Thursday, October 1, 2026
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Judge row 12 : नकदी विवाद में फंसे जज यशवंत वर्मा पर महाभियोग की सिफारिश…सीजेआई ने लगाई मुहर

Judge row 12 : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की है।

राष्ट्रपति व पीएम को लिखी चिट्‌ठी

सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जांच समिति की रिपोर्ट में नकदी मिलने के आरोपों की पुष्टि होने के बाद
सीजेआई ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट और जस्टिस वर्मा की प्रतिक्रिया भेजी है। फिलहाल, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

समिति ने रिपोर्ट में आरोपों को सही पाया

तीन सदस्यीय समिति ने 3 मई को अपनी रिपोर्ट फाइनल की थी। इसमें जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास से नकदी मिलने के आरोपों की पुष्टि की गई। समिति में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागु, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थीं।

सीजेआई ने पहले दिया था इस्तीफे का सुझाव

सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में गंभीर टिप्पणियों के बाद सीजेआई ने पहले जस्टिस वर्मा को इस्तीफा देने का सुझाव दिया था। लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो सीजेआई ने महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश की।

50 से ज्यादा लोगों के बयान लिए गए

समिति ने जांच के दौरान 50 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए। इनमें दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा और दिल्ली फायर सर्विस के प्रमुख भी शामिल थे। ये दोनों 14 मार्च की रात 11:35 बजे जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर आग लगने की घटना के बाद सबसे पहले मौके पर पहुंचे थे।

दिल्ली हाईकोर्ट से हटाकर इलाहाबाद भेजे गए

जांच शुरू होने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने जस्टिस वर्मा से न्यायिक कार्य वापस ले लिया था। इसके बाद उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया, जहां उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया।

इन-हाउस प्रक्रिया के तहत हुई कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में इन-हाउस प्रक्रिया तय की थी, जिसके तहत किसी संवैधानिक अदालत के जज पर लगे आरोपों की जांच की जाती है। इस प्रक्रिया के दूसरे चरण में सीजेआई की निगरानी में तीन सदस्यीय समिति बनाई जाती है। अगर समिति यह पाती है कि आरोप गंभीर हैं और महाभियोग की जरूरत है, तो सीजेआई राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को इसकी सिफारिश करते हैं।

जस्टिस वर्मा ने आरोपों से किया इनकार

जस्टिस वर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति को दिए अपने जवाब में सभी आरोपों से इनकार किया है। हालांकि, समिति ने उनके जवाब को संतोषजनक नहीं माना।

महाभियोग की प्रक्रिया क्या है?

  • पहले चरण में शिकायत की प्रारंभिक जांच होती है।
  • दूसरे चरण में तीन सदस्यीय समिति बनती है।
  • समिति अगर आरोपों को गंभीर मानती है, तो सीजेआई जज को इस्तीफे या स्वैच्छिक रिटायरमेंट की सलाह देते हैं।
  • अगर जज ऐसा नहीं करते, तो सीजेआई राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को महाभियोग की सिफारिश करते हैं।
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