Thursday, August 6, 2026
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MATHURA Temple: श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर के विकास पर लगी सुप्रीम मुहर…जय श्री कृष्णा

MATHURA Temple: सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर के विकास की उत्तर प्रदेश सरकार की योजना के क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त कर दिया है, जिससे लाखों श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा।

5 एकड़ भूमि की खरीद के लिए फंड का करें प्रयोग

न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को अनुमति दी कि वह श्री बांके बिहारी मंदिर के फंड का उपयोग मंदिर के चारों ओर 5 एकड़ भूमि की खरीद के लिए कर सकती है, ताकि वहां एक होल्डिंग एरिया बनाया जा सके। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया कि जो भूमि विकास के उद्देश्य से खरीदी जाएगी वह देवता/ट्रस्ट के नाम पर होनी चाहिए। इस प्रक्रिया में, सुप्रीम कोर्ट ने 8 नवंबर 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से संशोधित किया, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य की योजना को स्वीकार तो किया था, लेकिन मंदिर के फंड के उपयोग की अनुमति नहीं दी थी।

सभी का प्रबंधन कोर्ट द्वारा नियुक्त रिसीवर्स द्वारा हो रहा है…

इन सभी का प्रबंधन कोर्ट द्वारा नियुक्त रिसीवर्स द्वारा हो रहा है, जिनमें से कई मथुरा के अधिवक्ता हैं। कुछ मंदिरों जैसे श्री बांके बिहारी मंदिर का संचालन सिविल जज कर रहे हैं। पीठ ने यह भी कहा कि इतिहासिक मंदिरों को उचित देखरेख और सुविधाओं की आवश्यकता होती है, लेकिन रिसीवर की नियुक्ति वर्षों से चल रही है, जो कि एक अस्थायी उपाय मात्र होना चाहिए था। पीठ ने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोर्ट ने रिसीवर नियुक्त करते समय इस बात पर विचार नहीं किया कि मथुरा और वृंदावन वैष्णव संप्रदायों के दो सबसे पवित्र स्थल हैं, और इसलिए रिसीवर के रूप में वैष्णव संप्रदाय के लोगों को नियुक्त किया जाना चाहिए था।

पीठ ने कहा

“हम उत्तर प्रदेश सरकार को योजना को पूर्ण रूप से लागू करने की अनुमति देते हैं। बांके बिहारी जी ट्रस्ट के पास देवता/मंदिर के नाम पर फिक्स्ड डिपॉज़िट में धनराशि है… राज्य सरकार को प्रस्तावित भूमि की खरीद के लिए इस राशि का उपयोग करने की अनुमति दी जाती है।”

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां

पीठ ने कहा कि चूंकि अदालत बृज क्षेत्र के मंदिरों के प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की निगरानी कर रही है, इसलिए यह जनहित में है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए मुद्दे का शीघ्र निपटारा हो। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत योजना के अनुसार, मंदिर के चारों ओर 5 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, जिस पर पार्किंग, श्रद्धालुओं के लिए आवास, शौचालय, सुरक्षा चेक पोस्ट और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में माना था कि भूमि का अधिग्रहण और इसके बाद का विकास कार्य तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। राज्य सरकार ने बताया कि कॉरिडोर परियोजना पर 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आने का अनुमान है, और वह भूमि खरीद के लिए मंदिर फंड का उपयोग करना चाहती है, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि एक सिविल मुकदमा पिछले 25 वर्षों से लंबित है, और केवल कोर्ट द्वारा नियुक्त रिसीवर मंदिर का संचालन कर रहा है, जिससे यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक अव्यवस्था गहरी और व्यापक है।

मंदिर की वर्तमान स्थिति

सरकार ने कोर्ट को बताया कि श्री बांके बिहारी मंदिर केवल 1,200 वर्ग फीट में फैला हुआ है, जबकि रोजाना 50,000 श्रद्धालु आते हैं, और यह संख्या वीकेंड पर 1.5 से 2 लाख तथा त्योहारों पर 5 लाख से अधिक हो जाती है। मंदिर में प्रशासन और सुविधाओं की भारी कमी है। राज्य ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश बृज योजना एवं विकास बोर्ड अधिनियम, 2015 को मथुरा जिले में बृज धरोहर के विकास और संरक्षण के लिए लागू किया गया था, जिसके तहत मंदिरों के प्रशासन के लिए एक परिषद गठित की गई है। मथुरा-वृंदावन क्षेत्र के कई प्रसिद्ध मंदिर जैसे: राधा वल्लभ मंदिर (वृंदावन), दाऊजी महाराज मंदिर (बलदेव), नंदभवन (गोकुल), मुखारबिंद (गोवर्धन), दानघाटी (गोवर्धन), श्री लाड़ली जी महाराज मंदिर (बरसाना)।

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