (औरंगाबाद पीठ) |
| याचिकाकर्ता | परभणी मेडिकल कॉलेज (महाराष्ट्र के अन्य निजी मेडिकल कॉलेजों के समर्थन के साथ) |
| प्रतिवादी | महाराष्ट्र राज्य CET सेल / राज्य प्रवेश नियामक प्राधिकरण (State Admission Regulatory Authority) |
| मूल विवाद | 26 अक्टूबर की अंतिम तिथि से पहले खाली बची सीटों को भरने के लिए निजी कॉलेजों द्वारा स्वयं ‘संस्थागत काउंसलिंग’ कराने की मांग। |
| राज्य की नीति | निजी कॉलेजों में शत-प्रतिशत (100%) पारदर्शिता लाने हेतु संस्थागत दौर (Institutional Rounds) को पूरी तरह समाप्त करना। |
| अदालत का फैसला | याचिका खारिज; वर्तमान में राहत देना समय पूर्व है। राज्य की काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि सीटें खाली रहती हैं तो कॉलेज सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं। |

