Wednesday, November 4, 2026
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Road Safety: हम महिलाओं और बच्चों को बसों का शिकार बनकर टायरों के नीचे कुचलकर मरने की अनुमति नहीं दे सकते; बार-बार गलती पर ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी दोनों जब्त हों

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मामले की पृष्ठभूमि और अदालती निर्देश

  1. अवास्तविक बस टाइम-टेबल पर सवाल:अदालत ने परिवहन आयुक्त से पूछताछ करते हुए पूछा कि क्या बसों की अवास्तविक समय-सारणी (Unrealistic Timetables) चालकों को एक-दूसरे से आगे निकलने और ओवर-स्पीडिंग के लिए उकसाती है। परिवहन आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि ‘केरल बस’ ऐप विकसित किया गया है तथा इसी महीने बस शेड्यूल में संशोधन किया जाएगा।
  2. अत्यधिक तेज गति से चलने वाली कारों (Supercars) पर निगरानी:पीठ ने निर्देश दिया कि रात के समय सड़कों पर अत्यधिक गति से दौड़ने वाली लक्जरी/स्पोर्ट्स कारों की पहचान की जाए। ऐसी गाड़ियों का दो दिनों के भीतर पता लगाकर सीधे वाहन मालिक और सक्षम प्राधिकारी को उल्लंघन की सूचना दी जानी चाहिए।
  3. एकीकृत सड़क सुरक्षा निगरानी मंच (Integrated Monitoring Platform):अदालत ने अपर एडवोकेट जनरल (AAG) मोहम्मद शाह पी.ए. को सड़क सुरक्षा निगरानी प्लेटफॉर्म विकसित करने की प्रक्रिया का नेतृत्व करने और DGP को एक विशेषज्ञ पुलिस अधिकारी को संचालन समिति (Steering Committee) में नामित करने का निर्देश दिया।

मुख्य विधिक व प्रशासनिक बिंदु

1. नियमों के जमीनी क्रियान्वयन पर जोर:

अदालत ने स्पष्ट किया कि MoRTH और PWD के मानक दिशानिर्देश केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें सड़कों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए।

2. तीन सप्ताह का समय:

हाईकोर्ट ने अधिकारियों को सड़क सुरक्षा और निगरानी प्लेटफॉर्म के क्रियान्वयन से जुड़ी ठोस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।

कोच्चि: भारत का संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और सुरक्षित आवागमन का मौलिक अधिकार), मोटर यान अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act, 1988) की धारा 19 (ड्राइविंग लाइसेंस का निलंबन व स्थायी रद्दीकरण) एवं धारा 207 (बिना परमिट या नियम उल्लंघन पर वाहनों को जब्त करने की शक्ति), सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के सुरक्षा नियम, लोक निर्माण विभाग (PWD) के मैनुअल, तथा सड़क सुरक्षा के सांविधिक प्रवर्तन पर केरल उच्च न्यायालय ने अत्यंत सख्त और गंभीर रुख अपनाया है।

केरल उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. (Justice Raja Vijayaraghavan V) और न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार (Justice KV Jayakumar) की खंडपीठ ने राज्य में निजी व सरकारी बसों की लापरवाही भरी ड्राइविंग, कारों की बेलगाम गति (Over-speeding) और रोजाना जा रही मासूम जानों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को ठोस उपचारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया।

खंडपीठ ने सुझाव दिया कि यदि कोई चालक बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाए और वाहन को जब्त (Impounded) कर लिया जाए। अदालत ने परिवहन आयुक्त से जवाब तलब किया कि जब PWD, MoRTH और IRC के स्पष्ट दिशानिर्देश मौजूद हैं, तो वे धरातल पर क्यों गायब हैं? इसके साथ ही, अदालत ने रात के समय अंधाधुंध गति से दौड़ने वाली ‘पोर्श’ और ‘फेरारी’ जैसी सुपरकारों की 48 घंटे के भीतर पहचान कर मालिकों पर कार्रवाई करने और एक एकीकृत सड़क सुरक्षा निगरानी प्लेटफॉर्म (Integrated Road Safety Monitoring Platform) विकसित करने के लिए पुलिस महानिदेशक (DGP) व अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) को निर्देश दिए।

उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां

1. ‘महिलाओं और बच्चों को बसों के टायरों के नीचे कुचलने नहीं दे सकते’:

न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. ने सार्वजनिक परिवहन और निजी बसों की जानलेवा ड्राइविंग पर कड़ा रोष जताते हुए टिप्पणी की: *”हम केवल मूकदर्शक बनकर महिलाओं और बच्चों को बसों का शिकार बनने (Fall prey to the buses) और उनके टायरों के नीचे जाकर कुचलकर मरने की अनुमति नहीं दे सकते। हम ऐसा क्यों होने देना चाहेंगे? प्रशासन को तुरंत किसी ठोस कार्ययोजना के साथ सामने आना होगा। हर चीज को हल्के में लिया जा रहा है और जमीनी स्तर पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।”*

2. ‘बार-बार उल्लंघन पर लाइसेंस और गाड़ी दोनों छीन लिए जाएं’:

  • खंडपीठ ने बार-बार तेज रफ्तार और खतरनाक ड्राइविंग करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुझाते हुए कहा:*”यदि कोई चालक बार-बार ऐसा करता है, तो उसका लाइसेंस रद्द होगा या फिर वाहन जब्त किया जाएगा (Your licence will go, or vehicle)। अब कुछ कठोर और निर्णायक कार्रवाई करनी ही होगी।हमने PWD मैनुअल देखा, हमने MoRTH के दिशानिर्देश देखे, IRC के मानक देखे—कागजों पर सब कुछ मौजूद है, लेकिन जमीन पर कुछ भी नहीं है। यही हम आपको बताना चाहते हैं।”*

3. ‘अवास्तविक बस समय-सारणी (Timetable) और रात में दौड़ने वाली सुपरकारें’:

  • अदालत ने परिवहन आयुक्त नागराज चकीलम से पूछा कि क्या बसों की अवास्तविक समय-सारणी ही उन्हें ओवर-स्पीडिंग के लिए मजबूर करती है:“केरल में हर दिन लोग सड़कों पर मर रहे हैं। आप हमें सिर्फ यह बताइए कि एर्नाकुलम में इस तरह ओवर-स्पीडिंग कैसे हो रही है? इसे रोकने के लिए आपने क्या किया है?इसके अलावा, यदि रात में पोर्श (Porsche) या फेरारी (Ferrari) जैसी लग्जरी कारें सड़कों पर बेतहाशा और जानलेवा गति (Breakneck speed) से दौड़ रही हैं, तो उन्हें तत्काल चिह्नित किया जाना चाहिए। दो दिनों के भीतर उपयुक्त प्राधिकारी और वाहन मालिक दोनों को इस उल्लंघन की सूचना मिल जानी चाहिए और कार्रवाई होनी चाहिए।”

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम (3 नवंबर 2026)

संदर्भ / विवरणतथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे
फोरम / न्यायालयकेरल उच्च न्यायालय, एर्नाकुलम (स्वतः संज्ञान जनहित याचिका क्षेत्राधिकार)
पीठन्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. (Justice Raja Vijayaraghavan V) एवं न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार (Justice KV Jayakumar)
सुनवाई की तिथि3 नवंबर 2026 (अगली सुनवाई 3 सप्ताह बाद नियत)
केस संदर्भस्वतः संज्ञान बनाम मुख्य सचिव, केरल सरकार व अन्य [Suo Motu v The Chief Secretary and ors and connected cases]
कार्रवाई का मूल आधारकेरल राज्य भर में निजी बसों, सरकारी KSRTC बसों और ओवर-स्पीडिंग निजी वाहनों द्वारा आए दिन पैदल चलने वाले यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और स्कूली बच्चों को कुचलने की भयावह दुर्घटनाएं।
परिवहन विभाग की ओर से प्रस्तुत जवाबकेरल के परिवहन आयुक्त नागराज चकीलम (Transport Commissioner Nagaraj Chakilam) ने अदालत को अवगत कराया कि:
1. बसों के समय और जीपीएस आधारित रियल-टाइम लोकेशन को एकीकृत करने के लिए ‘केरल बस’ (Kerala Bus) नामक एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है।
2. प्रतिस्पर्धा और रेस रोकने के लिए बसों की मौजूदा समय-सारणी (Time Schedules) को इसी माह संशोधित किया जा रहा है।
अदालत की असंतुष्टिपीठ ने अधिकारियों द्वारा दाखिल हलफनामों का अवलोकन करते हुए कहा कि पूर्व के अदालती आदेशों में उठाए गए अधिकांश महत्वपूर्ण बिंदुओं को अब भी अनसुलझा छोड़ दिया गया है।
हाईकोर्ट द्वारा दिए गए तात्कालिक निर्देश1. एकीकृत सड़क सुरक्षा निगरानी प्लेटफॉर्म (Integrated Road Safety Monitoring Platform) का विकास किया जाए।
2. अपर महाधिवक्ता (AAG) मोहम्मद शाह पी.ए. इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व संभालेंगे।
3. राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) सड़क सुरक्षा मामलों के जानकार एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को इस संचालन समिति (Steering Committee) के लिए नामित करेंगे।

विधिक एवं विधायी विश्लेषण: ‘अनुच्छेद 21 सुरक्षित सड़कें और लाइसेंस रद्दीकरण का वैधानिक दायित्व’

  • ‘अनुच्छेद 21’ के तहत सुरक्षित सड़कों का संवैधानिक अधिकार:
    • भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सड़क सुरक्षा पर न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करते हुए यह सुस्थापित किया है कि नागरिकों को केवल चलने का अधिकार नहीं, बल्कि दुर्घटना-मुक्त और सुरक्षित सड़कों पर चलने का मौलिक अधिकार प्राप्त है।
    • जब राज्य की नियामक एजेंसियां (पुलिस व मोटर वाहन विभाग) PWD और MoRTH के सुरक्षा नियमों को कागजों तक सीमित रखती हैं, तो यह सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन के अधिकार की विफलता बन जाती है।
  • मोटर यान अधिनियम, 1988 के तहत कड़ी दंडात्मक शक्तियां:
    • धारा 19(1)(f): प्राधिकारी को यह शक्ति देती है कि यदि कोई व्यक्ति ऐसा आचरण करता है जो जनता के लिए खतरनाक है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है।
    • धारा 207: बिना वैध परमिट, अत्यधिक गति या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने पर पुलिस और आरटीओ अधिकारियों को वाहन को मौके पर ही जब्त करने का अधिकार प्रदान करती है। उच्च न्यायालय ने इन निष्क्रिय पड़े प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने का आह्वान किया है।
  • समय-सारणी (Timetable) और बस प्रतिस्पर्धा की विधिक समस्या:
    • केरल और अन्य राज्यों में निजी बसों के बीच कुछ मिनटों के अंतर पर परमिट जारी किए जाते हैं, जिसके चलते सवारियां बैठाने के लिए बस ड्राइवर सड़कों पर जानलेवा रेस लगाते हैं।
    • जब तक बस परमिटों की समय-सारणी को वैज्ञानिक और यथार्थवादी नहीं बनाया जाएगा, तब तक केवल जुर्माने लगाने से चालकों की मानसिकता में बदलाव नहीं लाया जा सकता।

विधिक विवरण एवं संदर्भ

  • न्यायालय: केरल उच्च न्यायालय, मुख्य पीठ एर्नाकुलम (स्वतः संज्ञान जनहित याचिका क्षेत्राधिकार)
  • केस संदर्भ: स्वतः संज्ञान बनाम मुख्य सचिव, केरल सरकार व अन्य [Suo Motu v The Chief Secretary and ors — W.P.(C) No. … / 2026]
  • पीठ: न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. (Justice Raja Vijayaraghavan V) एवं न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार (Justice KV Jayakumar) (खंडपीठ)
  • आदेश की तिथि: 3 नवंबर 2026
  • अगली सुनवाई: तीन सप्ताह बाद

विधिक व प्रशासनिक प्रतिनिधित्व:

  • राज्य सरकार व अभियोजन की ओर से: अपर महाधिवक्ता (Additional Advocate General) मोहम्मद शाह पी.ए. (AAG Mohammed Shah PA)।
  • परिवहन विभाग की ओर से: परिवहन आयुक्त नागराज चकीलम (Transport Commissioner Nagaraj Chakilam)।
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक दिशानिर्देश:
    • भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) एवं अनुच्छेद 226 (रिट क्षेत्राधिकार)
    • मोटर यान अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act, 1988):
      • धारा 19 — ड्राइविंग लाइसेंस का निलंबन व रद्दीकरण
      • धारा 183 व 184 — अत्यधिक गति और खतरनाक ड्राइविंग के लिए दंड
      • धारा 207 — वाहनों को जब्त करने की शक्ति
    • केंद्रीय मोटर यान नियम, 1989 (CMVR)
    • MoRTH एवं भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के सड़क सुरक्षा मानक
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
    • सड़क सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और लापरवाह ड्राइविंग पर प्रतिबंध का विधिक मानक: ‘राज्य की सड़कों पर सुरक्षित आवागमन नागरिकों का अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है; महिलाओं, बच्चों और पैदल यात्रियों को सार्वजनिक बसों या अनियंत्रित निजी वाहनों की तेज रफ्तार के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता; मोटर यान नियमों, PWD मैनुअल और MoRTH दिशानिर्देशों का केवल कागजी अस्तित्व पर्याप्त नहीं है, उनका जमीनी प्रवर्तन अनिवार्य है; आदतन तेज गति और लापरवाह ड्राइविंग करने वालों के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए जाने चाहिए और वाहनों को जब्त किया जाना चाहिए; रात में दौड़ने वाली सुपरकारों की डिजिटल कैमरों से त्वरित पहचान कर 48 घंटे में मालिकों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए; तथा सड़क दुर्घटनाओं को रोकने हेतु एक समग्र, तकनीकी और एकीकृत निगरानी प्लेटफॉर्म स्थापित किया जाना राज्य का वैधानिक कर्तव्य है।’
  • वर्तमान स्थिति व भावी प्रक्रिया: केरल पुलिस और परिवहन विभाग को अब संयुक्त रूप से एक विशेष संचालन समिति गठित करनी होगी; अपर महाधिवक्ता और डीजीपी द्वारा नामित अधिकारी अगले तीन सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय के समक्ष एकीकृत सड़क सुरक्षा निगरानी प्रणाली (Integrated Platform) का विस्तृत ब्लूप्रिंट और बस समय-सारणी में किए गए संशोधनों की कार्ययोजना पेश करेंगे।

Road Safety:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतकेरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court), कोच्चि
पीठन्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. एवं न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार
मामला/विषयसड़क हादसों और लापरवाह ड्राइविंग पर स्वतः संज्ञान याचिका (Suo Motu v The Chief Secretary & Ors)
प्रतिवादी अधिकारीकेरल के मुख्य सचिव, परिवहन आयुक्त नागराज चकीलम् (Transport Commissioner Nagaraj Chakilam) व पुलिस महानिदेशक (DGP)
हाईकोर्ट के मुख्य सुझाव1. बार-बार नियम तोड़ने वालों का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करना व गाड़ियां ज़ब्त करना।
2. रात में रेसिंग करने वाली सुपरकारों (Porsche, Ferrari आदि) पर 2 दिन के भीतर ट्रैक कर कार्रवाई।
3. ‘Integrated Road Safety Monitoring Platform’ का गठन।
प्रशासन का पक्ष‘केरल बस’ (Kerala Bus) डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जीपीएस व समय-सारणी का एकीकरण किया जा रहा है।
अगली कार्रवाईमामले की अगली सुनवाई 3 सप्ताह बाद होगी।
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